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Jyotish Vidhya: के के का जाना संगीत जगत की हानि, जानें मृत्यु का ज्योतिष कारण

Myjyotish Expert Updated 01 Jun 2022 12:44 PM IST
केके का जाना संगीत जगत की हानि, जानें मृत्यु का ज्योतिष कारण
केके का जाना संगीत जगत की हानि, जानें मृत्यु का ज्योतिष कारण - फोटो : google

केके का जाना संगीत जगत की हानि, जानें मृत्यु का ज्योतिष कारण


कृष्णकुमार कुनाथ, जिन्हें केके या के के के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय गायक हैं, वह हिंदी, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल फिल्मों के प्रमुख गायक रहे हैं. केके, या कृष्णकुमार कुनाथ, बॉलीवुड की कुछ सबसे बड़ी हिट फिल्मों के लिए जाने जाते थे, जैसे 'पल' और 'यारों'. 1990 के दशक के उत्तरार्ध में उनके गीतों ने किशोरों के बीच लौकप्रियता का दर्जा प्राप्त कर लिया, और उनकी आवाज़ स्कूल और कॉलेज या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्य रुप से सुनाई देती थी.

गायक केके का कोलकाता में लाइव प्रदर्शन देने के कुछ ही घंटों बाद 31 मई, 2022 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह 53 वर्ष के थे. केके कोलकाता के नजरूल मंच में एक संगीत कार्यक्रम में प्रस्तुति के दौरान अस्वस्थ महसूस कर रहे थे. शो शाम 5 बजे शुरू हुआ. शो के बाद वह एस्प्लेनेड में अपने होटल लौट आए, जहां उन्होंने बेचैनी की शिकायत की. उन्हें रात करीब साढ़े दस बजे कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

ग्रह नक्षत्रों से जुड़ी परेशानियों का समाधान, आज ही बात करें प्रसिद्ध ज्योतिषियों से 

राहु दशा और पाप ग्रहों का सूर्य पर प्रभाव 

केके की कुंडली में यदि ग्रह दशा और गोचर को देखें तो राहु दशा का प्रभाव अभी शुरु हुआ था एवं शनि की दृष्टि लम्बे समय से जन्म चंद्रमा ओर मंगल पर रही थी और अब शनि की दृष्टि सूर्य, बुध, गुरु और शुक्र पर पड़ रही थी सभी ग्रहों पर शनि का प्रभाव एक लम्बे समय से इनको प्रभावित कर रह अथा. अभी शनि पर गोचर का राहु भी उपस्थित था. दशा ओर ग्रहों के गोचर की भूमिका ने स्वास्थ्य को कष्ट प्रदान किया. दिल से संबंधित ग्रहों पर पाप ग्रहोम का गोचर प्रभाव उनके लिए मृत्यु तुल्य कष्ट की स्थिति का कारक बन गया है. आईये जाने ज्योतिष में किस प्रकार दिल से संबंधित रोगों को समझ सकते हैं.

ज्योतिष शास्त्र में रोग के विषय में काफी विस्तार पूर्वक बताया गया है. हर प्रकार की व्याधियों के विषय में ज्योतिष शास्त्र का गंभीर अध्ययन करने से बिमारी को आसानी से समझा जा सकता है. जहां त्रिदोष की बात आती है तो आयुर्वेद के साथ मिलकर ज्योतिष शास्त्र में कई तरह के प्रयोग देखे गए हैं. जहां नव ग्रह का संबंध भी रोगों के साथ संबंधित होता है, ज्योतिष में दिल की बिमारी का संबंध सुर्य से मुख्य रुप से जोड़ा जाता है. हृदय से संबंधित रोग के लिए सूर्य मुख्य रुप से विशेष कारक बनता है.

जन्मकुंडली ज्योतिषीय क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है

दिल  की बीमारियों में मंगल, राहु-केतु का असर विशेष बनता है. आज के समय में हृदय से संबंधित बीमारी का असर बहुत अधिक रुप से देखने को मिल रहा है. ज्योतिष केवल भविष्यवाणी करने में सक्षम है कि भविष्य में किसे दिल का दौरा पड़ेगा या नहीं. 

हार्ट अटैक से संबंधित भाव 

ज्योतिष में लग्न से चतुर्थ और पंचम भाव हृदय को दर्शाता है और कर्क एवं सिंह राशि का आधिपत्य भी वहां होता है.  ये भाव और ये राशियां हमारे हृदय पर नियंत्रण को दर्शाती हैं. राशियों में ग्रह सूर्य और चंद्रमा हृदय के लिए मुख्य कारक हैं जबकि बुध सभी तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है. हृदय के दाहिने हिस्से को ऊपर बताए गए भावों और चिन्हों से दर्शाया जाता है जबकि दिल के बाएँ हिस्से को ग्यारहवें और दसवें भाव से दर्शाया जाता है और इस भाव से संबंधित राशियाँ कुंभ और मकर होती हैं. 

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