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Dussehra 2022: मर्यादा पुरुषोत्तम हैं राम, उनकी लीला से मिलती हैं 5 बड़ी सीखें

Myjyotish Expert Updated 06 Oct 2022 11:47 AM IST
Dussehra 2022: मर्यादा पुरुषोत्तम हैं राम, उनकी लीला से मिलती हैं 5 बड़ी सीखें
Dussehra 2022: मर्यादा पुरुषोत्तम हैं राम, उनकी लीला से मिलती हैं 5 बड़ी सीखें - फोटो : google

Dussehra 2022: मर्यादा पुरुषोत्तम हैं राम, उनकी लीला से मिलती हैं 5 बड़ी सीखें  


श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहते है। श्री राम भगवान विष्णु के पृथ्वी लोक पर अवतार थे। उनका बचपना बहुत ही मनमोहक था। उनके बचपने से ही दैवीय शक्ति और दैवीय गुण होने के बाद भी कभी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया।

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सनातन पंरपरा में भगवान राम का नाम बहुत ही आदर के साथ लिया जाता है। आज दशहरा के पर्व में श्री राम से जुड़ी ऐसी कई बातें है जो अपना लिया जाए जीवन में कभी भी व्यक्ति असफल नहीं होगा। व्यक्ति को कभी भी निराशा का सामना नहीं करना पड़ेगा। आइए उन बातों पर गौर करते है।

विनम्रता
भगवान श्री राम से किसी को भी विनम्रता सीखना चाहिए। सारे दैवीय शक्तियों के बावजूद भी उन्होंने कभी भी अहंकार नहीं किया। पशु पक्षी हो या इंसान सबके साथ एक समान सा व्यवहार किया। तमाम दैवीय गुण होने के वावजूद भी उन्होंने समुद्र देवता से मार्ग के लिए विनय किया। 

वचन
रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई’। ये दो लाइन भगवान श्री राम को और उनके पूर्वज के लिए कहा गया है। भगवान राम से सिखो की जिसको भी एक बार वचन दे दो उसको किसी भी कीमत में पूरा करो। आखिरकार श्री राम ने भी अपने पिता को दिया गया वचन को निभाने के लिए खुशी–खुशी 14 साल के लिए वनवास चले गए। 

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धैर्य और सहनशीलता
भगवान श्री राम से धैर्य और सहनशीलता सीखना चाहिए। इसके साथ विनम्रता राम जी जैसे करना चाहिए। सबके जीवन को पार लगाने वाले भगवान राम के सामने जब केवट ने उन्हें नदी पार कराने को कहा था तो आम व्यक्ति की तरह उसका निवेदन स्वीकार कर लेते हैं। भगवान श्री राम ने कभी भी अहम नहीं किया मैं अयोध्या का राजा हूं। आम इंसान को भगवान श्री राम के भाती ही धैर्य और सहनशीलता रखनी चाहिए। 

सच्चा मित्र
भगवान श्री राम एक सच्चे मित्र साबित हुए है। उन्होंने सुग्रीव से अपनी मित्रता बखूबी निभाई है। इसके साथ ही विभीषण, निषादराज आदि से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें वे अपनी सच्ची मित्रता को निभाते हुए नजर आते हैं।

मर्यादा
भगवान श्री राम ने कभी भी मर्यादा का उल्लघंन नहीं किया। उन्होंने अपने जीवन में सबका मान सम्मान किया है। भगवान राम के ये गुण ही हैं जो न सिर्फ हिंदू धर्म में बल्कि अन्य धर्मों से जुड़े लोग चाहते हैं कि उनके घर में भी भगवान राम जैसा आज्ञाकारी बेटा पैदा हो। ये हर मां की इच्छा होती है।

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