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जानें कैसे करे शनि देव की वंदना

myjyotish expert Updated 16 May 2021 09:40 PM IST
worship of Shani dev
worship of Shani dev - फोटो : google
शनि देव जो एक न्याय के देवता माने जाते हैं ।जिनके न्याय चक्र का सामना सभी को एक न एक बार करना ही पड़ता है ।   जो अच्छे कर्म करते हैं  उन पर शनि की
विशेष कृपा होती है और जिससे शनि क्रोधित हो जाते हैं उन्हें शनि के न्याय चक्र का सामना करना पड़ता है।  
किन्तु जो लोग हनुमान की पूजा करते है उन पर शनि देव का प्रभाव कम होता  हैं।

शनि देव की पूजा करने से सभी को  फल की प्राप्ति होती है  । किन्तु अगर व्यक्ति शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करें तो उस पर शनि की  विशेष कृपा होती है।

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आज हम जानेगें कैसे करें शनि की वंदना जिसे हो शनि की हो विशेष कृपा 


शनि भगवान की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी  ।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव....


श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव....

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव....

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव....


देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
 
 
दशरथकृत शनि स्तोत्र
 
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।


नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।

नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।
तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

देवासुरमनुष्याश्च सिद्घविद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।
प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत।
एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।

शनिदेव के बारे में अधिक जानने के लिए हमारे ज्योतिष से संपर्क करें
 
शनिदेव के मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः"
 "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"
"ॐ शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये। सय्योंरभीस्रवन्तुनः।।


नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम |
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम |

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