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Dol Aashram, Uttarakhand: दुनिया का सबसे बड़ा श्रीयंत्र स्थापित है यहां, यह  है उत्तराखंड का पांचवा धाम। 

Kashish kashishmahajan7102@gmail.comkashish Updated 12 Mar 2022 03:26 PM IST
दुनिया का सबसे बड़ा श्रीयंत्र स्थापित है यहां, यह  है उत्तराखंड का पांचवा धाम। 
दुनिया का सबसे बड़ा श्रीयंत्र स्थापित है यहां, यह  है उत्तराखंड का पांचवा धाम।  - फोटो : google

दुनिया का सबसे बड़ा श्रीयंत्र स्थापित है यहां, यह  है उत्तराखंड का पांचवा धाम। 


यू तो उत्तराखण्ड में अनेकों मंदिर हैं जिसमे चार धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री है। उत्तराखंड में अनेकों मंदिर है जिसके कारण उत्तराखण्ड को देवभूमि भी कहा जाता है। जिसमे से कई मंदिर कुछ खास कारणों से प्रसिद्ध है, या कह सकते हैं भक्तों की उनमें विशेष आस्था है। लेकिन पांच धाम मंदिर अल्मोड़ा के पहाड़ियों और जंगलों के बीच डोल आश्रम में स्थित है। इस मंदिर की अपनी एक विशेष पहचान है इस मंदिर में दुनिया का सबसे भारी श्रीयंत्र स्थापित है। जिसके कारण यह मंदिर अपने आप में भक्तों के बीच खासा प्रसिद्ध है। दूर दूर से भक्त यहाँ पर दर्शन करने के लिए आते हैं। आज हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कई जानकारी देंगे। कहा है यह मंदिर? क्यों प्रसिद्ध है यह मंदिर? इस स्थान तक कैसे पहुँचा जा सकता है? क्यों कहते है इस मंदिर को पंचधाम? आप भी जानना चाहते है यह सब तो इस लेख को अंत तक ध्यान से पढ़े।

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यह मंदिर अल्मोड़ा के लमगड़ा ब्लॉक में डोल आश्रम में स्थित है। इस इस मंदिर में पांच देवी देवताओं भगवान गणेश, विष्णु, शिव, शक्ति सूर्य और त्रिपुरारी सुंदरी का मंदिर स्थापित है। इसी कारण से इस मंदिर को पंचधाम या पांचवा धाम भी कहा जाता है।
साल 2018 में यहाँ पर दुनिया के सबसे भारी श्रीयंत्र की स्थापना हुई थी। यह श्रीयंत्र अष्टधातु से निर्मित है। जिसकी चौड़ाई लगभग 3.5 फुट है और वजन डेढ़ टन (150 क्विंटल) है। 

यह मंदिर न सिर्फ हिंदुओं की आस्था के कारण भारत में प्रसिद्ध है। बल्कि देश विदेश के छात्रों के बीच भी प्रसिद्ध है। यहां पर 110 छात्रों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है। यहाँ पर भारत के विभिन्न राज्यों से लोग पढ़ने आते हैं इतना ही नहीं पड़ोसी देशों से भी छात्र यहाँ शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। क्योंकि यहाँ पर न सिर्फ संस्कृत भाषा की पढ़ाई कराई जाती है बल्कि अंग्रेजी और कंप्यूटर की भी शिक्षा दी जाती है।

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इस मंदिर का निर्माण सन 1991 में हुआ था। यह मंदिर लगभग आठ एकड़ में फैला हुआ है। इस आश्रम के प्रांगड़ में लाइब्रेरी है जिसमें लगभग 10,000 से अधिक किताबें मौजूद हैं। डोल आश्रम के प्रांगण में पांच मंदिर है, संस्कृत विद्यालय है और साथ ही एक अस्पताल भी स्थित है। यहां पर श्रद्धालुओं के ठहरने की भी अच्छी व्यवस्था है। कहते है इस पीठम में 500 से अधिक लोग एकसाथ बैठकर ध्यान लगा सकते हैं। 

यदि आप भी मंदिर जाना चाहते हैं तो आप रोड और हवाई दोनों ही मार्ग से जा सकते हैं इसके लिए आपको हल्द्वानी तक के लिए बस या फिर ट्रेन लेनी होगी यदि आप हवाई यात्रा से जाना चाहते हैं तो पंतनगर इसके सबसे करीबी एयरपोर्ट है हल्द्वानी से डोल आश्रम 83 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। डोल आश्रम पहुँचने के लिए आप बस या टैक्सी भी ले सकते हैं।

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