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Home ›   Blogs Hindi ›   Lal Kitab Remedies: The great remedies of Lal Kitab can make you healthy.

Lal Kitab Remedies: लाल किताब के महाउपाय बना सकते हैं आपको निरोग।

Myjyotish Expert Updated 08 Apr 2022 02:53 PM IST
लाल किताब के महाउपाय बना सकते हैं आपको निरोग।
लाल किताब के महाउपाय बना सकते हैं आपको निरोग। - फोटो : google

लाल किताब के महाउपाय बना सकते हैं आपको निरोग।


आरोग्यम्परमं सुखम्“ अर्थात व्यक्ति का स्वस्थ होंना ही जीवन का उत्तम सुख है, इंसान का सेहतमंद होना न सिर्फ शारीरिक तौर पर अपितु मानसिक स्वास्थ्य का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई बार हमे देखने में मिलता है कि कोई व्यक्ति बाहर से तो हृष्ट-पुष्ट नज़र आता है परंतु बहुत सी परेशानियाँ उसे अंदर ही अंदर घेरे रहती है जैसे मानसिक चिंता, तनाव इत्यादि जो आगे चल कर बहुत बड़ी बीमारियों को जन्म देती है। बीमार होने पर व्यक्ति अलग-अलग डॉक्टरों से सलाह लेता है, लेकिन फिर भी उसे लाभ नहीं होता है, बीमार होने पर रोगी और घर के अन्य सदस्य मानसिक रूप से अशांति और चिंता का अनुभव करने लगते हैं, लेकिन यदि ज्योतिष शास्त्र के नज़रिये से देखे तो व्यक्ति के स्वास्थ्य पर कहीं न कहीं ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव व्यापक रूप से पड़ता है जो कि इंसान को बीमार बनाने के लिए जिम्मेदार होता है। परंतु जैसे कि हम हमेशा से ही बताते आए है कि ज्योतिष विज्ञान सिर्फ कारणों को ही नही बताता अपितु समस्या के निवारण हेतु उपायो को बताना भी इसका उतना ही कर्तव्य है। वैदिक ज्योतिष के ये विशेष उपाय लाल किताब मे वर्णित है जो कि व्यक्ति को स्वास्थ्य और सुखमय जीवन का मूल मंत्र देते है। अतः सामान्य तौर पर हम कह सकते हैं कि लाल किताब व्यक्ति को सम्पूर्ण जीवन में आरोग्यता का वरदान देती है।

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रोग मुक्ति के चमत्कारिक उपाय-

जीवन में रोग मुक्त और स्वस्थ्य रहने के लिए सदियों से चली आ रही परंपरा का अनुशरण करना हमारे लिए आवश्यक हो गया है। क्योंकि जो मंत्र हमारे वैदिक शास्त्रों और ज्योतिष में वर्णित है वह कहीं न कहीं सदियों से जांचे और परखे हुए हैं। परंतु आज मनुष्य इस आरामदायक जीवन पर इतना ज्यादा  आश्रित हो गया कि उसे इनकी आवश्यकता ही नही रह गयी है। जैसे कि वेदों में भी बताया गया है कि घर में बीमारियाँ कहाँ से आती हैं। घर में बीमारियों का आगमन बाहर से आए लोगों द्वारा चप्पलों और जूतों से भी होता है जिसे हम नज़रअंदाज़ करते रहे हैं। इसीलिए पुराने समय में घर के भीतर जूतों और चप्पलों का प्रवेश वर्जित था। इसी के साथ भोजन रसोई घर में बैठ कर ग्रहण करना भी उतना ही जरूरी था, क्योंकि पूरे घर में रसोई ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां आग जलती है और इस अग्नि से जीतने भी हवा में जीवाणु,विषाणु व्याप्त होते हैं उनका खात्मा हो जाता है।

अब जहां तक बात की जाये लाल किताब के उपायों की तो कुंडली में मंगल और बुध की बुरी स्थिति को ठीक करने के लिए मंगलवार के दिन छोटी-छोटी कन्याओ को साबूत बादाम दान में दें या बुधवार के दिन बकरी को काले चने खिलाएं।

मंगल और शुक्र की युति के समाधान हेतु अपने वजन के बराबर हरा चारा लेकर गाय को खिला दें, यह उपाय हर तीन महीने के भीतर एक बार कर दें सभी समस्याएँ समाप्त होंगी या एक मुट्ठी जौ या काली सरसों  लेकर उसे दूध से धोकर जल प्रवाह कर दें, या फिर किसी खुली स्थान पर रख दें, जहां पक्षियों का आगमन हो।

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यदि कोई व्यक्ति तमाम इलाज के बाद भी बीमार रहता है तो पुष्य नक्षत्र में सहदेवी की जड़ उसके पास रखिये, रोग से मुक्ति मिलने लगेगी। यदि लगे कि शरीर में कष्ट समाप्त नहीं हो रहा है, तो थोड़ा सा गंगाजल नहाने वाली बाल्टी में डाल कर नहाएं।

शनिवार के दिन दोपहर को सवा दो किलो बाजरे का दलिया पकाएं और उसमें थोड़ा सा गुड़ मिला कर एक मिट्टी की हांडी में रखें। सूर्यास्त के समय उस हांडी को रोगी के शरीर पर बायें से दांये सात बार फिराएं और चौराहे पर मौन रह कर रख आएं। आते-जाते समय पीछे मुड़ कर न देखें और न ही किसी से बात करें।

धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रखें। 600 ग्राम जौ का आटा 100 ग्राम काले तिल, सरसों के तेल में गूंथकर एक मोटा रोट बना लें तथा एक ही तरफ उसकी सिकाई करें। ध्यान रहे रोट को उलट-पलट न करें।

लंबी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ के लिए गुड़ के गुलगुले सवा किलो सरसों के तेल में पकाकर शनिवार व रविवार को रोगी के शरीर के ऊपर से उतारा करके उक्त मंत्र ‘ॐ रक्षो विध्वंशकारकाय नमः का नित्य जप करें। फिर चील, कौए, कबूतर, चिड़ियों को गुलगुले के टुकड़े डालें तथा बंदरों को चना, गुड़ खिलाएं। ऐसा 3, 5 या सात बार करें, निश्चित लाभ होता है।

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घर से बीमारी जाने का नाम ले रही हो, तो एक गोमती चक्र लेकर हांडी में रखकर रोगी के पलंग के पाए पर बांधने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलता है। जिस दिन से प्रयोग शुरू हो जाता है। किसी ग्रहण काल में निम्न मन्त्र को जपकर अपने अनुकल कर लें। इसके बाद जब भी आवश्यकता हो, एक काॅसे की कटोरी में जलभर इस मन्त्र को सात बार पढ़ करके जल में फॅूक मारें और रोगी को पिला दें। भगवान श्री राम की कृपा से सभी रोगादि का अन्त हो जाएगा।

इन सभी उपायों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपना कर बड़े से बड़े असाध्य रोग से निदान पाया जा सकता है।

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