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माँ दुर्गा की आराधना से होता है शत्रुओं का विनाश

MyJyotish Expert Updated 13 May 2020 11:55 AM IST
Worship of Mother Durga leads to destruction of enemies
माँ दुर्गा हिन्दू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं। देवी दुर्गा सर्वशक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्हें आदिपराशक्ति के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। वह अपने पार्वती स्वरूप में शिव शंकर की अर्धांगिनी हैं। वह रक्षा की देवी के रूप में भी जानी जाती हैं। वह सिंह पर सवारी करती हैं। उन्हें महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है। दुर्गा का अर्थ है जिनके विनाश का कोई श्रोत न हो अर्थात जिनको कोई परास्त न कर सके। इन्हे अष्टसिद्धि की दात्री भी कहा जाता है। देवी दुर्गा के आशीर्वाद से विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है। समस्त विपदाओं के निवारण का मार्ग प्रकाशित होता है। वह प्रधान प्रकृति, गुणवती योगमाया बुद्धित्व की जननी हैं।

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 दुर्गा अपने भक्तों को अंधकार व अज्ञानता से भरे राक्षसों से रक्षा करती हैं। उनकी कृपा से भक्त के जीवन की समस्याएं दूर हो जाती हैं तथा उसके घर में धन - सम्पदा का वास होता है। देवी दुर्गा शांति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली विनाशकारी शक्तियों का अंत करती हैं। उनके आशीर्वाद से संसार में नकारात्मकता का विनाश होता है तथा धर्म की विजय होती है। देवी दुर्गा अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव उपस्थित होती हैं। वह प्रमुख देवी हैं जिनकी तुलना परंब्रह्म से की गई है। उनकी शक्ति के समक्ष टिकने का सामर्थ्य किसी में नहीं। वह अपने शताक्षी स्वरूप के कारण शांकभरी के नाम से भी जानी जाती हैं। देश भर में माता के अनेकों मंदिर है। सती स्वरूप में उनके अंगो के विभाजन के साथ ही भारत में 51 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ था।

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माँ दुर्गा की उपासना के लिए पूर्ण विधिविधान से संकल्प करना चाहिए। पूजा के दिन प्रातः काल उठकर स्नान आदि कर लेना चाहिए। उसके पश्चात माँ दुर्गा को फल - फूल तथा भोग अर्पण करने चाहिए। इस दिन दुर्गासप्तशती का पाठ भी करना चाहिए। इस पाठ से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। देवी दुर्गा का अवतार श्रेष्ठ पुरुषों की रक्षा के लिए हुआ है। वह अपने भक्तों की समस्त नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं। उनका जीवन सांसारिक सुखों से परिपूर्ण कर देती हैं। देवी दुर्गा की महिमा अलौकिक है। उनका आशीर्वाद भक्तों के जीवन का उद्धार करता है।

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