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जानिए महाबली हनुमान की उपासना में क्यों करना चाहिए सुंदरकांड का पाठ

MyJyotish Expert Updated 29 Apr 2020 02:32 PM IST
Know why you should read Sunderkand in the worship of Mahabali Hanuman
रघु राम के प्रिय भक्त हनुमान संसार में सर्वशक्तिशाली कहलाए हैं। इनके पराक्रम की असंख्य गाथाएं प्रचलित हैं। यह शिव के 11 रूद्रावतारों में से एक हैं। धरती पर जिन सात चिरंजीवियों को अमरता का वरदान प्राप्त हुआ है उन सभी में से बजरंगबली एक हैं। इन्हें पवन पुत्र व मारुती नंदन के नाम से भी जाना जाता है अर्थात जो हवा का बेटा होता है। पवनदेव ने इनका पालन पोषण करने में बहुत अहम भूमिका निभाई थी। इनकी माता का नाम अंजना था जो पिछले जन्म में अप्सरा थीं परन्तु एक श्राप के कारण उन्हें मानव रूप में जन्म लेना पड़ा था। इनके पिता सुमेरु पर्वत के वानरराज केसरी थे जिससे हनुमान जी को केसरी नंदन भी कहा जाता है।

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हनुमान जी का शरीर वज्र समान मजबूत है इसलिए ही उन्हें बजरंगबली के नाम से सुशोभित किया गया है। बालपन में हनुमान जी बहुत नटखट थे। एक कथा के अनुसार उन्होंने एक बार सूर्यदेव को आम समझकर ग्रहण करने की चेष्ठा की थी। वाल्मीकि ऋषि द्वारा लिखी गई रामायण के अनुसार पूर्ण रामायण में हनुमान जी का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान था। हनुमान जी का जन्म भी प्रत्येक रूप से राम जी की सहायता के लिए हुआ था। उनकी शक्ति व बल के आगे कोई नहीं टिक सकता है। मान्यताओं के अनुसार वह आज भी पृथ्वी लोक पर ही रहकर अपने भक्तों की रक्षा कर रहे हैं।

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हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों द्वारा मुख्य रूप से सुन्दरकांड का पाठ किया जाता है। सम्पूर्ण रामायण में सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। रामायण कथा श्री राम के पुरुषार्थ व उनके गुण व पराक्रम गाथा है परन्तु उसका सुंदरकांड भाग एकमात्र ऐसा अध्याय है जिसमें हनुमान जी शक्ति व विजय का व्याख्यान किया गया है। इसके साथ-साथ हनुमान चालीसा का पाठ भी करना चाहिए। सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति का जीवन सुखमय हो जाता है।

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उसे किसी बुरी शक्ति का भय नहीं रहता। हनुमान जी उस व्यक्ति को बल, बुद्धि  व विद्या का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। उसके जीवन के सभी कष्टों को हर लेते हैं व उसे सुखी संसार का भागीदार बनाते हैं। हनुमान जी को मंगलवार के दिन बूंदी का प्रसाद, चमेली का तेल, पीला सिंदूर व पान का पत्ता अर्पण करना चाहिए।

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