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माँ चामुंडा की आराधना से पूर्ण होते हैं मनवांछित फल

MyJyotish Expert Updated 15 May 2020 01:20 PM IST
Wishing Maa Chamunda fulfills desired fruits
हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चामुंडा माता राज राजेश्वरी त्रिपुरसुन्दरी का ही एक स्वरूप हैं। कथाओं के अनुसार देवी चामुंडा की उत्पत्ति माँ दुर्गा के भौवों से हुई थी। चामुंडा देवी का प्रसिद्ध मंदिर हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित है। माना जाता है की उस स्थान पर देवी सती की जिव्हा विष्णु जी के चक्र से कटकर गिरी थी जिसके कारण ही वह स्थान 51 शक्तिपीठों में से एक सिद्ध शक्तिपीठ है। देवी चामुंडा का स्वरूप माँ काली को समर्पित है। वह आत्मशक्ति के स्वरूप में परमात्मा का स्वरूप है। वह समस्त चरा-चर जगत की आत्मा में निवास करती हैं।

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पौराणिक कथाओं के अनुसार दुर्गासप्तशती में प्राचीन काल की एक कथा जिसमें देवी की उत्पत्ति का व्याख्यान किया गया है। उस कथा के अनुसार एक बार धरती में विपदाओं का पहाड़ टूट पड़ा। शुम्भ-निशुम्भ नामक दो दैत्यों ने धरती एवं स्वर्ग लोक पर बहुत अत्याचार फ़ैलाया हुआ था। उसके प्रताड़ना से सभी बहुत परेशान थे। इस समस्या से निजात पाने के लिए सभी देवताओं ने हिमालय पर जाकर भगवती की आराधना करने का निश्चय किया। भगवती का परिचय किसी को पता न होने के कारण स्तुति में किसी देवी का नाम नहीं लिया जा रहा था।

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सभी देवताओं ने पूर्ण श्रद्धा के साथ देवी का स्मरण किया ताकि जल्द से जल्द उनकी समस्या का निवारण हो सके। उनकी आराधना के दौरान ही देवी पार्वती सरोवर पर स्नान करने जा रहीं थीं। जब देवी पार्वती ने देवताओं से उनकी स्तुति की देवी के बारें में जानना चाहा तो वह सभी मौन रह गए। ऐसा इसलिए हुआ था क्यूंकि भगवती का यह स्वरूप तो त्रिदेव यानि की ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश भी नहीं जानते थे तो देवताओं को इसका ज्ञान होना असंभव था। तभी देवी के शरीर से एक तेज उत्पन्न हुआ जिससे देवी दुर्गा की उत्पत्ति हुई। और उन्होंने माता पार्वती को बताया की वह सभी उनकी स्तुति कर रहे हैं। 

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देवी पार्वती के स्वरूप से उत्पन्न होने के कारण उन्हें कोशिकी के नाम से भी जाना जाता है। माँ चामुंडा ने देवताओं की स्तुति को स्वीकार कर शुम्भ-निशुम्भ नामक असुरों का वध किया तथा तीनों लोकों को उसकी पीड़ा से मुक्ति भी दिलाई। देवी चामुंडा विकराल रूप में प्रस्तुत की गई हैं परन्तु वह अपने भक्तों के लिए बहुत दयालु हैं। वह अपने साधकों को किसी प्रकार की पीड़ा का सामना नहीं करने देती। जिस घर में देवी निवास करती हैं, उस घर में किसी प्रकार की दरिद्रता का कोई स्थान नहीं होता है।

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