myjyotish

9818015458

   whatsapp

8595527218

Whatsup
  • Login

  • Cart

  • wallet

    Wallet

Home ›   Blogs Hindi ›   Maa chandraghanta Puja On 3rd Day Of Navratri

Shardiya Navratri 2020: माँ दुर्गा की स्तुति का तीसरा दिन आज, देवी चंद्रघंटा स्वरुप का किया जाता है पूजन

Myjyotish Expert Updated 19 Oct 2020 01:11 PM IST
मां चंद्रघंटा पूजा: नवरात्रि का तीसरा दिन
मां चंद्रघंटा पूजा: नवरात्रि का तीसरा दिन - फोटो : Myjyotish
मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम चंद्रघंटा है | नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा आराधना की जाती है । माता चंद्रघंटा का यह स्वरूप अत्यंत फलदायक और कल्याणकारी होता है। इनके माथे में घंटे के आकार का आधा चक्र है इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। माता चंद्रघंटा के शरीर का रंग सोने के समान चमकीला होता | इनके दसों हाथों में खड़क आदि विराजित है। चंद्रघंटा माता का वाहन शेर है।  मां के घंटे की आवाज इतनी भयानक है कि उसकी आवाज से अत्याचारी दानव और राक्षस सदैव डरे हुए रहते हैं। नवरात्रि में अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं l दिव्य सुगंधित वस्तुओं का अनुभव होता है तथा अनेक प्रकार की आवाज सुनाई देती हैं | यह पल व्यक्ति के लिए अत्यंत सावधान रहने का होते हैं। माँ चंद्रघंटा की कृपा से व्यक्ति के सारे पाप और मुश्किलें खत्म हो जाती हैं | माँ की आराधना हमेशा फल देने वाली होती है। मां चंद्रघंटा भक्तों का कष्ट हरने वाली होती हैं | माँ का वाहन सिंह है | इनकी उपासना शेर की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाती है।

नवरात्रि पर विंध्याचल में कराएं दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ पाएं अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य 

माँ के घंटे की आवाज हमेशा अपने भक्तों की प्रेत और बाधाओं से रक्षा करती रहती है। मां का ध्यान करते ही घंटे की आवाज गूंजने लगती है। मां चंद्रघंटा दुष्टों का विनाश सदैव करने के बाद भी उनका स्वरूप दर्शक के लिए अत्यंत सौम्यता एवं शांति में रहता है। माँ चंद्रघंटा की आराधना से प्राप्त होने वाला एक बहुत बड़ा सद्गुण यह भी है कि वह व्यक्ति में वीरता निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का भी विकास होता है। मां चंद्रघंटा के मुख नेत्र तथा संपूर्ण शरीर में कांति गुण वृद्धि होती है।

आवाज में दिव्य अलौकिक माधुर्य का समावेश रहता है। मां चंद्रघंटा के भक्त जहां भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर सुख और शांति का अनुभव करते हैं। सादा को अपने मन वचन कर्म तथा काया को विधान के अनुसार पूर्ण शुद्ध करके स्नान करके पवित्र स्थान करके मां चंद्रघंटा को स्थापित करें तथा उनकी उपासना और आराधना करें। मां चंद्रघंटा की उपासना करने से हम संसार के सभी कष्टों से बचे रहते हैं तथा परम पद के अधिकारी बन सकते हैं। हमें हमेशा पवित्र स्थान को ध्यान में रखते हुए पूजा-अर्चना करनी चाहिए तथा हमेशा मां के अग्रसर होने का प्रयास करते रहना चाहिए। मां चंद्रघंटा का ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए परम कल्याणकारी होता है ।

यह भी पढ़ें :  

क्यों है यह मंदिर विशेष ? जानें वर्षों से कैसे जल रहा है पानी से दीपक

वास्तु शास्त्र के अनुसार सजाएं अपना घर, जानें मुख्य दिशाएं 

नवरात्रि से जुड़ी यह कुछ ख़ास बातें नहीं जानतें होंगे आप !
  • 100% Authentic
  • Payment Protection
  • Privacy Protection
  • Help & Support

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms and Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
X