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Home ›   Blogs Hindi ›   Trayodashi Puja: With the effect of Trayodashi Puja, one gets the boon of victory over the enemy.

Trayodashi Puja : त्रयोदशी पूजा के प्रभाव से मिलता है शत्रु पर विजय प्राप्ति का वरदान

my jyotish expert Updated 10 Aug 2023 12:53 PM IST
Trayodashi Puja : त्रयोदशी पूजा के प्रभाव से मिलता है शत्रु पर विजय प्राप्ति का वरदान
Trayodashi Puja : त्रयोदशी पूजा के प्रभाव से मिलता है शत्रु पर विजय प्राप्ति का वरदान - फोटो : google
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धर्म शास्त्रों में तिथियों के अनुसर पूजा को बहुत शुभ फल प्रदान करने वाली विधि माना गया है. हर तिथि का अपना महत्व होता है ओर हर तिथि की अपनी विशेषता होती है. इसके अलावा कई ऐसी तिथियों का वर्णन मिलता है, जिन पर पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है. सावन माह के समय आने वाली प्रत्येक तिथि पर शिव पूजन अत्यंत ही शुभदायी होता है तथा इन्हीं तिथियों में से एक है त्रयोदशी तिथि, इस दिन महादेव की पूजा का अत्यंत विशेष फल जातक को प्राप्त होता है. अधिक मास के सावन मास पर आने वाली त्रयोदशी के द्वारा भक्त को पुण्य फलों की प्राप्त होती है. यह तिथि जिस दिन पड़ती है उस दिन के देवता का पूजन भी शुभ फलों में वृद्धि देने वाला होता है. 

लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए इस सावन सोमवार उज्जैन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में कराएं रुद्राभिषेक 04 जुलाई से 31अगस्त 2023

त्रयोदशी से दूर होता है ग्रह दोष का प्रभाव 
इसलिए इस दिन में सोम से रवि तक का दिन तिथि अनुसार नव ग्रहों की पूजा एवं व्रत के लिए अत्यंत ही सकारात्मक फलों को देने वाला माना गया है. मान्यता है कि त्रयोदशी व्रत के प्रभाव से शत्रु पर विजय का वरदान मिलता है और काम बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं. आइए जानते हैं सावन माह में आने वाले त्रयोदशी तिथि व्रत का लाभ एवं महत्व. 
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान का स्मरण करना चाहिए. व्रत और पूजा का संकल्प लेते हुए पूजा आरंभ करनी चाहिए. शाम के समय पूजा के दौरान भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, फूल, धतूरा, गंगाजल, धूप, दीप, गंध आदि चढ़ाना चाहिए. भगवान शिव की आरती करनी चाहिए. अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत समाप्त करना चाहिए. 

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सावन त्रयोदशी से मिलती है शिव कृपा 
शास्त्रों में त्रयोदशी व्रत के समय सुबह एवं शाम दोनों समय की पूजा अति विशेष फल देने वाली होती है. इस तिथि के दिन शाम के समय को भोलेनाथ की पूजा के लिए सबसे अच्छा और पवित्र समय बताया गया है, क्योंकि इस समय महादेव डमरू बजाते हुए प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं तथा भक्तों को सुखों का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. 

शास्त्रों में प्रत्येक त्रयोदशी व्रत का अपना-अपना महत्व है, मान्यता है कि जो लोग प्रदोष व्रत करते हैं उन्हें शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है. अगर विरोधी आपके काम में बाधा बन रहा है या बिना वजह आपको परेशान कर रहा है तो त्रयोदशी व्रत के दिन शाम के समय शिवलिंग का जलाभिषेक करने से इस समस्या से राहत मिल सकती है. 
 
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