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बच्चों के कमरें के वास्तु टिप्स

पंडित भरतलाल शास्त्री Updated 05 Jul 2020 12:20 PM IST
बच्चों  के कमरें  के वास्तु टिप्स
बच्चों के कमरें के वास्तु टिप्स - फोटो : Myjyotish

हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी सन्तान बहुत ही योग्य हो, खूब पढ़े लिखे और उसके वंश का नाम रौशन करें, इसके लिए वह हर भरसक कोशिश करता है। शास्त्रों के अनुसार बच्चों के भविष्य, उनके उत्तम विकास के लिए वास्तु के नियमों की बिलकुल भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए । किसी भी घर में बच्चों के कमरें का वास्तु का उतना ही महत्व है जितना घर के मुखिया के लिए बैड रूम का ।

अगर बच्चों का कमरा वास्तु के अनुरूप होगा तो उनका शरीर, मन और मस्तिष्क स्वस्थ रहेगा वह ना केवल किसी भी कार्य में पूरे जोश से बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे वरन उन्हें अपनी मेहनत चाहे वह शिक्षा में , खेल में , किसी भी ललित कलाओं में कहीं भी वह अपनी भागेदारी करें उन्हें उत्कर्ष परिणाम प्राप्त करने में आसानी होगी । घर में बच्चों का कमरा उसकी अपनी छोटी दुनिया होती है उसका कमरा उसके विकास, हर्ष-उल्लास, सृजन और उसके सपनो का केंद्र होता है। इसलिए अगर आप चाहते है की आपका बच्चा आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरे, अपनी उम्र के बच्चो में अपनी कक्षा में अग्रणी रहे तो आपके भवन में बच्चे के कमरे का स्थान बिलकुल सही होना चाहिए ।

वह जिस कमरें में रहता है जहाँ पर पढ़ता है, अपना समय बिताता है वहाँ पर अवश्य ही ध्यान दीजिये । बच्चें के कमरे में उसका पलंग, उसकी स्टडी टेबल, उस कमरे का रंग, उसके कमरे में दीवारो पर चित्र, घडी, कमरे में रौशनी की व्यवस्था, खिड़कियां, दरवाजे आदि की दिशा बिलकुल सही होनी चाहिए । यहाँ पर हम आपको बच्चों के कमरे के वास्तु टिप्स बता रहे जिन्हे अपनाकर आप अपने बच्चों के भविष्य में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते है ।


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  • भवन में बच्चों का कमरा पूर्व, उत्तर, पश्चिम या वायव्य दिशा में होना शुभ माना गया है। वैसे पश्चिम दिशा बच्चों के कमरें के लिए सबसे उपयुक्त मानी गयी है। लेकिन आग्नेय, दक्षिण अथवा नैऋत्य कोण में बच्चों का कमरा नहीं होना चाहिए। बच्चों के कमरे की साज सज्जा पूरी तरह से उनके अनुकूल ही होनी चाहिए तभी वे श्रेष्ठ परिणाम दे पाएंगे, उनका समुचित विकास हो पायेगा और वह अच्छे संस्कार ग्रहण कर पाएंगे ।
  • बच्चों के कमरे में उनका पलंग कमरें के दक्षिण-पश्चिम कोने / पश्चिम अथवा दक्षिण में रखें और सोते समय उनका सर पूर्वी या दक्षिणी दिशा में रहे। पूर्व दिशा की तरफ सर होने से बच्चो की बुद्धि तेज होती है और वह आसानी से ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं ।
  •  बच्चों की पढ़ने की कुर्सी-मेज़ ईशान, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए। बच्चा पढ़ते समय इस तरह से बैठे की उसका मुंह ईशान कोण या पूर्व दिशा की ओर तथा पीठ पश्चिम दिशा की तरफ हो ।
  • बच्चों के कमरे में दरवाजे पूर्व या उत्तर दिशा में होना उत्तम माना जाता हैं लेकिन यह ध्यान रहे कि दरवाजे के सामने बच्चों का बिस्तर नहीं होना चाहिए ।
  • बच्चों के कमरें की दीवारों के लिए हल्के रंग का प्रयोग करें । उनके बैडरूम के लिए हल्का हरा रंग आदर्श माना जाता है। क्योंकि हरा रंग कल्पनाशीलता, ताजगी और एकाग्रता को बढ़ाने में सहायता करता है।।
  • यदि बच्चें के कमरें में कम्प्यूटर भी रखना हो तो उसे आग्नेय कोण, दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा में रखना चाहिए ।
  • बच्चों के कमरे में उनकी कापी-किताबो की रैक तथा उनके कपड़ों, जूतो और खिलोनो वाली अलमारी कमरे के नैऋत्य कोण अथवा दक्षिण में होनी चाहिए ।
  • बच्चों के पढ़ाई की टेबिल पर कभी भी कापी किताबे इधर उधर बिखरी हुई, अस्त व्यस्त नहीं रहनी चाहिए । इन्हे टेबिल या रैक पर सलीके से रखना चाहिए । बच्चों की पढ़ाई की टेबिल बिलकुल साफ सुथरी रहनी चाहिए ।
  • बच्चा जब भी पढ़ने बैठे उसके पीठ के पीछे ठोस दीवार होनी चाहिए । इससे एकाग्रता में बाधा नहीं आती है ।
  • बच्चों के कमरें में सभी फर्नीचर को दीवार से 2-3 इंच की दूरी बनाकर रखें। इससे कमरे में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है ।
  • बच्चों के कमरे में खिड़कीयाँ पूर्व एवं उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए , उनके कमरें की कोई भी खिड़की नैत्रत्य, दक्षिण या पश्चिम दिशा की तरफ नहीं खुलनी चाहिए ।
  • बच्चों के कमरे में उनके पलंग के बिल्कुल सामने शीशा, कंप्यूटर या टीवी बिलकुल भी न लगाएं इससे उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है और वह चिड़चिड़े और बिगड़ैल भी हो सकते है।
  • बच्चो के कमरे में ईशान कोण और ब्रह्म स्थान ( कमरें के बीच का स्थान ) को बिलकुल साफ और खाली रखे । यहाँ पर किसी भी प्रकार कबाड़ या गन्दगी ना इकठ्ठा होने दे अन्यथा बच्चें माता-पिता के नियन्त्रण से बाहर हो जाते है ।
  • बच्चों के कमरे में लगे हुए चित्र वा पेंटिंग्स उनके विचारों, उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित करते है इसलिए किसी भी तरह के जंगली जानवरो के, हिंसात्मक, फूहड़, भूत प्रेतों के मुखौटे, पेंटिंग्स एवं चित्र बच्चों के कमरे में बिलकुल भी नहीं लगाने चाहिए। भगवान गणेश तथा सरस्वतीजी को बुद्धि का देवी देवता माना गया है इसलिए उनके कमरे के पूर्वी भाग की ओर श्री गणेश तथा सरस्वती की पेंटिंग या चित्र अवश्य ही लगाएं ।
  • आपका बच्चा जिस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहता है, उस क्षेत्र के सफल व्यक्तियों के चित्र अथवा पेंटिंग्स बच्चों के कमरे में अवश्य ही लगाएं । साथ ही उनके बारे में नवीन जानकारियाँ भी इकठ्ठा करते रहे । इससे बच्चें पर सकारात्मक असर पड़ता है उसे प्रेरणा मिलती है ।
  • बच्चों के कमरे में हरे फलदार वृक्षों, फल-फूल, हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें, आकाश, बादल, चंद्रमा, समुद्र आदि के चित्र भी पूर्व व उत्तर की दीवारों पर लगाने चाहिए। इससे कमरे में सकारत्मक ऊर्जा बनी रहती है ।

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