Guru Purnima 2020 Date: Why Is Satyanarayan Puja/katha Is Important On Guru Purnima - गुरु पूर्णिमा 2020: क्यों महत्वपूर्ण है सत्यनारायण की कथा - Myjyotish News Live
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गुरु पूर्णिमा 2020: क्यों महत्वपूर्ण है सत्यनारायण की कथा

Myjyotish Expert Updated 01 Jul 2020 11:27 AM IST
गुरु पूर्णिमा 2020
गुरु पूर्णिमा 2020 - फोटो : Myjyotish

गुरु पूर्णिमा 2020 : गुरु पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष 5 जुलाई , 2020 रविवार को मनाया जाने वाला है। यह पूर्णिमा प्रति वर्ष आषाढ़ माह में आती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिव ने अपने प्रथम सात शिष्यों को ज्ञान प्रदान किया था। हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु को जग का गुरु माना गया है। वह अपने विभिन्न रूपों में धरती पर प्रकट होतें है और साथ ही मानव को जीवन का वास्तविक अर्थ ज्ञात करवाते है। गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ किया जाता है।  कहा जाता है की इस कथा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही समस्त बाधाएं दूर हो जाती है। इस कथा के पाठ से प्राप्त होने वाला आशीर्वाद बहुत शक्तिशाली होता है। इससे माध्यम से चाहे गृह शांति का विषय हो , चाहे सुख - समृद्धि की प्राप्ति का , व्यक्ति को समस्त चीज़ों का आशीष प्राप्त होता है।

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सत्यनारायण का पाठ समस्त शुभ कार्यों से पूर्व किया जाता है। इसके माध्यम से दुखों का अंत हो जाता है। सत्यनारायण भगवान के आशीर्वाद से व्यक्ति को सिद्धि प्राप्त होती है। उसके घर में किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं रहती है। सत्यनारायण भगवान अपने भक्तों पर आयी सभी कष्टों का विनाश करतें है। सत्यनारायण की कथा का पाठ करने के लिए गुरु पूर्णिमा का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ व्यक्ति को समस्त कष्टों से दूरकर सफलता प्रदान करता है। इस पाठ से बृहस्पत ग्रह के प्रभाव भी समाप्त होतें है। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है की मनुष्य के भीतर सत्य को जगाएं रखने के लिए सत्यनारायण भगवान का पाठ करना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

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सत्यारायण कथा का सबसे विशेष उपदेश है की यदि कोई व्यक्ति सत्य और निष्ठा को अपने जीवन का मूल्य बना ले तो उसे किसी भी लोक में दुःख का सामना नहीं करना पड़ता है। सत्यनाराण पूजा के पश्चात् ब्राह्मण भोज बहुत ही अहम माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार हिन्दू धर्म में ब्राह्मण को ईश्वर के सबसे निकट माना गया है। ब्राह्मण वह है जो संसार को ईश्वर रुपी गुरु के विषय में बतातें है। उन्हें संसार की निमिन्न विद्याओं का ज्ञाता माना गया है। इसलिए ब्राह्मण को भोज करवाने का अर्थ होता है स्वयं ईश्वर को अपने द्वार पर भोज के लिए आमंत्रित करना।

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