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Panchsoolak: प्रवेश द्वार की दीवारों के समीप क्यों बनाते हैं पंचसूलक? जानें महत्व

Shaily Prakashशैली प्रकाश Updated 06 Jul 2024 02:18 PM IST
पंचसूलक बनाने का महत्व
पंचसूलक बनाने का महत्व - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Panchsoolak: घर के प्रवेश द्वार के समीप पंचसूलक बनाने का विधान हमारी सनातन संस्कृति में हैं। लेकिन पंचसूलक बनाने का क्या महत्व है इसके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते हैं, तो आइए इस लेख के जरिए जानते हैं कि पंचसूलक क्या है।
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Panchsoolak: पंचसूलक का नाम आपने बहुत ही कम या फिर नहीं भी सुना होगा, लेकिन इसे किसी भी घर के प्रवेश द्वार के आसपास बना हुआ देखा जरूर होगा। इस पंचसूलक की गणना मंगल प्रतीक के अंतर्गत की जाती है। यह बहुत ही शुभ माना जाता है। यह पंचसूलक क्या होता है और क्या है इसका महत्व, आइए जानते हैं विस्तार से।
 

किसे कहते हैं पंचसूलक


खुली हथेली की छाप को पंचसूलक कहते हैं। हाथों की हथेलियों को गीली हल्दी से भिगोया जाता है और उसके बाद उसे दीवारों पर छापा जाता है।
 

पंचसूलक का महत्व


यह पंचसूलक पांच तत्वों, माता लक्ष्मी और बृहस्पति ग्रह का प्रतीक है। हमारे आस-पास जो कुछ है वह, और हमारा शरीर भी इन पांच तत्वों से बना है। जैन धर्म में इसे बेहद महत्व दिया गया है। जैन धर्म का प्रतीक चिन्ह इसी तरह का है। यह बहुत ही शुभ होता है जो नकारात्मक शक्तियों को बाहर ही रोक देता है।
 

मांगलिक कार्यों में भी होता है पंचसूलक का उपयोग


 हिंदुओं के सभी मांगलिक कार्यों में इसका उपयोग होता है। जैसे गृह प्रवेश, जन्म संस्कार, तीज-त्योहार और विवाह आदि के अवसरों पर हल्दी-सनी हथेली छापते हैं।
 

मुख्य द्वार पर हथेली छाप


इस प्रतीक का उपयोग और महत्व शास्त्रों में बताया गया है। मुख्य प्रवेश द्वार पर लगी पंचसूलक की छाप समृद्धि, सुख और शुभता लाती है। सौभाग्य के लिए भी इसकी छाप को लगाया जाता है। द्वार पर और उसके बाहर आसपास की दोनों दीवारों पर इस चिन्ह को लगाने से वास्तुदोष भी दूर होता है और शुभ मंगल होता है। इससे दरिद्रता का नाश भी होता है। ग्रामीण घरों के द्वार पर हल्दी से या गेरुआ रंग से इसे बनाया जाता है।
 

माता लक्ष्मी होती हैं प्रसन्न


मुख्य द्वार की दहलीज पर दोनों ओर हल्दी का हाथ बनाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में उनके आगमन के साथ ही सकारात्मकता का आगमन भी होता है। इसे बनाने से देवी और देवता घर में प्रवेश करते हैं।
 

नववधू गृह प्रवेश


नई दुल्हन को लक्ष्मी समझा जाता है। जब घर में नई दुल्हन का प्रवेश होता है तो पहले वह मुख्य द्वार पर अपने हाथों से हल्दी का छाप छोड़ती है। हल्दी माता लक्ष्मी का प्रतीक और बृहस्पति ग्रह का कारक है। माता लक्ष्मी जहां धन-समृद्धि घर में लाती हैं। वहीं, बृहस्पति ग्रह वैवाहिक जीवन में खुशियां लाने का काम करता है। ऐसा करने से सारे कष्ट भी दूर होते हैं। इसलिए लोग शादी के बाद ग्रह के सकारात्मक प्रभाव को पाने के लिए ऐसा करते हैं। यह भी मान्यता है कि हल्दी भगवान विष्णु की प्रिय सामग्री है, ऐसे में माता लक्ष्मी के साथ विष्णु जी की भी कृपा दृष्टि बनी रहती है। 

तो इस प्रकार से पंचसूचक का यह महत्व है, यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।
 
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