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Home ›   Blogs Hindi ›   Kartik Ekadashi: Goddess Lakshmi arrives at home on the day of Rama Ekadashi.

Kartik Ekadashi: देवी लक्ष्मी का होता है रमा एकादशी के दिन घर पर आगमन

my jyotish expert Updated 08 Nov 2023 10:05 AM IST
Kartik Ekadashi
Kartik Ekadashi - फोटो : my jyotish
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 पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की एकादशी के दिन रमा एकादशी पूजन करने से देवी लक्ष्मी का घर में वास स्थायी रुप से होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से साधक को निश्चित फल मिलता है भक्त को इसके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति का सुख भी प्राप्त होता है. इसलिए कार्तिक माह में आने वाली रमा एकादशी के दिन भक्त जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु का पूजन तो करते ही हैं साथ में धन की देवी मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा करते हैं. उनकी कृपा से भक्तों के जीवन में व्याप्त सभी दुख और परेशानियां दूर हो जाती हैं. आइए जानते हैं कैसे करें रमा एकादशी पूजन और क्या हैं इस एकादशी का विशेष महत्व.
 
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पूजा विधि
रमा एकादशी तिथि पर पूजा के लिए प्रात:काल से भगवान श्री विष्णु के साथ श्री लक्ष्मी का पूजन आरंभ हो जाता है. इस शुभ समय पर शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए. इस समय भगवान सूर्य का पूजन भी किया जाता है. इस दिन सूर्य उपासना के लिए भगवान को जल अर्पित करना चाहिए. इसके बाद श्री भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए. भगवान को फल, फूल, धूप, दीप, अक्षत, चंदन इत्यादि चीजों को अर्पित करना शुभ होता है. पूजा के दौरान विष्णु चालीसा का पाठ तथा लक्ष्मी सुक्त करना विशेष होता है. एकादशी माता की आरती अवश्य करनी चाहिए. अंत में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए. पूरे दिन व्रत रखें. संध्या समय पर भी इस तरह से ही आरती करें और फलों का भोग लगाएं. अगले दिन पूजा के बाद दान देकर व्रत को संपन्न किया जाता है.
 
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एकादशी व्रत के नियम
रमा एकादशी के दिन कई बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस दिन विधि अनुसार नियमों को करते हुए व्रत का पूरा फल भक्त को प्राप्त होता है. इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए वाणी की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने की जरुरत होती है. भक्तों के मुख में सदैव श्री हरि का तथा देवी लक्ष्मी जी का नाम ही होना चाहिए. 
 
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रमा एकादशी दिन भक्त को शुद्ध चित्त के सतह यह दिन मनाना चाहिए. इस दिन ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है इसके न होने से व्रत मान्य नहीं होता है. किसी भी प्रकार की अशुद्धि व्रत को समाप्त कर देने वाली होती है.

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एकादशी के दिन खान पान करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. इस दिन व्रत धारी को फलाहार का सेवन स्वीकार्य होता है. यदि व्रत न रख पाएं तो तामसिक भोजन न करें और शुद्ध सात्विक भोजन का सेवन करना जरूरी होता है. इस तरह से नियमों का पालन करते हुए व्रत का पूर्ण फल भक्त को प्राप्त होता है.
 
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