The Effects Of Half-and-half Are Overcome By Worshiping Shani Dev - शनि देव की आराधना से दूर हो जाते हैं साढ़े साती के प्रभाव - Myjyotish News Live
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शनि देव की आराधना से दूर हो जाते हैं साढ़े साती के प्रभाव

MyJyotish Expert Updated 02 May 2020 08:39 PM IST
The effects of half-and-half are overcome by worshiping Shani Dev
शनिदेव सूर्यदेव की पत्नी छाया के पुत्र हैं। वह न्याय के देव माने जाते हैं। उन्हें बहुत ही कठोर समझा जाता है परन्तु वह ऐसे हैं नहीं अर्थात वह व्यक्ति को केवल उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। जो जैसे कार्य करता है उसे वैसे ही फल की प्राप्ति भी होती है। शनि ग्रह के दुष्प्रभाव अन्य ग्रहों से अधिक मजबूत माने जाते हैं अर्थात यदि उनकी कुदृष्टि किसी व्यक्ति पर पड़ जाए तो उससे बचना असंभव हो जाता है। शनिदेव अन्य ग्रहों में सर्वोपरि हैं। ज्यादातर लोग उन्हें एक कठोर देव के रूप में जानते हैं परन्तु ऐसा नहीं है समय आने पर शनिदेव व्यक्ति को उच्चतम फल भी प्रदान करते हैं।

शास्त्रो में शनिदेव को अनेक नामों से सम्बोधित किया गया है, जैसे मन्दगामी, सूर्य-पुत्र, शनिश्चर और छायापुत्र आदि। शनि के दुष्प्रभावों से बचने के लिए व्यक्ति अनेकों प्रयास करता है। परन्तु उसका कर्म सही नहीं होते तो उसे शनि ग्रह के प्रकोप को सहना पड़ता है। परन्तु उनके भक्त उन्हें प्रसन्न रखे तो वह उन पर अपना शुभ आशीर्वाद बनाए रखते हैं। माना जाता है की सरसों के तेल से शनिदेव का अभिषेक करने से व्यक्ति के जीवन में  शनि ग्रह के दोष की समाप्ति होती है। 

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एक कथन के अनुसार शनि देव का तेल अभिषेक करने की प्रथा हनुमान जी ने शुरू की थी।  जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे थे। तब उन्होंने वह अनेकों देवताओं व ऋषियों को कैद देखा था। जब उन्होंने लंका को जलाया तब कैदी आजाद हो गए। उन देवताओं में शनि देव भी थे जिन्हें कारागार में उल्टा लटकाया गया था। जब हनुमान जी के कारण वह आजाद हुए, उल्टा लटकने के कारण उनके शरीर में बहुत दर्द हो रहा था। यह देख हनुमान जी ने उनकी सरसों के तेल से मालिश की थी और उनके शरीर का सारा कष्ट दूर कर दिया था। तभी से शनि देव को तेल अभिषेक करके प्रसन्न करना बहुत ही शुभ माना जाने लगा।

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