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देवी कूष्मांडा की पूजा से होती है अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

My Jyotish Expert Updated 28 Mar 2020 01:13 PM IST
Worship of Goddess Kushmanda achieves unbroken good fortune
नवरात्रि के पर्व के चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इनकी पूजा से सभी प्रकार के रोग व दुःख दूर हो जाते है। माँ कूष्मांडा सूर्य मंडल में निवास करती है। वह अष्टभुजाधारी हैं जो भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं तथा उन्हें भाग्यशाली होने का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। माता के हाथों में पुष्प, चक्र, गदा, वर देती हुई मुद्रा, जप माला और अमृत घड़ा होता है। इनकी पूजा में कुम्हड़ा यानि की कद्दू की बलि दी जाती है। माँ के मन को हरा रंग बहुत प्रिय है। प्रकृति की अद्भुत खूबसूरती माँ को बहुत पसंद है।

इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनकर देवी कूष्मांडा की पूजा करनी चाहिए। उसी के साथ ॐ कूष्मांडा देव्यै नमः का जाप करना चाहिए। वहीं अगर इस दिन सिद्ध कुंजिका का पाठ करना भी लाभदायक होता है। इस दिन देवी को मालपुए का भोग लगाना चाहिए इससे देवी बहुत प्रसन्न होती है। माँ को भोग लगाने के बाद यह किसी ब्राह्मण को दान करें और स्वयं भी ग्रहण करें। माँ को हरे रंग का चुनर बहुत भाता है।

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मान्यताओं के अनुसार देवी कूष्मांडा ने ब्रह्माण्ड की संरचना की थी जब सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था। अपनी मंद मंद मुस्कान से पूरे ब्राह्मणड की रचना करने के कारण ही इन्हे कूष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है। देवी के आठ हाथ होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली देवी के नाम से भी जाना जाता है। देवी के हाथों में सिद्धिओं और निधिओं को प्रदान करने वाली जप माला है।
नवरात्रि के पर्व के चौथे दिन देवी कुष्मांडा की पूजा करने से देवी भक्तों को  दुःखो से मुक्ति प्रदान करती हैं। यही नहीं देवी कूष्मांडा की पूजा से साधको को दीर्घायु, कार्य क्षेत्र में प्रसिद्धि, बल या ताकत और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद भी मिलता है। देवी को दूध पाक का भोग भी अतिप्रिय होता है। देवी कूष्मांडा इस चराचर जगत की अधिस्त्रि है।

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