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Hariyali Teej 2022: जानिए कब है हरियाली तीज कैसे और क्यों मनाते हैं इसे और क्या है पूजा विधि

Myjyotish Expert Updated 31 Jul 2022 03:39 PM IST
जानिए कब है हरियाली तीज कैसे और क्यों मनाते हैं इसे और क्या है पूजा विधि
जानिए कब है हरियाली तीज कैसे और क्यों मनाते हैं इसे और क्या है पूजा विधि - फोटो : google
जानिए कब है हरियाली तीज कैसे और क्यों मनाते हैं इसे और क्या है पूजा विधि


सावन के महीने में रक्षाबंधन और हरियाली तीज समेत कई महत्वपूर्ण त्योहार आते हैं और इसलिए यह महीना बेहद ही खास है.
सुहागिनों के लिए हरियाली तीज का विशेष महत्व है.

कब है हरियाली तीज

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है, जो कि इस साल 31 जुलाई 2022 को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी. ऐसे में जो महिलाएं इस दिन व्रत करती हैं उनके लिए पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 30 मिनट से लेकर 8 बजकर 33 मिनट तक है.

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कैसे मनाते हैं हरियाली तीज
 
सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज के रुप में मनाया जाता है। सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत काफी मायने रखता है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं। रिमझिम फुहारों के बीच तन-मन जैसे नृत्य करने लगता है। महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और खुशियां मनाती हैं।

क्यों मनाते हैं हरियाली तीज

ऐसी मान्यता है कि मां पार्वती ने 107 जन्म लिए थे भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए। अंततः मां पार्वती के कठोर तप और उनके 108वें जन्म में भगवान शिव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से इस व्रत की शुरुआत हुई। इस दिन जो सुहागन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं उनका सुहाग लंबे समय तक बना रहता है।

इस तीज को कुछ स्थानों पर कज्जली तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस तीज से एक दिन पहले नवविवाहित कन्याओं के लिए उनके सुसराल से श्रृंगार सामग्री आती है। महिलाएं इन्हीं से अपना श्रृंगार करके देवी पार्वती की और भगवान शिव की पूजा करती हैं।

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पूजा विधि 

यह त्योहार वैसे तो तीन दिन मनाया जाता है लेकिन समय की कमी की वजह से लोग इसे एक ही दिन मनाते हैं। इसमें पत्नियां निर्जला व्रत रखती हैं। हाथों में नई चूड़ियां, मेहंदी और पैरों में अल्ता लगाती हैं और नए वस्त्र पहन कर मां पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।
- सबसे पहले महिलाएं किसी बगीचे या मंदिर में एकत्रित होकर मां पार्वती की प्रतिमा को सजाती हैं।
- इसके बाद माता की पूजा करके, कथा सुनती हैं और मन में पति का ध्यान कर, पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
- दिन के अंत में महिलाएं खुशी से नाचती-गाती और झूला झूलती हैं।
 

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