myjyotish

7678508643

   whatsapp

8595527218

Whatsup
  • Login

  • Cart

  • wallet

    Wallet

Home ›   Blogs Hindi ›   Kundali dhan yoga benefits significance

जानिए कुंडली में धन योग कब और कैसे देता हुआ आपका फायदा

my jyotish expert Updated 27 Sep 2021 03:40 PM IST
dhan yog in kundali
dhan yog in kundali - फोटो : google
जन्म कुंडली में जातक और उसके जीवन के विभिन्न बातों का प्रतिनिधित्व करने वाले भाव भाव होते हैं. कुछ भाव शुभता को दर्शाते हैं तो कुछ कम शुभता की स्थिति को दर्शाते हैं कुंडली के आधे भाव अनुकूल ओर आधे भाव प्रतिकुल स्थिति को दर्शाने वाले होते हैं.शुभता में केन्द्र और त्रिकोण का स्थान होता है त्रिकोण भाव यानी 1, 5 वें और 9 वें और केंद्र भाव यानी 1, 4 वें, 7 वें और 10 वें घर को लाभकारी घर माना जाता है। पहला घर एकमात्र ऐसा घर है जो कोण और त्रिकोण दोनों का होता है, इसे सबसे अधिक महत्व देता है. तो दूसरी ओर 6, 8, 12 भाव अनुकूलता में कमी की स्थिति को दर्शाते हैं. 2, 11 भाव आर्थिक क्षेत्र में लाभ को दर्शाते हैं ओर जीवन में धन की स्थिति को भी बताते हैं. इन का संबंध शुभ स्थान से बनने पर लाभ और धन में वृद्धि का योग प्राप्त होता है.    

जानिए अपने घर की बनावट का शुभ या अशुभ प्रभाव पूछिए वास्तु विशेषज्ञ से

ग्रहों की स्थिति से बन रहे योगों की जानकारी कुंडली द्वारा प्राप्त की जाती है. शुभाशुभ योगों के द्वारा उन पर पड़ने वाली अन्य ग्रहों क अप्रभाव भी इन योगों को प्रभावित करता है क्योंकि जब धन योग अच्छे स्थान पर बनता है ओर कुछ अच्छे फल मिलते हैं तो ये स्थिति जातक को सकारात्मक प्रभाव देने में सक्षम होगी. लेकिन जब अशुभ स्थान पाप ग्रहों की युति इसमें शामिल होगी तो शुभ प्रभाव पूरी तरह से नहीं मिल पाते हैं. इन सभी बातों का विश्लेषण कुंडली की जांच द्वारा ही समझा जा सकता है. आईये जानते हैं की कैसे धन योग जीवन में प्रभाव छोड़ते हैं एवं कब इनका लाभ प्राप्त होता है. 

जन्म कुण्डली में दूसरे भाव को धन भाव कहा जाता है. एकादश भाव को लाभ भाव कहा जाता है. इन दोनों का एक दूसरे के साथ संब्म्ध एक अच्छा धन योग बनाता है. धन भाव, लग्न, भाव, पंचम भाव, नवम भाव और एकादश भाव का आपस में राशि परिवर्तन करना धन योग का बनाता है. यह निम्न 10 प्रकार से बन सकता है. 

धन योग कई तरह से बनते हैं, इस प्रभाव के द्वारा लग्नेश और द्वितीयेश एक राशि में स्थित हों तो भी धन योग बनते हैं. लग्नेश और पंचमेश एक राशि में स्थित होते हैं तो धन योग बनता है. लग्नेश और नवमेश एक राशि में स्थित होने पर धन योग बनता है. लग्नेश और एकादशेश एक राशि में स्थित होने पर ये भी धन योग बनता है. द्वितीयेश और पंचमेश एक राशि में होने पर धन योग का निर्माण करते हैं. द्वितीयेश और नवमेश एक राशि में स्थित होने पर धन लाभ का प्रभाव जीवन में बना होता है. द्वितीयेश और एकादशेश एक राशि में स्थित होने पर आर्थिक लाभ को दर्शाने वाला होगा. पंचमेश और नवमेश एक राशि में होने पर आर्थिक लाभ का प्रभाव देखने को मिलते हैं. पंचमेश और एकादशेश का प्रभाव होने के कारण धन लाभ का प्रभाव होता है. नवमेश और एकादशेश का प्रभाव धन लाभ को देने में सहयोग होता है. इसके अतिरिक्त अन्य शुभ योगों का प्रभाव आर्थिक लाभ को दर्शाता है. 

धन योग प्रभाव  

धन योग से युक्त व्यक्ति सतगुणी होता है. वह दयावान, धनवान और सुख-संमृ्द्धि से परिपूर्ण होता है. ऎसा व्यक्ति तेजस्वी, देवभक्त भी होता है. जन्म कुण्डली में बनने वाला धन योग कितना मजबूत है और कितना कमजोर है, इस बात को समझने की आवश्यकता भी होती है. 

कुण्डली    में जिस ग्रह के प्रभाव द्वारा धन योग बन रहा है वह ग्रह कितना बली है और उस पर किन शुभ अथवा अशुभ ग्रहों का प्रभाव पड़ रहा है इस बात को समझने की आवश्यकता होती है. यदि धन योग केन्द्र और त्रिकोण के स्वामियों से बन रहा है तो इन ग्रहों पर यदि शत्रुओं का प्रभाव पड़ रहा हो या ग्रह स्वयं वक्री हो या निचस्थ हो तो धन योग की स्थिति कमजोर पड़ने लगती है. 

इसी के साथ यदि शुभ ग्रहों का प्रभाव इस योग में बनता है तो धन योग का फल जातक को बहुत अच्छे फल देने वाला होगा. 

जन्म कुण्डली में अन्य धन योग फल 

आपको धन किस प्रकार मिलेगा यह बात भी ध्यान देने योग्य है. कई बार धन कठोर मेहनत से मिलता है, कई बार गुप्त रुप से धन की प्राप्ति होती है, पैतृक संपति से धन योग का निर्माण होना. दूसरा घर धन, खजाना दिखाता  है तो आठवां भाव गढ़ा अथवा गुप्त धन की प्राप्ति को दर्शाता है. 

जन्म कुंडली में अगर दूसरे भाव पर केन्द्र त्रिकोण के स्वामी ग्रह स्थित हों, शुभ ग्रह स्थित हों या शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो इस कारण व्यक्ति की कुण्डली में अच्छा धन योग बनता है.  

जन्म कुण्डली के दूसरे भाव पर अष्टम में शनि की मित्र दृष्टि आ रही हो और तो जातक को पैतृक संपत्ति से धन योग की अच्छी प्राप्ति होती है. 

जन्म कुण्डली में चतुर्थ भाव का स्वामी और पंचम या नवम भाव का स्वामी एक साथ इन्हीं शुभ भावों में बैठे हुए हों तो व्यक्ति को बहुत अच्छा प्रबल धन योग मिलता है. 

 कुंडली में द्वितीय भाव में वृषभ राशि का चंद्रमा स्थित हो तो यह स्थिति भी व्यक्ति को धन योग देती है. यदि चंद्रमा शुभ भाव का स्वामी हो और शुभ ग्रहों से प्रभावित हो तब धन योग का भरपूर फायदा मिलता है. इसके विपरित यदि चंद्रमा खराब ग्रहों का स्वामी होकर यहां स्थित हो और पाप प्रभाव से ग्रसित हो तो धन व्यर्थ अधिक होता है. 

जन्म कुण्डली में यदि कुछ शुभ योग बने जैसे की महाभाग्य योग, गजकेसरी योग, लक्ष्मी योग इत्यादि तो इस स्थिति में भी धन योग अपना शुभ फल देने में बहुत सहायक बनता है.

इस पितृ पक्ष, 15 दिवसीय शक्ति समय में गया में अर्पित करें नित्य तर्पण, पितरों के आशीर्वाद से बदलेगी किस्मत : 20 सितम्बर - 6 अक्टूबर 2021

कहीं आप किसी ग्रह दशा से प्रभावित तो नहीं? पूछिए प्रसिद्ध ज्योतिषी से
 
जानिए अपने घर की बनावट का शुभ या अशुभ प्रभाव पूछिए वास्तु विशेषज्ञ से
 
  • 100% Authentic
  • Payment Protection
  • Privacy Protection
  • Help & Support


फ्री टूल्स

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms and Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
X