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Home ›   Blogs Hindi ›   Surya Dev is the father of Shani Dev, yet there is bitterness between the two, know why

Shani and Surya: शनि देव के पिता हैं सूर्य देव, फिर रखते हैं 36 का आंकड़ा, जानें क्यों

Nisha Thapaनिशा थापा Updated 22 Jun 2024 04:10 PM IST
सूर्य और शनि देव के बीच क्यों है दूरियां?
सूर्य और शनि देव के बीच क्यों है दूरियां? - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Shani and Surya: शनि और सूर्य जब एक साथ आते हैं, तो जातक को अच्छा फल प्राप्त नहीं होता है। लेकिन ऐसा क्यों है? इसके पीछे कुछ पौराणिक कथा छुपी हुई है, तो आइए इस लेख में जानते हैं कि ऐसा क्यों है।
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Shani and Surya: शनि देव, नवग्रहों की सूची में एक ऐसे देव हैं, जो कर्मों के अनुसार जातक को फल प्रदान करते हैं, यानि कि यदि आपके कर्म अच्छे और सकारात्मक हैं, तो आपको शुभ फल प्राप्त होगा। वहीं दूसरी तरफ यदि कोई जातक नीच कर्म करता है तो उसे उसी के अनुसार फल मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शनि देव, सूर्य देव के पुत्र हैं लेकिन फिर भी उन दोनों के बीच बहुत दूरियां हैं। इसी वजह से देखा गया है कि जब भी कुंड़ली में सूर्य और शनि ग्रह एक साथ आते हैं तो जातक के जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तो आइए इस लेख में जानते हैं कि ऐसा क्यों है।
 

शनि सूर्य के बीच क्यों हैं कटू संबंध (Shani and Surya Relation)


शनि देव, सूर्य देव के पुत्र हैं, प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव का विवाह दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ था और विवाह के बाद उनकी 3 संतानें हुई और उनका नाम था मनु, यमराज, और यमुना। सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता है और वह पूरे संसार को रोशनी प्रदान करते हैं, लेकिन उनकी पत्नी संज्ञा उनके इस तेज से बेहद परेशान रहती थीं, इस समस्या को हल करने के लिए वह अपने पिता दक्ष के पास गईं, लेकिन उनके पिता जी समस्या का समाधान नहीं बता पाए। वह फिर वापिस सूर्य लोक ही चली गईं, लेकिन फिर उन्होंने समस्या के समाधान के लिए सूर्य देव से दूर रहने का विचार किया। हालांकि वह अपनी संतानों को अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी,  इसलिए वह अपनी छाया स्वर्णा रूप को वहां पर छोड़ कर चली गईं। छाया होने के कारण उन पर सूर्य देव का प्रभाव बिल्कुल भी नहीं पड़ा। वक्त बीतता गया और इसके साथ ही उन्हें फिर से तीन संताने प्राप्त हुईं, जिनके नाम थे, ताप्ति, भद्रा और शनि। माता छाया के गुण शनि देव में आने के कारण उनके गुण शनि में आ गए और फिर सूर्य देव को लगता है कि शनि उनके पुत्र नहीं हैं और जैसे ही शनि की दृष्टि सूर्य देव पर पड़ती है, तो उनका स्वर्ण के समान रंग बेहद काला हो जाता है। वह इस समस्या के समाधान के लिए अपना शापित चेहरा लेकर भगवान शिव के पास जाते हैं और भगवान शिव उन्हें संपूर्ण घटना के बारे में बताते हैं कि शनि देव उनके ही पुत्र हैं और उनका रंग इतना अधिक गहरा क्यों है। फिर सूर्य देव को अपनी गलती का अहसास तो होता है, लेकिन तब तक बहुत विलंब हो चुका होता है क्योंकि शनि देव इस बात से बहुत आघात हो जाते हैं और इसलिए ही सूर्य और शनि दोनों के संबंधों में बहुत खटास होती है। 

इसलिए आपने कभी ध्यान दिया हो तो जब भी दोनों ग्रह किसी जातक की कुंडली में एक साथ आ जाते हैं, तो उसके लिए शुभ नहीं माना जाता है। हालांकि कुछ स्थितियों में ये युति शुभ फल भी देती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस दौरान वह कौन से नक्षत्र और राशि में है। लेकिन इसकी जानकारी केवल ज्योतिष या वैदिक पंडित ही बता सकते हैं। यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।

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