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क्यों कहलाता है कालसर्प दोष हानिकारक ?

Myjyotish Expert Updated 10 Jul 2020 08:49 PM IST
क्यों कहलाता है कालसर्प दोष हानिकारक ?
क्यों कहलाता है कालसर्प दोष हानिकारक ? - फोटो : Myjyotish

काल सर्प दोष का शाब्दिक अर्थ कुछ इस प्रकार है की , काल का अर्थ है "समय", सर्प का अर्थ है "सांप" और दोष का अर्थ है एक बीमारी। यह एक ज्योतिषीय अवधारणा है जो किसी व्यक्ति को कई नकारात्मक प्रभावों से प्रभावित कर सकती है। जन्मपत्री में, जब सभी घर राहु और केतु में एक ग्रह के मध्य अन्य ग्रह आकर स्थित हो जातें है , तो ऐसे व्यक्ति को काल सर्प दोष से पीड़ित कहा जाता है।

प्रभाव-

काल सर्प दोष मुख्य रूप से किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य और दिमाग को प्रभावित करता है, यह किसी व्यक्ति की मानसिक शांति को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। दोष के प्रभाव दुर्भाग्य और मानसिक गड़बड़ी जैसी परेशानियों को जन्म देतें हैं।

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  • काल सर्प दोष व्यक्ति के स्वास्थ्य और विवाह को प्रभावित करता है।
  • यह पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकता है और वित्तीय गड़बड़ी भी दे सकता है।
  • यह पैतृक गुणों पर टकराव की ओर जाता है।
  • वह मृतक लोगों के सपने देख सकते है जो की उनकी चिंता और नींद की बीमारी का कारण बन सकते हैं।
  • वह सांपों के प्रति एक मजबूत भय और प्रतिकर्षण विकसित करते हैं।
  • इससे व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य और शिक्षा में कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं।
उपायें :-

कुछ बहुत ही सरल और प्रभावी उपाय हैं जो काल सर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को ठीक कर सकते हैं जो इस प्रकार हैं-
 

काल सर्प दोष पूजा - नागवासुकि मंदिर , प्रयागराज

  • ऐसे दोष के लिए पहला और सबसे प्रभावी उपाय महामृत्युंजय मंत्र का नियमित रूप से जप करना है।
  • इससे जुड़ा दूसरा एवं प्रभावी उपाय नियमित रूप से योग करना है।
  • काल सर्प दोष से किसी व्यक्ति को ठीक करने के लिए मंदिरों में बार-बार पूजन करवाना भी एक सरल और बहुत प्रभावी तरीका है।
  • अगला उपाय पंचाक्षरी मंत्र या बीज मंत्र का दिन में 108 बार जप करना और हाथ में अगेती की एक माला रखना है।
  • प्रत्येक शनिवार को पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें।
  • नाग पंचमी पर व्रत का पालन करें और नाग देवता की पूजा करें। विशेष रूप से यदि यह पूजा शिव के ज्योतिर्लिंगों पर करवाई जाएँ तो और भी फलदायी होती है।
  • भगवान कृष्ण से प्रार्थना करें और शनिवार को या पंचमी पर 11 नारियल नदी में अर्पित करें।
  • नदी में धातु से बने नाग और नागिन के 108 जोड़े अर्पण करना दोष के निवारण के लिए बहुत प्रसिद्ध उपाय है।
  • काल सर्प गायत्री मंत्र का जप एक आकर्षक उपाय है।

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