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Jyotish Shastra: किन ग्रहों के कारण आती है शिक्षा में दिक्कत

Myjyotish Expert Updated 07 Apr 2022 06:33 PM IST
किन ग्रहों के कारण आती है शिक्षा में दिक्कत
किन ग्रहों के कारण आती है शिक्षा में दिक्कत - फोटो : google

किन ग्रहों के कारण आती है शिक्षा में दिक्कत


लड़के हो या लड़की दोनों के लिए ही शिक्षा बहुत जरूरी है। आज के समय में शिक्षा के क्षेत्र में काफी तरक्की हुई है बच्चे अपना बेहतर प्रदर्शन दे रहे हैं। एक उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है इसलिए माता पिता को अपने बच्चों को शिक्षा अवश्य दिलानी चाहिए। कुछ बच्चे पढ़ाई में तो बहुत अच्छे होते हैं, कुछ बच्चे पढ़ाई में ठीक ठीक होते हैं साथ ही कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जिनकी पढ़ाई में रुचि नहीं होती और खेलकूद में ज्यादा रुचि होती है वह खेलकूद के क्षेत्र में ही आगे बढ़ते हैं। यदि बच्चे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं चाहे वह शिक्षा हो या खेल कूद तो यह अच्छी बात है परन्तु कई बार ऐसा होता है की बच्चे अच्छा प्रदर्शन तो करना चाहते हैं लेकिन अनजान और अनचाहे कारणों के चलते हैं वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। कई बार ऐसा होता है कि बच्चों के बुरे प्रदर्शन का कारण पता चल जाता है लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि कारण समझ ही नहीं आते हैं तो ऐसे में आपकी कुंडली में ग्रहों का गोचर भी कारण बन सकता है। बच्चे की कुंडली में कई बार गृह ऐसी स्थिती में बैठ जाते हैं जिसके चलते बच्चे की शिक्षा प्रभावित होती हैं। आज हम आपको कुंडली मे ग्रहों की उन स्थितियों स्थिती के बारे में बताएंगे जिसके चलते बच्चे की शिक्षा प्रभावित हो सकती है।

जब कुंडली में चतुर्थेश या पंचम भाव का स्वामी बृहस्पति या बुद्ध छठे, आठवें या बारहवें भाव में विराजमान होता है और इन पर गुरु ग्रहों की दृष्टि पड़ती है तब व्यक्ति को शिक्षा के क्षेत्र में दिक्कत आती है।

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चौथे भाव का स्वामी ग्रह छठे आठवें या 12वें भाव में हो या फिर किसी नीच राशि में बैठा हो ऐसी कुंडली वाले लोगों की भी पढ़ाई लिखाई काफी दिक्कत भरी रहती है।

 चंद्रमा का संबंध शिक्षा से माना गया है। ऐसे में यदि किसी जातक की कुंडली में चन्द्रमा पीड़ित होता है तो उसे शिक्षा के क्षेत्र में परेशानियों झेलनी पड़ती है। लेकिन यदि कुंडली में चंद्रमा पर बृहस्पति की दृष्टि हो तो परिणाम थोड़े कम बुरे होते हैं।

 जब कुंडली में पंचम भाव के स्वामी और अष्टम भाव के स्वामी की युक्ति बनती है तो वह ऐसे व्यक्ति को शिक्षा से दूर ले जाती है। इस ग्रह गोचर के चलते व्यक्ति का शिक्षा के क्षेत्र में मन ही लगता है और वह शिक्षा से दूर होने लगता है। यदि उसे जबरन शिक्षा के क्षेत्र में डाला जाए तो वह शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाता है।

बुध और गुरु ग्रह भी शिक्षा के कारक ग्रह माने जाते हैं। यदि ऐसे में शिक्षा के गृह ही कुंडली में पीड़ित होंगे तो जातक की शिक्षा में दिक्कत आना स्वाभाविक है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध और गुरु पीड़ित होते हैं उसके लिए शिक्षा के क्षेत्र में बाधाएं उत्पन्न करते हैं।

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 शनि, मंगल, राहु और केतु बहुत ही बुरे ग्रह माने जाते हैं लोग इन ग्रहों का नाम सुनते ही बुरे खयाल मन में ले आते है। ऐसे में यदि आप इन की बुरी दशा की बात करें तो जातक की स्थिती काफी खराब हो जाती है। जब कुंडली में अशुभ माने जाने वाले ग्रह शनि, मंगल राहु-केतु की दशा चल रही होती है तब भी व्यक्ति की शिक्षा में दिक्कतें आती हैं। इन ग्रहों की अंतरदशा चलने पर जातक की एकाग्रता कम होती जाती है। वह एकाग्र मन से पढ़ाई नहीं कर पाता है। जिसके चलते उसे शिक्षा के क्षेत्र में बुरे परिणाम देखने को मिलते हैं।

 ग्रहों की इन स्थितियों का कुंडली में बनना बहुत ही अशुभ होता है। मुख्यतौर पर छात्रों के लिए क्योंकि यह उन्हें शिक्षा से दूर ले जाते हैं। यदि किसी छात्र को काफी समय तक शिक्षा में बुरे परिणाम मिलते हैं तो उसका आत्मविश्वास टूटने लगता है ऐसे में परिवारजनों को ध्यान देना चाहिए कि वह उसकी कुंडली में ग्रहों की स्थिती देखें। हर बार छात्र को दोष देना ठीक नहीं होता क्योंकि कई बार वह चाहता है कि वह बेहतर प्रदर्शन करे परंतु उसे स्वयं कारण नहीं पता होते कि वह क्यों बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे है। ऐसे में आप बच्चे की कुंडली देखें और यदि इनमें से कोई भी ग्रह गोचर बन रहा है तो किसी अच्छे ज्योतिषी से सलाह लेकर उपाय करें और इन दोषों को बच्चे की कुंडली से दूर करें जिससे बच्चे का शिक्षा के क्षेत्र में मन लगने लगेगा। ज्योतिष शास्त्र में बताये गये उपायों को करने से दोषों से मुक्ति मीलती है और बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं।

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