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Shradh Puja: श्राद्ध में पितरों को क्यों अर्पण किया जाता है जल ?

Myjyotish Expert Updated 31 Aug 2020 11:33 AM IST
shradh pooja
shradh pooja - फोटो : Myjyotish

हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार जब सूर्य कन्या राशि मे प्रवेश करते हैं तो तब मृत्युलोक से पितृ अपने स्वजनों के पास धरती पर आते हैं। शास्त्रों में पिता को वसु , रुद्र को दादा और परदादा को आदित्य के समान माना जाता हैं। श्राद्ध में तीन पीढ़ियों के पितरों को महत्व दिया गया हैं । इसके पीछे कारण है कि इंसान की स्मरण शक्ति सिर्फ तीन पीढ़ियों तक ही सीमित हैं। यह भी कहा जाता है कि इन दिनों सभी पूर्वज पृथ्वी पर सुक्ष्म रूप में आकर उनके लिए किए गए तर्पण को ग्रहण करते हैं।

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श्राद्ध में जलदान पिंडदान पिंड के रूप में पितरो को समर्पित किया जाता हैं । पितृ ऋण को चुकाने के लिए श्राद्ध किया जाता हैं। पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य में पिंडदान का विशेष महत्व है। काशीकुंड पर किए गए पिंडदान से पितरों को मुक्ति मिलती है। 

श्राद्ध में जल और तिल को पूर्वजों को अर्पित किया जाता है । ऐसा कहा जाता है कि जल एक मात्र ऐसी चीज़ है जो जन्म से मोक्ष तक साथ देती हैं। तिल की अपनी अलग विशेषता है कहा जाता है इसी के अर्पण से पितरों को तृप्ति मिलती हैं।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार तर्पण का जल सूर्योदय से आधे प्रहर तक अमृत के रूप में , एक प्रहर तक शहद के रूप में , डेढ़ प्रहर तक दूध के रूप में और साढ़े तीन बजे तक जल के रूप में पितरों को प्राप्त होता हैं । पितरों को अमृत की प्राप्ति हो इसलिए जातक को सूर्योदय के वक़्त ही जल तर्पण कर देना चाहिए ।
जल अर्पित करते समय इस मंत्र का तीन बार जाप करें।
'ओम सर्वपितृ देवाय नमः।'

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हर साल विश्व प्रसिद्ध मेले पितृ मेले का आयोजन होता है, परंतु इस वर्ष कोरोना के चलते ऐसा नही होगी । सितंबर में लगने वाले इस मेले को बिहार सरकार ने जनहित के लिए स्थगित कर दिया है । इस वर्ष नवरात्रि भी श्राद्ध के तुरंत बाद नहीं बल्कि 1 महीने बाद है।  इसका कारण अधिक मास है । ज्योतिषों की माने तो कई सौ साल बाद ऐसा संजोग बना हैं कि लीप ईयर और अधिक मास साथ आया हैं।

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