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Sharad Purnima 2020 Date: कब और क्यों मनाया जाता है शरद पूर्णिमा का पर्व ? जानें महत्व

Myjyotish Expert Updated 29 Oct 2020 12:24 PM IST
sharad Purnima
sharad Purnima - फोटो : Myjyotish
शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बहुत ही विशेष महत्व होता है । शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा, कोजागिरी पूर्णिमा या कौमुदी व्रत भी कहा जाता है । पूरे साल में जितनी भी पूर्णिमा तिथि आती है उनमें से सबसे फलदाई शरद पूर्णिमा को माना जाता है । मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन आकाश से अमृत की वर्षा होती है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है इसलिए शरद पूर्णिमा के दिन रात को खीर बनाकर आसमान के नीचे रखी जाती है। लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन अमृत की वर्षा होती है और खीर में अमृत की बूंदें गिरती है और लोग उसको प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं । शरद पूर्णिमा की शाम लक्ष्मी जी भम्रण पर निकलती हैं और अपने भक्तों को आर्शीवाद प्रदान करती हैं वहीं इस दिन किए जाने वाले उपाय से जीवन में धन की कमी दूर होती है ।

आर्थिक वृद्धि हेतु शरद पूर्णिमा पर कराएं माँ लक्ष्मी का श्री सूक्त पाठ एवं 700 आहुतियों के साथ विशेष हवन - 31 अक्टूबर 2020 - महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर

शरद पूर्णिमा व्रत मुहूर्त
30 अक्टूबर 2020 को 17:47:55 से पूर्णिमा आरम्भ। 
31 अक्टूबर 2020 को 20:21:07 पर पूर्णिमा समाप्त होगी ।

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। कहते हैं यह दिन इतना शुभ और सकारात्मक होता है कि छोटे से उपाय से बड़ी-बड़ी विपत्तियां टल जाती हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था।  इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी यह तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है। शरद पूर्णिमा के दिन कोल्हापुर के श्री महालक्ष्मी मंदिर में लक्ष्मी जी की पूजा करना बहुत फलदायी होता है | शरद पूर्णिमा के दिन बांके बिहारी जी की पूजा का अलग महत्व होता है । शरद पूर्णिमा के दिन ठाकुर जी के वस्त्र सेवा माखन मिश्री सेवा और बंसी सेवा का विशेष फल मिलता है।

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