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Annakut 2023: क्यों मनाया जाता है अन्नकूट का उत्सव जानें इसका महत्व

my jyotish expert Updated 13 Nov 2023 10:31 AM IST
Annakut 2023
Annakut 2023 - फोटो : my jyotish
ब्रजभूमि में मनाए जाने वाले कुछ विशेष त्यौहारों में एक खास जगह है अन्नकूट की. गोवर्धन पूजा के समय पर अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है. यह पर्व दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा के समय होता है और इस समय पर कई सारे खाद्य पदार्थों को मिला कर जो भोग भगवान को अर्पित होता है वह अन्नकूट कहलाता है. अन्नकूट महोत्सवके दौरान में मौसमी सब्जियों के मिश्रण से तैयार अन्नकूट का भोग श्री विष्णु भगवान को समर्पित करते हैं. 14 नवंबर को अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा. 

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इस दिन सबसे पहले गिरिराज प्रभु का दूध और पंचामृत अभिषेक किया जाता है और फिर पूजा अनुष्ठानों के साथ यह दिन संपन्न होता है. गोवर्धन पर्वत के पूजन के साथ ही अन्नकूट की तैयारियां शुरु हो जाती हैं. अन्नकूट पूजा का त्यौहार बड़े स्तर पर उत्साह और जोश के साथ संपन्न होता है. 

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अन्नकूट पर गोवर्धन पूजन 2023
भारत के ब्रज मंडल में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट लंबे समय से चली आ रही है. यह एक विशेष धार्मिक परंपरा है जिसमें भक्त अपनी शृद्धा एवं प्रेम को भगवान के सन्मुख प्रकट करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने देवताओं के राजा इंद्र की पूजा बंद के बदले गिरिराज महाराज की पूजा को स्थान प्रदान करवाया था. इसी परंपरा का निर्वाह आज भी भक्त करते हैं तथा गोवर्धन पर्वत का विशेष पूजन इस समय पर किया जाता है. 

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अन्नकूट पूजा 2023 विधान
इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाई जाती है और उसके पास बैठे कृष्ण के सामने गाय और ग्वाल-बाल, चावल, फूल, जल, मौली, दही और तेल का दीपक जलाकर उसकी पूजा की जाती है और परिक्रमा की जाती है. गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है. दिवाली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है. इस बार देशभर में यह आयोजन 14 नवंबर, को है. गोवर्धन पूजा की शुरुआत भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से हुई. 

इस दिन गाय, बैल आदि जानवरों को नहलाकर धूपबत्ती, चंदन और फूल मालाएं पहनाकर उनकी पूजा की जाती है. इस दिन गौ माता को मिठाई खिलाकर आरती की जाती है और प्रदक्षिणा भी की जाती है. इस पर्व का धार्मिक पहलू बहुत विशेष है. इस दिन पर गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर, गाय और ग्वालों की टोली, चावल, फूल, जल, मौली, दही और तेल से पूजा की जाती है. उसके पास बैठे कृष्ण के सामने दीपक रखे जाते हैं. जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है. इन सभी कामों को करने से सुख एवं शांति की प्राप्ति होती है.
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