Logo

Vasant Panchami 2022 LIVE Updates: बसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी सरस्वती और कर्मफलदाता शनिदेव की पूजा का बना है विशेष संयोग,पूजन शुभ मुहूर्त, महाउपाय

Deepa KalraDeepa KalraUpdated 05 Feb 2022 04:48 PM IST
Vasant Panchami 2022 LIVE Updates: बसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी सरस्वती और कर्मफलदाता शनिदेव की पूजा का बना है विशेष संयोग,पूजन शुभ मुहूर्त, महाउपाय

Special Things

LIVE Vasant Panchami (वसन्त पंचमी) 2022 Puja Shubh Muhurat (सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त) Updates : बसंत पंचमी का पर्व शनिवार के दिन आना एक अत्यंत शुभ एवं महत्वपूर्ण समय को दर्शाता है. इस समय शनि देव कर्मफलदाता का प्रभाव ज्ञान के साथ मिलकर अदभुत फलों को प्रदान करने वाला होगा. इस समय शनि देव मकर राशि में सूर्य, बुध के साथ त्रिग्रही योग में भी हैं सूर्य जो आत्मा है ज्ञान का प्रकाश है ओर बुध जो बुद्धि का मूल तत्व बनता है उसी के साथ शनि देव स्थित हैं और बसंत पंचमी सरस्वती जी का समय है वह भी शनिवार के दिन पर हो रहा है तो ऎसे में ज्ञान की भरपूरता का योग बन रहा है 
2022 Vasant Panchami LIVE Updates : बसन्त पंचमी पूजा मुहूर्त समय 

5 फरवरी शनिवार के दिन बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा.बसंत पंचमी देवी सरस्वती को समर्पित त्योहार है। इस दिन सरस्वती पूजा करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है अज्ञानी भी ज्ञान की अमृतधारा को चख पाता है. इस का संपूर्ण दिन ही उत्तम होता है. ग्रंथें में यह कहा गया है कि इस दिन किए गए धार्मिक मांगलकि अनुष्ठान शुभ फल प्रदान करते हैं.  

वसन्त पंचमी 5 फरवरी 2022 को शनिवार के दिन मनाई जाएगी
पंचमी तिथि आरंभ - फरवरी 05, 2022 को 03:47 
पंचमी तिथि समाप्त - फरवरी 06, 2022 को 03:46 
वसन्त पंचमी सरस्वती पूजा मुहूर्त - प्रात:काल 07:07 से 12:35 तक
अवधि - 05 घण्टे 28 मिनट
बसंत पंचमी है अबूझ मुहूर्त 

ज्योतिष अनुसार कुछ मुहूर्तों को अबूझ मुहूर्त नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ होता है विशेष मुहूर्त. अबूझ मुहूर्त के समय किसी प्रकार के मुहूर्त को निकालने की अश्यकता नहीं होती है और इस समय का संपूर्ण दिवस ही शुभ माना जाता है इसलिए इस समय को अत्यंत ही उत्तम शुभ मुहूर्तों में स्थान प्रदान किया जाता है. बसंत पंचमी के दिन विवाह, गृह निर्माण, गृह प्रवेश, किसी कार्य का आरंभ, कोई भी मांगलिक कार्य, धार्मिक कार्य, फैक्ट्री व्यापार का आरंभ, विद्या आरंभ, शपथ ग्रहण इत्यादि किसी भी प्रकार के कामों को करने के लिए ये दिन सर्वोत्तम माना जाता है. 
हम बसंत पंचमी क्यों मनाते हैं

बसंत पंचमी का पर्व देवी सरस्वती के जन्म दिवस के रुप में संपूर्ण भारत में मनाया जाता है. हिंदू धर्म ग्रंथों में देवी सरस्वती को विद्या एवं ज्ञान की देवी के रुप में स्थापित किया गया है. पंचमी तिथि के दिन इनका प्रकाट्य होता है ओर समस्त जगत ज्ञान को प्राप्त करता है अंधकार की समाप्ति होती है अत: इसी शुभता के आगमन का पर्व प्रत्येक वर्ष माघ शुक्ल पंचमी के दिन मनाए जाने का विधान रहा है. शिक्षार्थियों के लिए वसंत पंचमी का दिन विशेष महत्व रखता है, चूंकि सरस्वती ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं, इसलिए समस्त शिक्षण संस्थानों में बसंत पंचमी के दिन विशेष पूजा एवं मंत्रों का उच्चारण होता है. जिसमें छात्र बड़े उत्साह और जोश के साथ भाग लेते हैं. 

मुफ़्त में जानें अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, कुंडली देखें
बसन्त पंचमी पर बसंत महोत्सव आरंभ 

माता सरस्वती बुद्धि व संगीत की देवी है. पंचमी के दिन को माता सरस्वती के जन्मोत्सव के साथ ही ये दिन ऋतुओं के राजा बसंत का पर्व भी है. इन दिन से बसंत ऋतु से शुरु होकर, संपूर्ण दिवस चल सकता है. यह पर्व कला व शिक्षा प्रेमियों के लिये विशेष महत्व रखता है. एक किंवदन्ती के अनुसार इस दिन ब्रह्मा जी ने सृ्ष्टि की रचना की थी. यह त्यौहार उतर भारत में पूर्ण हर्ष-उल्लास से मनाया जाता है. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने माता शबरी के झूठे बैर खाये थे. इस उपलक्ष में बसन्त पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है.

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता
बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का रहस्य 

पीला एक ऐसा रंग है जो जीवन की जीवंतता और प्रकृति के प्राण ऊर्जा का प्रतीक बनता है. साथ ही देवी को इस रंग से भी अत्यंत प्रेम है, अत: इस दिन समस्त लोग पीले रंगों का किसी न किसी रुप में उपयोग अवश्य करते हैं यह पीला रंग ज्ञान एवं ऊर्जा का विकास करता है और जीवन में सौभाग्य को प्रदान करता है. पीला रंग प्रेम, समृद्धि और पवित्रता का रंग भी माना जाता है. इस दिन केसर हल्दी का विषेश रुप से उपयोग शुभ माना जाता है. 

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता
बसंत पंचमी के विभिन्न रुप 

माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां शारदे की पूजा होती है यह समय अलग अलग रुपों से जाना जाता है. बसंत पंचमी जिसे विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इसे श्री पंचमी के रुप में मनाते हैं, इसे सूफी संतों द्वारा  में सूफी बसंत के रूप में मनाया जाता है, पंजाब और अन्य आसपास के क्षेत्रों में इसे पतंगों महोत्सव के रूप में मनाया जाता है, इसे सिख महोत्सव के रूप में मनाया जाता है, बिहार राज्य में इसे मनाया जाता है कृषी पर्व और सूर्य देव पूजन के रुप में मनाया जाता है. 

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता
बसन्त पंचमी पर बसंत महोत्सव आरंभ 

माता सरस्वती बुद्धि व संगीत की देवी है. पंचमी के दिन को माता सरस्वती के जन्मोत्सव के साथ ही ये दिन ऋतुओं के राजा बसंत का पर्व भी है. इन दिन से बसंत ऋतु से शुरु होकर, संपूर्ण दिवस चल सकता है. यह पर्व कला व शिक्षा प्रेमियों के लिये विशेष महत्व रखता है. एक किंवदन्ती के अनुसार इस दिन ब्रह्मा जी ने सृ्ष्टि की रचना की थी. यह त्यौहार उतर भारत में पूर्ण हर्ष-उल्लास से मनाया जाता है. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने माता शबरी के झूठे बैर खाये थे. इस उपलक्ष में बसन्त पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है.

*बसंत पंचमी का दिन शाश्त्रो में बहुत शुभ बतायागया है। इस दिन के बाद से धरती की ऊर्जा शक्ति बढ़ जाती है और अछए दिन की शुरुआत हो जाती है। माना जाता है इसी दिन भगवान राम तपस्वी माता शबरी से मिलने गए थे।

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता
हिन्दू और मुस्लिम 

बसंत पंचमी एक ऐसा त्यौहार है। जिसमे हिन्दुओ के बजाय मुस्लिम भी इस त्यौहार को मनाते है। यह त्यौहार निजामुद्दीन औलिआ की दरगाह जो दिल्ली में है और चिस्ती की सभी दरगाहो में मनाया जाता है। इसका इतिहास कुछ इस प्रकार है
निजामुद्दीन औलिआ अपने भतीजे की मोत से बेहद दुखी थे जिस कारण आमिर खुसरो भी अपने गुरु की उदासीनता से बेहद दुखी थे उन्होने एक दिन देखा की कुछ महिलाओ का समूह पीले वस्त्र पहन , पीले पुष्प लिए और गाते हुए वहा से गुज़र रहे थे आमिर खुसरो उन्हे संत मान कर उनके पास मदद के लिए गए और सारी बात बताते हुआ उन्हे निजामुद्दीन औलिआ के पास लके गए जिसके बाद वह फिर से मुस्कुराने लगे थे तभी से यह दिन दरगाहो में भी मनाने जाने लगा।

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता
ब्रह्म पुराण

'बसंत पंचमी' के त्योहार को संस्कृत ग्रंथों में 'श्री पंचमी' के रूप में जाना जाता है और ऐतिहासिक रूप से इस दिन लक्ष्मी और नारायण की पूजा की जाती है। ब्रह्म पुराण के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनोकामना पूर्ति के दिन पार्वती की पूजा की जाती है। और पंचमी तिथि को श्री (लक्ष्मी) अतुलनीय भाग्य और समृद्धि प्रदान करती हैं।

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार ज्ञान, कला, संगीत और विज्ञान की देवी सरस्वती का जन्म इसी दिन हुआ था और लोग ज्ञान प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा करते हैं। एक लोकप्रिय लोककथा यह है कि कवि कालिदास, ज्ञान प्राप्त करने से पहले एक साधारण व्यक्ति थे, जिन्हें एक ऐसी राजकुमारी से शादी करने के लिए धोखा दिया गया था जो उनका सम्मान नहीं करती थी। एक उदास कालिदास ने आत्महत्या करने की कोशिश की लेकिन देवी सरस्वती उनके सामने प्रकट हुईं और उन्हें नदी में डुबकी लगाने के लिए कहा। उसे जो करने के लिए कहा गया था, उसे करने पर, वह पानी से एक बुद्धिमान, जानकार और संस्कारी व्यक्ति के रूप में उभरा, जो अंततः एक प्रसिद्ध कवि बन गया। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी की पूजा की जाती है ताकि वह अपने भक्तों को इसी तरह का उपहार दे सकें।

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता
पौराणिक कथाओ के अनुसार इस दिन कामदेव और रति की पूजा करने से दाम्पत्य जीवन सुखमय बनता है और खुशिओ का आगमन होता है। कहते है जिस व्यक्ति के विवाह में देरी हो रही है या अड़चने आ रही है तोह इस दिन इनकी पूजा से विवाह योग बनने लग जाते है।

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता
मान्यताएं

सृष्टि के आरंभ में  ब्रह्मा जी ने संसार में वाणी के उत्पत्ति के लिए भगवान विष्णु के आदेश पर  भगवती सरस्वती को अवतरित को किया था। ब्राह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़कर देवी सरस्वती को अवतरित किया था। जल की पवित्र बुंदे पृथ्वी पर गिरते ही  भगवती सरस्वती चतुर्भुज अवतरित हुईं। भगवती सरस्वती के चारों भुजाओं में क्रमशः वीणा, मुद्रा, वेद और माला थी। भगवती सरस्वती के अवतरण के बाद ही सृष्टि में पहली बार संगीत का जन्म हुआ।

 बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता -05 फ़रवरी, 2022
बसंत पंचमी के दिन इन मंत्रों से होगी सभी कार्यों की सिद्धि

सरस्वती पर इन मंत्र जाप से मिलेगी सफलता 

बसंत पंचमी के दिन मंत्र उच्चारण करना शुभ माना जाता है. इस दिन देवी सरस्वती के 'ॐ ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नम:' नामक मंत्र का जाप करना चाहिए. विद्या, कला इत्यादि से संबंधित वस्तुओं, वाद्य यंत्र आदि का पूजन करना चाहिए तथा सरस्वती एकाक्षरी मंत्र "ऐं" का उच्चारण करना चाहिए. बसंत पंचमी के दिन सर्वप्रथम विध्नहर्ता श्री गणेश को नमन करते हुए गणेश वंदना करनी चाहिए तथा इसके पश्चात मां सरस्वती जी की वंदना अर्चना करनी चाहिए. 

संपूर्ण मंत्र
ओम ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
मूल मंत्र
ओम ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।


विघ्न-बाधाओं का नाश करने वाला मंत्र
ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी।
मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वाहा।।

मुफ़्त में जानें अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, कुंडली देखें
बसंत पंचमी पर कैसे करें पूजा  

बसंत पंचमी के दिन प्रात:काल जल्दी उठ कर देवी सरस्वती का ध्यान किया जाता है. देवी सरस्वती की पूजा की तैयारी शुरू करते हैं. सरस्वती की मूर्तियों को खूबसूरती से सजाया जाता है और भक्ति भाव के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. इस दिन देवी सरस्वती को पीले रंग के फूल चढ़ाए जाते हैं और आटे, मेवा, चीनी और इलायची पाउडर से बने 'केसर हलवा' का विशेष भोग तैयार किया जाता है. इस दिन हवन और अन्य पूजा अनुष्ठान किए जाते हैं. पूजा के बाद प्रसाद सभी के मध्य इसे वितरित किया जाता है. माता को गुलाल अबीर अर्पित किया जाता है.
सरस्वती के चमत्कारिक मंत्र  
वेदों का मुख्य आधार ही मंत्र रहे हैं ये मंत्र जाप आदिकाल से ही हमारे मध्य विद्यमान हैं और इन मंत्रों को विज्ञान ने भी माना है. वेदों में समस्त प्रकार के सुख प्राप्ति हेतु एवं सभी कष्ट निवारण हेतु मंत्र सिद्धि को प्रमुखता दी है ऎसे में शिक्षा एवं ज्ञान से संबंधित सभी प्रकार के सुख को प्राप्त करने के लिए सरस्वती देवी का आहवान विभिन्न प्रकार के मंत्रों द्वारा किए जाने का विधान बताया गया है आईये जानें बसंत पंचमी के दिन उन समस्त म्म्त्रों का रहस्य जो प्रदान करते हैं जीवन में प्रकाश और समस्त जगत को करते हैं आलौकित 

सरस्वती विद्या मंत्र 
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥

बसंत पंचमी पर कीजिए ये आसान से उपाय मिलेगी बुद्धि भी और पैसा भी - अभी बुक करें 
सरस्वती आरती

पौराणिक आख्यानों में देवी सरस्वती के आगमन को प्रकाश, श्वेत उज्जवला स्वरुप माना गया है. कथाओं के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की तो समस्त प्राणियों जीवों के निर्माण पश्चात उन्हें अपनी सृष्टि में ज्ञान, कला एवं जीवंतता की कमी का अनुभव किया और इस रिक्तता को दुर करने हेतु उन्होंने सरस्वती जी को सभी के समक्ष स्थापित किया समस्त कलाओं, रचनाओं एवं ज्ञान के प्रकाश से समस्त सृष्टि आलौकित हो उठी और सभी ने एक स्वर में देवी के इस परम आनंददायक शुभता के प्रति आभार व्यक्त करने हेतु उनकी स्तुति आरंभ की जो देवी सरस्वती की वंदना हेतु आज भी श्रद्धा एवं भक्ति प्रकट करने का एक उत्तम एवं सरल साधन है देवी सरस्वती की आरती समस्त जन के कल्याण हेतु अत्यंत ही शुभ होती है जो प्राणिजन माता सरस्वती की आरती का गान करते हैं उन्हें सभी शुभ फलों की प्राप्ति होती है

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता -अभी बुक करें 
सरस्वती आरती
जय सरस्वती माता,
मैया जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता...॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता...॥

बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता...॥

देवी शरण जो आए,
उनका उद्धार किया ।
पैठी मंथरा दासी,
रावण संहार किया ॥
जय जय सरस्वती माता...॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
ज्ञान प्रकाश भरो ।
मोह अज्ञान और तिमिर का,
जग से नाश करो ॥
जय जय सरस्वती माता...॥

धूप दीप फल मेवा,
माँ स्वीकार करो ।
ज्ञानचक्षु दे माता,
जग निस्तार करो ॥
॥ जय सरस्वती माता...॥

माँ सरस्वती की आरती,
जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी,
ज्ञान भक्ति पावे ॥
जय जय सरस्वती माता...॥

जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
जय सरस्वती माता,
मैया जय सरस्वती माता ।

मुफ़्त में जानें अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, कुंडली देखें
बसंत पंचमी अक्षर आरंभ समय 

बसंत पंचमी का दिन छोटे बच्चों में पढ़ाई शुरू करने के लिए भी सर्वोत्तम दिन माना जाता है. इस परंपरा को 'विद्या आरंभ या 'अक्षर आरंभ' कहा जाता है. इस दिन बच्चे की शिक्षा का आरंभ करने से संपूर्ण जीवन बच्चा शिक्षा के क्षेत्र में सफलता को प्राप्त करता है. देश के विभिन्न हिस्सों में बहुत प्रचलित है. स्कूल और कॉलेज इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं.  छात्रों के लिए वसंत पंचमी का दिन विशेष महत्व रखता है. चूंकि सरस्वती ज्ञान और ज्ञान की देवी हैं, इसलिए छात्र उनकी पूजा बड़े उत्साह और जोश के साथ करते हैं. छात्र अपनी नोटबुक, कलम और पेंसिल देवी सरस्वती के चरणों के पास रखते हैं और ज्ञान का आशीर्वाद मांगते हैं. 

जानें अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, कुंडली देखें
बसंत पंचमी का पर्व शनिवार के दिन आना एक अत्यंत शुभ एवं महत्वपूर्ण समय को दर्शाता है. इस समय शनि देव कर्मफलदाता का प्रभाव ज्ञान के साथ मिलकर अदभुत फलों को प्रदान करने वाला होगा. इस समय शनि देव मकर राशि में सूर्य, बुध के साथ त्रिग्रही योग में भी हैं सूर्य जो आत्मा है ज्ञान का प्रकाश है ओर बुध जो बुद्धि का मूल तत्व बनता है उसी के साथ शनि देव स्थित हैं और बसंत पंचमी सरस्वती जी का समय है वह भी शनिवार के दिन पर हो रहा है तो ऎसे में ज्ञान की भरपूरता का योग बन रहा है कर्मफल प्रदान करने वाले शनिदेव के साथ यह एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण योग है जो कई वर्षों के पश्चात बना है. इस समय पर शनि देव क अपूजन करने से शनि से संबंधित समस्त कष्ट दूर होंगे ओर साथ ही देवी सरस्वती का पूजन करने पर ज्ञान में भी शुभता का आगमन होगा और हमारे ज्ञान को सत्य का प्रकाश प्रदान होता है जो शनि देव न्याय स्वरुप आज सरस्वती के साथ मौजूद होकर सभी  के कल्याण हेतु आशीर्वाद प्रदान करेंगे.

बसंत पंचमी पर कीजिए ये आसान से उपाय मिलेगी बुद्धि भी और पैसा भी - अभी बुक करें
सरस्वती मंत्र
ऊँ ऐं महासरस्वत्यै नमः।।

विद्या उपदेश मंत्र
ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै नमः।।

सरस्वती ज्ञान प्राप्ति मंत्र 
वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ll

 सरस्वती गायत्री मंत्र 
ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्। 

सरस्वती एकादशाक्षर मंत्र 
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

सरस्वती शाबर मंत्र 
ॐ नमो सरस्वती विद्या नमो कंठ विराजो आप भुला अक्षर कंठ करें हृदय विराजो आप ॐ नमो स्वः ठ:ठ:ठ: ।
सरस्वती वंदना मंत्र 
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्॥

सरस्वती मंत्र 
'सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम:। वेद वेदान्त वेदांग विद्यास्थानेभ्य एव च।।
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते।। '

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन करें, बुद्धि-विवेक-ज्ञान की बढ़ोत्तरी, मिलेगी हर परीक्षा में सफलता -अभी बुक करें

सरस्वती चालिसा 

वाणी, ज्ञान, संगीत, कला की अधिष्ठात्रि देवी सरस्वती जी प्रकृति के आनंद एवं रस की देवी हैं. चेतना के मुक्त प्रवाह का प्रतिनिधित्व करती हैं.  वह वेदों की जननी हैं, और उन्हें निर्देशित मंत्र, जिन्हें 'सरस्वती वंदना' "सरस्वती चालिसा" के रुप में जाता है, मान्यता है कि देवी सरस्वती मनुष्य को वाणी, ज्ञान और विद्या की शक्तियों से संपन्न करती हैं. सरस्वती चालिसा का पाठ करके बुद्धि ओर ज्ञान को प्राप्त करना अत्यंत सरल होता है . देवी सरसवती चालीसा का गुणगान मनुष्य को भाषण, ज्ञान और सीखने की शक्ति प्रदान करता है. 

बसंत पंचमी पर कीजिए ये आसान से उपाय मिलेगी बुद्धि भी और पैसा भी - अभी बुक करें 

सरस्वती चालीसा -

॥ दोहा ॥

जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु॥

बसंत पंचमी कल : जानें सरस्वती पूजा विधि एवं सटीक शुभ मुहूर्त


॥ अथ चौपाई ॥

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥
तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥

बाल्मीकि जी थे हत्यारा। तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥

बसंत पंचमी के दिन ही हुई थी भगवान शिव और पार्वती की सगाई

करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी ॥
पुत्र करै अपराध बहूता। तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥
राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भांति घनेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥

मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
समर हजार पांच में घोरा। फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥
मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी। पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता। छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
रक्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा। छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥

मुफ़्त में जानें अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, कुंडली देखें
वसंत पंचमी को करें उपाय, माँ सरस्वती दिलाएँगी विद्या, सुख, वैभव और यश

माता सरस्वती की जयंती अर्थात् वसंत पंचमी को माँ सरस्वती को प्रसन्न कर हम माता लक्ष्मी को भी प्राप्त कर सकते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की मूर्ति या प्रतिमा पर आम का बौर चढ़ाना बड़ा ही शुभ होता है। ऐसा करने से आपके जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है। वसंत पंचमी को स्फटिक की माला से 108 बार “ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:” का जाप करने के पश्चात् कन्याओं को दूध द्वारा निर्मित मिठाई भाव पूर्वक खिलानी चाहिए। अच्छी सेहत हेतु 'ॐ जूं स:' तथा धन वृद्धि हेतु 'ॐ श्रीं नम:' या 'ॐ क्लीं नम:' का जाप करना लाभकारी रहता है।
तो आइए जानते हैं राशि अनुसार उपाय जिनसे होगा आपको लाभ ही लाभ….

मेष राशि- हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी के मंदिर जाकर पूजा करने के पश्चात् प्रतिमा के दाएँ पैर का सिन्दूर वसंत पंचमी से प्रतिदिन “एं” का जाप करते हुए अपने माथे पर तिलक लगाएँ।

वृषभ राशि- 22 इमली के पत्ते लें। आधे पत्ते माँ सरस्वती की प्रतिमा पर अर्पित करें और आधे सफ़ेद वस्त्र में बाँधकर अपने पास रख लें। लाभकारी सिद्ध होगा।

मिथुन राशि- भगवान गणेश के मंदिर जाकर उनका पूजन करें। 21 दूर्वादल के बीज “ॐ गं गणपतये नम:” का जाप करते हुए भाव पूर्वक उन्हें अर्पित करें। बुद्धि का तेज बढ़ेगा।

कर्क राशि- माता सरस्वती की मूर्ति या प्रतिमा पर 21 आम के बौर चढ़ाएँ। बौर चढ़ाते समय “ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:” जाप करें और शुभ मनोकामना माँगे, पूरी होगी।

सिंह राशि - प्रातः काल सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात् गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें, अत्यधिक लाभ होगा।

कन्या राशि - किसी धार्मिक या आध्यात्मिक पुस्तक को “ॐ ऐं नम:” मंत्र का जाप करते हुए दान करें, बहुत लाभ होगा।

तुला राशि -  किसी धार्मिक पुस्तक को सफेद वस्त्र के साथ दान कर दें। ब्राह्मण की कन्या को पूज कर, मिठाई खिलाएँ। “ॐ ऐं नम:” का जाप लाभकारी होगा।

वृश्चिक राशि - माता सरस्वती की प्रतिमा/मूर्ति का पूजन कर श्वेत रेशमी वस्त्र चढ़ाएँ। कम उम्र की कन्याओं का पूजन कर सफ़ेद रंग की मिठाई खिलाएँ। “ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:” का जाप करना बेहद कल्याणकारी होगा।

धनु राशि - माता सरस्वती की प्रतिमा का पूजन करके सफ़ेद चंदन चढ़ाएँ और सफ़ेद वस्त्र दान करने से बुद्दिमत्ता बढ़ेगी।

मुफ़्त में जानें अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, कुंडली देखें

मकर राशि - ब्रह्म मुहूर्त के समय ब्राह्मी खाने से सफलता दरवाज़ा खटखटाएगी। ब्राह्मी को “ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:” जपते हुए पिएँ।

कुंभ राशि - माँ सरस्वती की प्रतिमा का पूजन कर कम उम्र की कन्याओं को घर बुलाकर खीर खिलाएँ, दान दें और “ॐ ऐं नम:” का जाप करें।

मीन राशि - अपामार्ग (अज्जाझारा) की जड़ को विधिवत् निकालकर “ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:” की ग्यारह स्फटिक माला से अभिमंत्रित कर सफेद वस्त्र लपेटकर बाँह में बाँध लें।

वसंत पंचमी को करें माँ सरस्वती का पूजन और पाएँ मनचाहा वरदान
सरस्वती के प्रभाव को भगवान राम ने भी नमन किया 

वाणी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के प्रभाव से ही महाकाव्यों का सुत्रधार संभव हो पाया. रामायण कथा अनुसार अगर राम के राज्य अभिषेक से पूर्व यदि मंथरा की बुद्धि एवं मुख में सरस्वती विराजमान न होती तो राम का चौदह वर्ष का वनवास न होता और यदि भगवान राम उस वनवास को न पाते तो रावण का नाश नहीं संभव था अत: सृष्टि के स्म्चालन में देवी सरस्वती का प्रभाव अत्यंत गहरा रहा है. 

मुफ़्त में जानें अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, कुंडली देखें
इस समय मां सरस्वती होती हैं जिव्हा पर विराजमान 

स्वर, संगीत, ध्वनी, वाणी की देवी सरसवती के प्रति मान्यता है की हर 24 घंटे में किसी समय देवी सरस्वती मनुष्य की वाणी में विराजमान होती हैं और इसी कारण से भारतीय परिवारों में यह कई बार सुनने में आता है की कभी मुख से कोई गलत बात न निकालें क्योंकि क्या पता कब जिव्हा पर सरस्वती विद्यमान हों और हमारी कही गलत बात सत्य सिद्ध हो जाए जो हमारे जीवन को कष्टमय बना डाले इसलिए कहा जाता है की सदैव शुद्ध वचनों का पालन करना चाहिए जिससे की समस्त जगत का कल्याण संभव हो पाए. 

बसंत पंचमी पर कीजिए ये आसान से उपाय मिलेगी बुद्धि भी और पैसा भी - अभी बुक करें 
बसंत पंचमी की  कथा 
उपनिषदों की कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान शिव की आज्ञा से भगवान ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। लेकिन अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। 

तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमण्डल से जल अपने हथेली में लेकर संकल्प स्वरूप उस जल को छिड़कर भगवान श्री विष्णु की स्तुति करनी आरम्भ की। ब्रम्हा जी के किये स्तुति को सुन कर भगवान विष्णु तत्काल ही उनके सम्मुख प्रकट हो गए और उनकी समस्या जानकर भगवान विष्णु ने आदिशक्ति दुर्गा माता का आव्हान किया। विष्णु जी के द्वारा आव्हान होने के कारण भगवती दुर्गा वहां तुरंत ही प्रकट हो गयीं तब ब्रम्हा एवं विष्णु जी ने उन्हें इस संकट को दूर करने का निवेदन किया।

बसंत पंचमी पर कीजिए ये आसान से उपाय मिलेगी बुद्धि भी और पैसा भी - अभी बुक करें 

ब्रम्हा जी तथा विष्णु जी बातों को सुनने के बाद उसी क्षण आदिशक्ति दुर्गा माता के शरीर से स्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ में वर मुद्रा थे । अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति श्री दुर्गा के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही उन देवी ने वीणा का मधुरनाद किया जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब सभी देवताओं ने शब्द और रस का संचार कर देने वाली उन देवी को वाणी की अधिष्ठात्री देवी "सरस्वती" कहा।

ब्रह्मा जी की आज्ञा के अनुसार सरस्वती जी ने वीणा के तार झंकृत किए, जिससे सभी प्राणी बोलने लगे, नदियां कलकल कर बहने लगी हवा ने भी सन्नाटे को चीरता हुआ संगीत पैदा किया। तभी से बुद्धि व संगीत की देवी के रुप में सरस्वती की पूजा की जाने लगी।

प्रसिद्ध ज्योतिषियों से मिलेगा आपकी हर परेशानी का समाधान, आज ही करें बात 
सरस्वती 108 नाम मंत्र जाप 

1 सरस्वती ॐ सरस्वत्यै नमः।
2 महाभद्रा ॐ महाभद्रायै नमः।
3 महामाया ॐ महमायायै नमः।
4 वरप्रदा ॐ वरप्रदायै नमः।
5 श्रीप्रदा ॐ श्रीप्रदायै नमः।
6 पद्मनिलया ॐ पद्मनिलयायै नमः।
7 पद्माक्षी ॐ पद्मा क्ष्रैय नमः।
8 पद्मवक्त्रगा ॐ पद्मवक्त्रायै नमः।
9 शिवानुजा ॐ शिवानुजायै नमः।
10 पुस्तकधृत ॐ पुस्त कध्रते नमः।
11 ज्ञानमुद्रा ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः।
12 रमा ॐ रमायै नमः।
13 परा ॐ परायै नमः।
14 कामरूपा ॐ कामरूपायै नमः।
15 महाविद्या ॐ महाविद्यायै नमः।
16 महापातक नाशिनी ॐ महापातक नाशिन्यै नमः।
17 महाश्रया ॐ महाश्रयायै नमः।
18 मालिनी ॐ मालिन्यै नमः।
19 महाभोगा ॐ महाभोगायै नमः।
20 महाभुजा ॐ महाभुजायै नमः।
21 महाभागा ॐ महाभागायै नमः।
22 महोत्साहा ॐ महोत्साहायै नमः।
23 दिव्याङ्गा ॐ दिव्याङ्गायै नमः।
24 सुरवन्दिता ॐ सुरवन्दितायै नमः।
25 महाकाली ॐ महाकाल्यै नमः।

जन्म कुंडली से जानिए अपना भाग्य और पाएं सफलता के आसान उपाय - अभी बनाएं फ्री 
26 महापाशा ॐ महापाशायै नमः।
27 महाकारा ॐ महाकारायै नमः।
28 महाङ्कुशा ॐ महाङ्कुशायै नमः।
29 सीता ॐ सीतायै नमः।
30 विमला ॐ विमलायै नमः।
31 विश्वा ॐ विश्वायै नमः।
32 विद्युन्माला ॐ विद्युन्मालायै नमः।
33 वैष्णवी ॐ वैष्णव्यै नमः।
34 चन्द्रिका ॐ चन्द्रिकायै नमः।
35 चन्द्रवदना ॐ चन्द्रवदनायै नमः।
36 चन्द्रलेखाविभूषिता ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः। 
37 सावित्री ॐ सावित्र्यै नमः।
38 सुरसा ॐ सुरसायै नमः।
39 देवी ॐ देव्यै नमः।
40 दिव्यालङ्कारभूषिता ॐ दिव्यालङ्कारभूषितायै नमः। 
41 वाग्देवी ॐ वाग्देव्यै नमः।
42 वसुधा ॐ वसुधायै नमः।
43 तीव्रा ॐ तीव्रायै नमः।
44 महाभद्रा ॐ महाभद्रायै नमः।
45 महाबला ॐ महाबलायै नमः।
46 भोगदा ॐ भोगदायै नमः।
47 भारती ॐ भारत्यै नमः।
48 भामा ॐ भामायै नमः।
49 गोविन्दा ॐ गोविन्दायै नमः।
50 गोमती ॐ गोमत्यै नमः।

जन्म कुंडली से जानिए अपना भाग्य और पाएं सफलता के आसान उपाय - अभी बनाएं फ्री 
51 शिवा ॐ शिवायै नमः।
52 जटिला ॐ जटिलायै नमः।
53 विन्ध्यवासा ॐ विन्ध्यावासायै नमः।
54 विन्ध्याचलविराजिता ॐ विन्ध्याचलविराजितायै नमः।
55 चण्डिका ॐ चण्डिकायै नमः।
56 वैष्णवी ॐ वैष्णव्यै नमः।
57 ब्राह्मी ॐ ब्राह्मयै नमः।
58 ब्रह्मज्ञानैकसाधना ॐ ब्रह्मज्ञानैकसाधनायै नमः।
59 सौदामिनी ॐ सौदामिन्यै नमः।
60 सुधामूर्ति ॐ सुधामूर्त्यै नमः।
61 सुभद्रा ॐ सुभद्रायै नमः।
62 सुरपूजिता ॐ सुरपूजितायै नमः।
63 सुवासिनी ॐ सुवासिन्यै नमः।
64 सुनासा ॐ सुनासायै नमः।
65 विनिद्रा ॐ विनिद्रायै नमः।
66 पद्मलोचना ॐ पद्मलोचनायै नमः।
67 विद्यारूपा ॐ विद्यारूपायै नमः।
68 विशालाक्षी ॐ विशालाक्ष्यै नमः।
69 ब्रह्मजाया ॐ ब्रह्मजायायै नमः।
70 महाफला ॐ महाफलायै नमः।
71 त्रयीमूर्ती ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः।
72 त्रिकालज्ञा ॐ त्रिकालज्ञायै नमः।
73 त्रिगुणा ॐ त्रिगुणायै नमः।
74 शास्त्ररूपिणी ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः।
75 शुम्भासुरप्रमथिनी ॐ शुम्भासुरप्रमथिन्यै नमः।

बसंत पंचमी पर कीजिए ये आसान से उपाय मिलेगी बुद्धि भी और पैसा भी - अभी बुक करें 
76 शुभदा ॐ शुभदायै नमः।
77 सर्वात्मिका ॐ स्वरात्मिकायै नमः।
78 रक्तबीजनिहन्त्री ॐ रक्तबीजनिहन्त्र्यै नमः।
79 चामुण्डा ॐ चामुण्डायै नमः।
80 अम्बिका ॐ अम्बिकायै नमः।
81 मुण्डकायप्रहरणा ॐ मुण्डकायप्रहरणायै नमः।
82 धूम्रलोचनमर्दना ॐ धूम्रलोचनमर्दनायै नमः।
83 सर्वदेवस्तुता ॐ सर्वदेवस्तुतायै नमः।
84 सौम्या ॐ सौम्यायै नमः।
85 सुरासुर नमस्कृता ॐ सुरासुर नमस्कृतायै नमः।
86 कालरात्री ॐ कालरात्र्यै नमः।
87 कलाधारा ॐ कलाधारायै नमः।
88 रूपसौभाग्यदायिनी ॐ रूपसौभाग्यदायिन्यै नमः।
89 वाग्देवी ॐ वाग्देव्यै नमः।
90 वरारोहा ॐ वरारोहायै नमः।
91 वाराही ॐ वाराह्यै नमः।
92 वारिजासना ॐ वारिजासनायै नमः।
93 चित्राम्बरा ॐ चित्राम्बरायै नमः।
94 चित्रगन्धा ॐ चित्रगन्धायै नमः।
95 चित्रमाल्यविभूषिता ॐ चित्रमाल्यविभूषितायै नमः।
96 कान्ता ॐ कान्तायै नमः।
97 कामप्रदा ॐ कामप्रदायै नमः।
98 वन्द्या ॐ वन्द्यायै नमः।
99 विद्याधरसुपूजिता ॐ विद्याधरसुपूजितायै नमः।
100 श्वेतासना ॐ श्वेतासनायै नमः।
101 नीलभुजा ॐ नीलभुजायै नमः।
102 चतुर्वर्गफलप्रदा ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः।
103 चतुरानन साम्राज्या ॐ चतुरानन साम्राज्यायै नमः।
104 रक्तमध्या ॐ रक्तमध्यायै नमः।
105 निरञ्जना ॐ निरञ्जनायै नमः।
106 हंसासना ॐ हंसासनायै नमः।
107 नीलजङ्घा ॐ नीलजङ्घायै नमः।
108 ब्रह्मविष्णुशिवात्मिका ॐ ब्रह्मविष्णुशिवान्मिकायै नमः।


जन्म कुंडली से जानिए अपना भाग्य और पाएं सफलता के आसान उपाय - अभी बनाएं फ्री 
सरस्वती पूजा का बौद्ध संस्कृति एवं देश के अन्य धर्मों के साथ संबंध

देवी सरस्वती का पूजन केवल भारत तक ही सीमित नहीं रहा है अपितु यह नेपाल, तिब्बत, इंडोनेशिया, थाईलैंड आदि की बौद्ध संस्कृति में भी इसका जुड़ाव देखा गया है. हिंदू धर्म के साथ बौद्ध धर्म का घनिष्ठ संबंध रहा है और सरस्वती को बोधिसत्व मंजुश्री की पत्नी के रूप में स्थापित करते हैं. प्रार्थनाओं और पूजा अनुष्ठानों के दौरान इन्हें पूजा जाता है. इस प्रकार, काठमांडू के आसपास बुद्ध की मूर्ति या मंदिर को सरस्वती की मूर्ति के साथ निकटता का संबंध माना गया है. जापान, वियतनाम, इंडोनेशिया और बर्मा जैसे देशों में भी पूजनीय हैं. भारत और नेपाल के बाहर, देवी सरस्वती का स्वरुप अन्य सभ्यताओं में अलग तरह क भी प्राप्त होता है और मनयताओं में इनके साथ संबंध विश्व की अनेक सभ्यताओं में देखा जा सकता है. बर्मी में थुरथाडी के रूप में जानी जाती है, चीनी के रूप में बिएनकाइटी एन, जापानी के रूप में बेंजाइटेन और थाई में सुरतसावाड़ी या सरतसावाड़ी के रूप में जाना जाता है.

जन्म कुंडली से जानिए अपना भाग्य और पाएं सफलता के आसान उपाय - अभी बनाएं फ्री

Related Puja

Kamala Mahalakshmi Anusthan for Business Growth
Growth in Ongoing Projects

Kamala Mahalakshmi Anusthan for Business Growth

Fri 26 June 2026
Bagalamukhi Temple, Haridwar
Prasad Box
279 devotees have booked this puja
Book Puja
Kamala Mahalakshmi Anusthan for Business Growth
Growth in Ongoing Projects

Kamala Mahalakshmi Anusthan for Business Growth

Fri 26 June 2026
Bagalamukhi Temple, Haridwar
Prasad Box
279 devotees have booked this puja
Book Puja

Talk to Astrologer

View all

Connect with India's best astrologers

Tarot Preeti

Tarot Preeti

20/min₹5/min
Suyash

Suyash

25/min₹5/min
Tarot Romi

Tarot Romi

26/min₹5/min
Tarot Beena ji

Tarot Beena ji

32/min₹5/min
Neelkanth

Neelkanth

22/min18/min
View all
Kamala Mahalakshmi Anusthan for Business Growth
Growth in Ongoing Projects

Kamala Mahalakshmi Anusthan for Business Growth

Fri 26 June 2026
Bagalamukhi Temple, Haridwar
Prasad Box
279 devotees have booked this puja
Book Puja
Prem Vriddhi Anushthan: For the Strength and Stability of Relationships
Positive changes in love life

Prem Vriddhi Anushthan: For the Strength and Stability of Relationships

Fri 26 June 2026
Mangla Gauri Temple, Kashi Khand
Prasad Box
395 devotees have booked this puja
Book Puja
Shukra Grah Shanti Puja
Opportunities For Marriage May Arise.

Shukra Grah Shanti Puja

Fri 26 June 2026
Navgrah Shani Mandir, Ujjain Madhya Pradesh
Prasad Box
327 devotees have booked this puja
Book Puja

Reconnect with your Faith

UserUserUser
Trusted by 1 Lakh Devotees
100% Secure