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जानें क्या नवग्रहों के नौ बीज मंत्रों का महत्व ?

Myjyotish Expert Updated 15 Dec 2020 02:48 PM IST
नवग्रह बीज मंत्र
नवग्रह बीज मंत्र - फोटो : Myjyotish
  • सूर्य – सूर्य ग्रह को सभी नवग्रहों का राजा कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है की सूर्य के शुभ प्रभाव पाने के लिए गेहू, तांबा, घी, स्वर्ण और गुड़ का किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करे |
  सूर्य का बीज मंत्र :  ॐ हृां हीं सः सूर्याय नमः | इस मंत्र का 7000 बार जाप करें ।
  • चंद्रमा – नवग्रह की पूजा से चंद्र ग्रह मजबूत होता है और पूजा के समय चांदी, चीनी, सफेद वस्त्र आदि दान करने से बहुत लाभ प्राप्त होता है ।
 चंद्र का बीज मंत्र : ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः का जाप करें। इस मंत्र का 11000 बार जाप करे |
  • मंगल – मंगल के शुभ प्रभाव पाने के लिये नवग्रह पूजा करवाने के बाद  गेहूं, मसूर, लाल वस्त्र और गुड़ का दान करें।
 मंगल का बीज मंत्र - ॐ क्रां क्रीं क्रों सः भौमाय नमः मंत्र का जाप 10000 बार करें।
  • बुध - बुध ग्रह का का कारक मूंग, हरा वस्त्र, कपूर है। इसीलिए पूजा के बाद इन चीजों का दान अवश्य करें |
बुध को मजबूत बनाने के लिए उसका बीज मंत्र  - ॐ ब्रां ब्रीं ब्रों सः बुधाय नमः | इस मंत्र का लगभग 9000 बार जाप करें |  
  • गुरु- गुरु के लिये सोना, चनादाल, पीला रंग, पीली हल्दी दान करें।
  बीज मंत्र :ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों सः गुरुवै नमः मंत्र का जाप करें। गुरु को मजबूत बनाने के लिए गुरु के मंत्र का 19000 बार जाप करे | नए वर्ष की करें शुभ शुरुआत, समस्त ग्रह दोषों को समाप्त करने हेतु कराएं नवग्रह पूजन - नवग्रह मंदिर, उज्जैन
  • शुक्र - शुक्र ग्रह का प्रमुख रत्न हीरा है। इसे मजूबत बनाने के लिये चांदी, चावल, दुग्ध, इत्र का दान करें।
शुक्र का बीज मंत्र :  ॐ द्रां द्रीं द्रों सः शुक्राय नम: | इस मंत्र का 16000 बार जाप करें।
  • शनि - शनि ग्रह का प्रमुख रत्न नीलम है। इसका कारक तिल, तेल, काला वस्त्र और कंबल माना जाता है।
शनि को प्रसन्न करने के लिए ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चराय नम:मंत्र का जाप, संध्या समय कुल 23000 बार किया करें।
  • राहु - नीला वस्त्र, सरसों , उड़द दाल को राहु का कारक माना गया है।
 राहु की शांति के लिए -ॐ भ्रां भ्रीं भ्रों सः राहवे नमः मंत्र का जाप 18000 बार करें।
  • केतु- इस ग्रह का कारक सात अनाज, तिल और ऊनी वस्त्र है।
इसको शांत करने के लिये ॐ स्रां स्रीं स्रों सः केतवे नमः मंत्र का जाप 17000 बार करें।

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