myjyotish

6386786122

   whatsapp

6386786122

Whatsup
  • Login

  • Cart

  • wallet

    Wallet

विज्ञापन
विज्ञापन
Home ›   Blogs Hindi ›   Narali Purnima 2023: Know when Narali Purnima will be celebrated and what is the specialty behind it

Narali Purnima 2023: जानिए कब मनाई जाएगी नारली पूर्णिमा और क्या है इसके पिछे की विशेषता

my jyotish expert Updated 28 Aug 2023 02:36 PM IST
Narali Purnima 2023: जानिए कब मनाई जाएगी नारली पूर्णिमा और क्या है इसके पिछे की विशेषता
Narali Purnima 2023: जानिए कब मनाई जाएगी नारली पूर्णिमा और क्या है इसके पिछे की विशेषता - फोटो : my jyotish
विज्ञापन
विज्ञापन
नारली पूर्णिमा का पर्व महाराष्ट्र दक्षिण भारत तथा उत्तर भारत में जहां राखी का त्योहार सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, वहीं दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में नारियल पूर्णिमा या नारली पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है. आइए जानते हैं क्या है नारली पूर्णिमा पर्व से जुड़ी बातें और इस बार यह कब मनाया जाएगा.  नारली पूर्णिमा का त्योहार श्रावणी पूर्णिमा, रक्षा बंधन और कजरी पूर्णिमा जैसे अन्य त्योहारों की तरह मनाया जाता है. उत्तर भारत में जहां सावन पूर्णिमा के दिन राखी का त्योहार मनाया जाता है, वहीं महाराष्ट्र कोंकण एवं दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में नारियल पूर्णिमा या नारली पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है. 

लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए इस सावन सोमवार उज्जैन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में कराएं रुद्राभिषेक 04 जुलाई से 31अगस्त 2023

नारली पूर्णिमा कब होगी 
नारली शब्द का अर्थ है नारियल और पूर्णिमा का अर्थ है पूर्णिमा का दिन. इस दिन नारियल का विशेष महत्व होता है. इस वर्ष नारली पूर्णिमा का पर्व पंचांग के अनुसार 31 अगस्त को मनाया जा रहा है.  नारली पूर्णिमा के दिन जल और समुद्र के देवता की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन वरुण देव को नारियल चढ़ाने की प्रथा है. ऐसा माना जाता है कि श्रावण पूर्णिमा पर पूजा अनुष्ठान करने से भगवान वरुण प्रसन्न होते हैं और उन्हें समुद्र के सभी खतरों से बचाते हैं. 

सावन शिवरात्रि पर 11 ब्राह्मणों द्वारा 11 विशेष वस्तुओं से कराएं महाकाल का सामूहिक महारुद्राभिषेक एवं रुद्री पाठ 2023

नारली पूर्णिमा पूजन विशेष 
नारली पूर्णिमा का त्योहार तटीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों द्वारा विशेष रूप से मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव की भी पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है भगवान शिव को नारियल और उनकी पसंदीदा चीजें अर्पित की जाती हैं. दक्षिण भारत में इस दिन उपनयन या यज्ञ अनुष्ठान सबसे अधिक व्यापक रूप से किया जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर जनेऊ बदलने की परंपरा है. 

सौभाग्य पूर्ण श्रावण माह के सावन पर समस्त इच्छाओं की पूर्ति हेतु त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंगं में कराए रूद्र अभिषेक - 31 जुलाई से 31 अगस्त 2023

इसी कारण से इस पर्व को अबितम, श्रावणी पर्व के साथ कुछ तर्पण कार्य भी इस समय पर किए जाते हैं. इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराने या दान देने की भी परंपरा है. विशेषकर समुद्री तट के लोग नारली पूर्णिमा का त्योहार मनाते हैं.इस समय के दौरान प्रकृति का पूजन होता है. सृष्टि के तत्वों की पूजा हेतु यह समय विशेष होता है.
  • 100% Authentic
  • Payment Protection
  • Privacy Protection
  • Help & Support
विज्ञापन
विज्ञापन


फ्री टूल्स

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms and Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
X