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Jyeshtha Amavasya 2022: इन उपायों को करने से दूर होगा पितृ दोष

MyJyotish Expert Updated 28 May 2022 12:26 PM IST
ज्येष्ठ अमावस्या पर इन उपायों को करने से दूर होगा पितृ दोष 
ज्येष्ठ अमावस्या पर इन उपायों को करने से दूर होगा पितृ दोष  - फोटो : google

ज्येष्ठ अमावस्या पर इन उपायों को करने से दूर होगा पितृ दोष 


इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या यह 30 जून, 2022 को मनाई जाएगी. यह शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और रोहिणी व्रत के साथ मेल खाता है. ज्येष्ठ माह की अमावस्या को ज्येष्ठ अमावस्या कहा जाता है. 

ऐसा माना जाता है कि अमावस्या के दौरान नकारात्मक ऊर्जाएं, आत्माएं और बुरी नजर बहुत मजबूत होती हैं. तंत्र साधना और काला जादू के लिए इसे तांत्रिक शुभ मानते हैं. कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा की जाती है. इस दिन पितरों को श्रद्धांजलि देना लाभकारी माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा की कमी होती है इसलिए यह सलाह दी जाती है कि किसी भी नए काम को शुरू करने से बचना चाहिए. साथ ही इस दिन शुभ कार्यों या अनुष्ठानों से बचना चाहिए.

शनि जयंती पर शनि शिंगणापुर मंदिर में कराएं तेल अभिषेक

- इस दिन पवित्र नदियों या कुंड में जल्दी स्नान करना अच्छा माना जाता है.
- सूर्य देव को शुद्ध जल, लाल चंदन का चूर्ण, लाल फूल से अर्घ्य दिया जाता है.
- पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण जैसे कुछ धार्मिक कार्य किए जाते हैं.

- लोग शनि मंत्र का जाप करते हैं और सरसों का तेल, तिल और काले वस्त्र आदि का दान करते हैं.
- जैन समुदाय की महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रोहिणी व्रत करती हैं. सूर्योदय के बाद जब रोहिणी नक्षत्र प्रकट होता है तो रोहिणी व्रत किया जाता है.
- वट सावित्री व्रत भी मनाया जाता है, महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अपने परिवार की भलाई के लिए व्रत और भगवान यम की पूजा करती हैं.

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इस दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है और विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस दिन वट सावित्री व्रत रखती हैं. इसलिए महत्व कई गुना बढ़ जाता है. सच्ची भक्ति और पवित्र हृदय से पूजा करने से भगवान शनि को प्रसन्न करने और पूर्वजों से आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद मिलती है. तो आइए जानते हैं पूजा अनुष्ठान, शुभ मुहूर्त और इस दिन का महत्व-

ज्येष्ठ अमावस्या पूजा मुहूर्त
अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 29 मई 2022 को 14:57 
अमावस्या तिथि का अंत: 30 मई 2022 को 17:00  

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ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व
ज्येष्ठ अमावस्या का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि शनि जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है जब भगवान शनि की पूजा की जाती है. इतना ही नहीं, शनि जयंती के साथ-साथ महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखती हैं. इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है. वैसे तो अमावस्या के दिन कोई नया या महत्वपूर्ण कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है, लेकिन आध्यात्मिक आधार पर अमावस्या का दिन विशेष महत्व रखता है.

इस दिन जातक अपने पूर्वजों को याद करते हैं और गरीबों के लिए दान-पुण्य करते हैं. मान्यता है कि इस दिन शुभ कार्य करने से पापों से मुक्ति मिलती है. ज्येष्ठ अमावस्या के दिन समर्पित मन से उपवास और पूजा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. ज्येष्ठ अमावस्या का व्रत स्त्री और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं
 

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