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Get It Done In Kashi Vishwanath For Long Life And Good Health This Sawan Mahamrityunjaya Jaap And Shringar Puja Online 2023

इस सावन लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए काशी विश्वनाथ में कराए महामृत्युंजय जाप एवं श्रृंगार - 31 जुलाई से 30 अगस्त 2023

By: Myjyotish Expert

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हिंदू धर्म में भगवान् शिव को सबसे शक्तिशाली देवता माना जाता है। भगवान् शिव की महामृत्युंजय जाप से साधना करना अधिक लाभकारी है। श्रावण, कार्तिक जैसे शुभ महीने के दौरान या किसी भी सोमवार को महामृत्युंजय मंत्र जाप करना उचित है।इस शक्तिशाली मंत्र का जाप व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से करते हैं।कई बार यह मंत्र-संजीवनी मंत्र के रूप में भी जाना गया है, क्योकि यह एक ऋषि शुक् को दी गई जीवन-बहाली का एक तत्व है। भगवान् शिवा मृत्यु संबंधित तत्वों के रक्षक है, इसीलिए अप्राकृतिक मृत्यु से बचने के लिए रोज १०८ बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना उचित है।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात्
महामृत्युंजय मंत्र ३२ शब्दों के प्रयोग से बना है तथा इस मंत्र के पहले ॐ लगा देने से कुल ३३ शब्द हो जाते हैं। इसीलिए महामृत्युंजय मंत्र को 'त्रयस्त्रिशाक्षरी' मन्त्र भी कहा जाता हैं।

महा शब्द का अर्थ "सर्वोच्च" है और मृत्युं शब्द का अर्थ "मृत्यु" है जब की, जाया शब्द का अर्थ "विजय" होता है। महामृत्युंजय मतलब बुरी चीजों पर विजय हासिल करना। देवता शिव बुरी शकतोयो के संहारक है। महामृत्युंजय जाप मुख्यतः दीर्घकाल रहने वाली बीमारियो से छुटकारा पाने के लिएऔर लम्बी आयु पाने के लिएकिया जाता है। रोज १०८ बार महामृत्युंजय जाप करने से अधिक लाभ, बीमारियों पे , मानसिक तनाव पे उपचारात्मकता मिलती है।यह एक शक्ति मंत्र भगवान शिव को सबंधित है, जब जीवन में स्थिति बिगड़ जाती है तब महामृत्युंजय जाप करने से जटिल जीवन से मुक्ति मिलती है। जो लोग मृत्युशय्या पे है उनके लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना एक निवारण की तरह काम करता है।

(यह माना जाता है, महामृत्युंजय मंत्र न की केवल शारीरिक प्रकृति के उपचान में लेकिन मानसिक शांति के लिए भी अधिक उपयोगी है। यह एक शक्तिशाली मंत्र है जो देवो के देव महादेव को समर्पित है। त्रिदेवता (भगवन ब्रह्मा , भगवान विष्णु और भगवन महेश) में से एक देवता जो बुरी शक्तियों का नाश करने के लिए जाने जाते है।)


महामृत्युंजय मंत्र के फायदे:

  • इस मंत्र में अपार शक्ति है, जिससे सभी समस्याए दूर होती है।
  • सुबह ब्रह्मा मुहूरत में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से, नकारत्मकता का सर्वनाश होता है।
  • इस मंत्र का जाप करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • सभी बीमारिया दूर होती है।
  • अधिक लाभ के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप ब्रह्म मुहूरत में  किया जाता है।
  • इस मंत्र के आचरण द्वारा सकारात्मक उर्जाए निर्माण होती है जिससे सभी नकारात्मक चीजों का सर्वनाश होता है।
  • कोई भी व्यक्ति मृत्यु पर विजय पा सकता है।
  • रोज इस मंत्र का पठन करने से गंभीर दुर्घटना, दुर्भाग्य को दूर रखा जा सकता है।
  • यह आध्यात्मिक उत्थान प्रदान करता है।
  • जिन लोगो के कुंडली में "दोष" है, वे इस शक्तिशाली रुद्र मंत्र का जाप करके दोष के हानिकारक प्रभाव को समाप्त कर सकते हैं।
  • आर्थिक संकटों को दूर करने इस  मंत्र का जाप उपयोगी है।
  • यह मंत्र पिछले जन्म के पाप मिटाने की क्षमता रखता है।

 

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ:

  • ॐ - हे ओंकार स्वरूप परमेश्वर शंकर 
  • त्र्यम्बकं - तीन आँखो से शोभायमान आपका
  • यजामहे - हम पूजन करते है, कृपया हमारे जीवन में 
  • सुगन्धिम् - भक्ति का सुगंध दीजिए, 
  • पुष्टिवर्धनम् - आनंद की वृद्धि कीजिए। 
  • उर्वारुकमिव - जिस प्रकार फल आसानी से
  • बन्धनान् - पेड़ के बंधन से मुक्त होते है, ठिक वैसे ही 
  • मृत्योर्मुक्षीय - हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करके 
  • मामृतात् - अमृत पद की प्राप्ति दीजिए।

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ यह है की हम आपकी भगवान शिव की आराधना करते हैं। आप खुशी हैं जो हमारा पोषण करते हैं, हमारे स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित करते हैं, और हमें (लोगों को) कामयाब होने का कारण बनते हैं। महा मृत्युंजय जाप हमेशा शुद्ध वातावरण में ही करने की आवश्यकता है। जिससे आपका मन उन सभी चिंताओं को दूर कर सके और आपका पूरा दिन सकारात्मक और प्रेरित रहने के लिए।

महामृत्युंजय मंत्र का महत्त्व:
यह धार्मिक महा मृत्युंजय मंत्र है जिसे व्यापक रूप से त्र्यंबकम मंत्र के रूप में जाना जाता है। कई लोगों के अनुसार, यह माना जाता है कि महा मृत्युंजय मंत्र के जाप से कंपन की निर्मिति होती है जिससे मानव शरीर के अच्छे स्वास्थ्य की सुनिश्चिति और भौतिक शरीर को पुन: उत्पन्न करने में मदद होती है।

यह सबसे प्रभावशाली मंत्र है जो दीर्घायु प्रदान करता है, दुर्भाग्य और अप्राकृतिक मृत्यु को टाल देता है। मुख्यतः रूप से यजुर्वेद के भाग के रूप में माना जाने वाला, यह सूक्त भय की समाप्ति का कारण बनता है। हिंदू धर्म में इस महा मृत्युंजय मंत्र जाप का १०८ बार जप करने का अत्यधिक महत्व है। यह चारों ओर की नकारात्मकता (बुराई) समाप्त करता है और सकारात्मकता लाता है।

महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान कैसे करें?

महामृत्युंजय मंत्र का लाभ शास्त्रों के अनुसार पुरश्चरण विधि के माध्यम से होता है जो पांच प्रकार का होता है-

  • जाप
  • हवन
  • तर्पण
  • मार्जन
  • ब्राह्मण भोजन

1)जाप - शास्त्रों के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जाप करने से यह मंत्र जागृत होकर अलभ्य लाभ देता है।

2) हवन - पुरश्चरण विधि में जप करते समय "ॐ" एवं "नम:" को गिना नहीं जाता। जप संख्या पूर्ण होने के बाद महामृत्युंजय मंत्र के सवा लाख जप का दशांश भाग यानी १२५०० मंत्र के आखिर में "स्वाहा" लगाकर हवन किया जाता है। 

3) तर्पण - हवन के दशांश भाग का तर्पण यानी १२५० करना है। मंत्र के अंत मे तर्पयामि लगाकर तर्पण किया जाता है। 

4) मार्जन - तर्पण के दशांश भाग यानी १२५ मंत्र का मार्जन होता है जिसमे मंत्र के अंत में ‘मार्जयामि’या ‘अभिसिन्चयामी लगाकर डाब लेकर पानी मे डुबा कर अपने पीछे की ओर छिडकना से मार्जन विधि पूर्ण होता है।

5) ब्राह्मण भोजन - मार्जन के दशांश भाग यानी १३ ब्रह्माण वृन्दो को भोजन कराया जाता है।​​​​​​
 

महामृत्युंजय मंत्र की रचना
                                   महामृत्युंजय मंत्र पवित्र ग्रंथ ऋग्वेद में पाया गया है, जो की एक प्राचीन हिंदू पाठ है। इस मंत्र का सूत्रीकरण ऋषि मार्कण्डेय द्वारा किया गया जब वे चंद्र प्रजापति दीक्षा द्वारा दिए गए शाप से पीड़ित थे। यह कहा जाता है की, महा मृत्युंजय मंत्र जाप से शाप का सम्पूर्ण प्रभाव कम हुआ और उसके बाद भगवान शिव ने उनके माथे पे चंद्र को प्रस्थापित किया।

महामृत्युंजय मंत्र के रचयिता कौन हैं?
महामृत्युंजय मंत्र के रचयिता मार्कण्डेय ऋषि है। इस मंत्र के जाप से ही मार्कण्डेय ऋषि को अमरत्व की प्राप्ति हुई थी। मृत्यु पर विजय प्राप्त होने के कारण इस मंत्र को महामृत्युंजय मंत्र कहा जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र जाप मुख्य विधी कब करनी चाहिए?
महामृत्युंजय जाप विधी को शुभ तिथि और समय (मुहूरत ) में ही किया जाना चाहिए। यह कहा जाता है की, श्रावण माह में महा मृत्युंजय मंत्र जाप माला विधी करने से अधिक फायदा होगा। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में भगवान त्र्यंबकेश्वर का अनुष्ठान करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

महामृत्युंजय जाप के नियम
१) महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय शरीर एवं मन स्वच्छ होना चाहिए।
२) इस मंत्र का जाप करते समय शिवलिंग या भगवान शंकर की प्रतिमा / तस्वीर या महामृत्युंजय यंत्र में से कोई एक प्रतिक रूप में आपके पास होना चाहिए।
३) महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने के समय पर तथा अन्य कोई भी पूजा-पाठ या आराधना करते समय अपना मुख पूर्व दिशा की ओर ही रखें।
४) मंत्र जाप हमेशा कुशा से निर्मित आसन पर ही किया जाना चाहिए।
५) मंत्र को फलीभूत होने के लिए स्पष्ट रुप से उच्चारण करना अति आवश्यक है अन्यथा मंत्र जाप का लाभ नहीं होता।
६) महामृत्युंजय मन्त्र का जाप धीमे या तेज गति से न करें। जप के समय अपने होंठ हिलें पर आवाज़ सुनाई न दे, इस प्रकार से जप किया जाता है।
७) महामृत्युंजय मंत्र का जप करते और जाप के बाद मांस-मदिरा तथा अन्य प्रकार के व्यसनों से दूर रहना चाहिए।
८) धूप-दीप जलाकर जप करना चाहिए। 
९) महामृत्युंजय मंत्र का जप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का ही प्रयोग करना चाहिए।
१०) गौमुखी रुद्राक्ष माला रखकर मंत्र जप करना चाहिए।

महामृत्युंजय जाप कितनी बार करना चाहिए?
महामृत्युंजय मंत्र का जाप सवा लाख बार करनेसे इच्छित मनोकामना पूर्ण होती है, किन्तु यह मंत्र जाप एक दिन में पूर्ण नहीं होता इसीलिए प्रतिदिन १००० बार मंत्र जाप करे। लगातार दिन में १००० बार मंत्र जाप करने से १२५ दिन में सवा लाख मंत्र जाप पूरा होता है। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए महामृत्युंजय जाप अकेले भी किया जाता है अथवा समूह में भी किया जाता है। महामृत्युंजय मंत्र से लाभ पाने के लिए कम से कम १०८ बार मंत्र जप किया जाता है। सवा लाख मंत्र जाप ५ या ७ पण्डितजी द्वारा भी किया जाता है।

हमारी सेवाएं :
हमारे पंडित जी द्वारा अनुष्ठान से पूर्व संकल्प करवाया जाएगा। साथ ही पूर्ण विधि - विधान से महामृत्युंजय जाप पूजनकर श्रृंगार संपन्न किया जाएगा।

प्रसाद : 
•    सूखा भोग 
•    काला धागा ( हाथ में बांधने हेतु )

 

अस्वीकरण : myjyotish.com न तो मंदिर प्राधिकरण और उससे जुड़े ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व करता है और न ही प्रसाद उत्पादों का निर्माता/विक्रेता है। यह केवल एक ऐसा मंच है, जो आपको कुछ ऐसे व्यक्तियों से जोड़ता है, जो आपकी ओर से पूजा और दान जैसी सेवाएं देंगे।

 

जानिये हमारे पंडित जी के बारे में

FAQ

 

1. पूजा एवं पूजा को निवारण के रूप में करने का क्या महत्व है?
पूजा ईश्वर का आशीर्वाद एवं उनके द्वारा प्रदान की गई सुख - सुविधाओं के लिए धन्यवाद देने का एक प्रकार है। यह एक माध्यम है जिससे हम ईश्वर को शुक्रिया अदा करते हैं की उन्होंने हमें एक योग्य जीवन प्रदान किया। पूजा आमतौर पर अपने जीवन के महत्वपूर्ण दिनों में एक-एक करके किया जाता है जैसे कि जन्मदिन, वर्षगांठ या उत्सव / शुभ तिथियां समृद्धि, दीर्घायु और शुभकामनाएं आमंत्रित करने के लिए।
निवारण पूजा दुष्प्रभावों को विनियमित करने के लिए आयोजित  की जाती है। जिसका भुगतान वह व्यक्ति अपने जीवन में एक निश्चित समय से कर रहा होता है।  यह पूजा ग्रहों के कंपन द्वारा दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए की जाती है। यह पूजा प्राकृतिक रूप से विशेष दिन एवं विशेष मुहूर्त के तहत संपन्न की जाती है। 
 

2. मेरी पूजा के लिए मुझे Myjyotish.com क्यों चुनना चाहिए?
Myjyotish.com भारत का सर्वश्रेष्ठ ऑनलाइन पूजा का पोर्टल है, वह अपनी प्रत्येक पूजा से पूर्व व्यक्ति से संकल्प लेते हैं जिसके बाद ही पूजा आरम्भ की जाती है। वैदिक अनुष्ठान के अनुसार किसी भी पूजा से पूर्व संकल्प करना आवश्यक होता है। संकल्प के बिना कोई भी उपाय, पूजा या कर्म फल नहीं देता है। संकल्प के बिना कोई भी भक्त मनवांछित परिणाम प्राप्त नहीं कर सकता है। संकल्प एक प्रकार की घोषणा है जो मनुष्य को ईश्वर से जोड़ती है ताकि भगवान पूजा से प्रसन्न हो सकें। वेदों के अनुसार संपूर्ण ब्रह्मांड भगवान श्री नारायण के संकल्प के माध्यम से विकसित हुआ है। इस प्रकार यह किसी भी पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
माय ज्योतिष के माध्यम से ,आपके द्वारा आदेशित पूजा पूर्ण विधि - विधान से एक पुजारी द्वारा संपन्न की जाती है। 
एक बार जब आप पूजा को बुक करने की प्रक्रिया पूर्ण कर लेते हैं, उसके बाद समय - समय पर हमारी टीम आपसे संपर्क करती है और पूजा से जुड़ी समस्त जानकारी से आपको अवगत कराती है। जैसे पूजा कब की जाएगी, पूजा के दिन आपको किन सावधानियों या अनुष्ठानों को निभाना चाहिए।  माय ज्योतिष के माध्यम से आप पूजा लाइव होते देखने की सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं। 
 

3. मैं ऑनलाइन पूजा कैसे बुक कर सकता/सकती हूं ? 
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5. मुझे पूजा का क्या प्रसाद मिलेगा? और मैं इसे कब तक प्राप्त कर सकूंगा/ सकुंगी ?
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7. क्या मैं बुकिंग के बाद पूजा रद्द कर सकता/सकती  हूं? ऐसे मामले में धनवापसी नीति क्या है?
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8. मैं कैसे सुनिश्चित कर सकता/सकती हूं कि मेरे द्वारा आदेशित पूजा वास्तव में की गई है?
एक बार जब आप पूजा का आदेश देते हैं, तो हम आपके साथ पूजा के स्थल, तिथि और समय को साझा करेंगे। आप या आपके प्रतिनिधि पूजा में शामिल हो सकते हैं। हम आपकी पूजा की लाइव स्ट्रीमिंग भी साझा करेंगे। आप इसे दुनिया के किसी भी हिस्से में देख सकते हैं।
 

9. मुझे कैसे पता चलेगा कि यह एक समूह या व्यक्तिगत पूजा है?
हम अपनी साइट पर स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हैं कि एक विशेष पूजा समूह है या व्यक्तिगत पूजा।
इसके अलावा, एक बार जब आप पूजा का आदेश देते हैं, तो हम आपके साथ पूजा के स्थल, तिथि और समय को साझा करतें। पूजा से जुड़ी तस्वीर एवं वीडियो को आपके साथ साझा भी करते हैं। आप स्वयं या आपके परिवार से कोई इस पूजा में शामिल भी हो सकता है। पूजा को आप दुनिया के किसी भी कोने से लाइव भी अनुभव कर सकते हैं। जिससे आपको खुद पता चल जाएगा कि यह एक समूह पूजा है या व्यक्तिगत पूजा है।
 

10 . क्या मेरी शारीरिक उपस्थिति की आवश्यकता होगी?
नहीं, इस प्रक्रिया की सुंदरता यह है कि पूजा करते समय आपको शारीरिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है।
 

11. किसी चिंता या स्पष्टीकरण के मामले में, मुझे किससे संपर्क करना चाहिए?
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