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Home ›   Blogs Hindi ›   Ravi Pradosh Vrat 2023: Know the worship method of Ravi Pradosh Vrat of Margashirsha month and its importance.

Ravi Pradosh Vrat 2023 : जानिए मार्गशीर्ष माह के रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि और इसका महत्व

Myyotish Expert Updated 09 Dec 2023 11:21 AM IST
ravi pradosh vrat
ravi pradosh vrat - फोटो : my jyotish

खास बातें

Ravi Pradosh Vrat 2023 : इस बार मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ेगा जिसके कारण इसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा. इस बार 10 दिसंबर 2023 को रविवार के दिन प्रदोष व्रत किया जाएगा. 
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Ravi Pradosh Vrat 2023 : शिव और शक्ति को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष का समय अत्यंत शुभ होता है तथा प्रदोष व्रत को प्रभावी माना जाता है. प्रदोष व्रत के शुभ फल भक्त के जीवन को सुखमय बना देने वाले होते हैं.

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इस बार मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ेगा जिसके कारण इसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा.  मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत के दिन महादेव का पूजन करने से सभी कष्ट दोष दूर हो जाते हैं. 

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रवि प्रदोष पूजा 

शिव पुराण के अनुसार प्रत्येक माह की प्रदोष तिथि भगवान शिव को समर्पित है. ऐसा कहा जाता है कि मासिक प्रदोष व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती को प्रसन्न करने का बेहद विशेष दिन होता है. हर माह के कृष्णपक्ष और शुक्ल पक्ष की तिथि को प्रदोष व्रत के नाम से पूजा होती है. ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति प्रदोष व्रत के दिन श्रद्धापूर्वक भोलेनाथ की पूजा करता है, उसकी हर मनोकामना जल्द ही पूरी हो जाती है. 

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इस बार 10 दिसंबर 2023 को रविवार के दिन प्रदोष व्रत किया जाएगा. रविवार का दिन होने के कारण यह रवि प्रदोष रुप में पूजा जाएगा. रविवार के शुभ दिन पर भगवान शिव के पूजन के साथ ही सूर्य देव का पूजन भी होगा. जहां सूर्य को ग्रहों में राजा का स्थान प्राप्त है ओर मान सम्मा वैभव को देने वाले हैं. सूर्य के दिन रवि प्रदोष होने पर सूर्य उपासना का भी विशेष दिन होगा. सूर्य को जल अर्पित करके इस दिन सूर्य के मंत्र जाप करने से व्यक्ति के बल एवं शक्ति में वृद्धि होती है. 

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रवि प्रदोष पूजा विधि 

रवि प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल यानी दिन और रात के मिलन के समय की जाती है. प्रदोष काल में पूजा करने के कारण ही यह प्रदोष व्रत कहलाता है. प्रदोष शिव पूजा में रुद्राभिषेक को विशेष महत्व दिया गया है. इसलिए इस दिन रुद्राभिषेक अवश्य करना चाहिए. इसी के साथ भगवान शिव के नामों का जाप करते हुए जलाभिषेक भी किया जाना शुभ होता है.

प्रदोष पूजा में भगवान शिव की पूजा के दौरान शिव स्तुति, शिव पंचाक्षर मंत्र और सहस्त्र नाम का पाठ किया जाता है. व्रत के दौरान निराजार रहते हुए व्रत संपन्न करते हैं. व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के भोजन का सेवन नही करना चाहिए फलाहार का उपयोग किया जा सकता है. ऎसे में प्रदोष व्रत के द्वारा भगवान का भजन और पूजन करने से भक्त को विशेष फलों की प्राप्ति होती है. 
 
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