myjyotish

9818015458

   whatsapp

8595527216

Whatsup
  • Login

  • Cart

  • wallet

    Wallet

Home ›   Blogs Hindi ›   Solar Eclipse 21 June 2020: Surya Grahan (सूर्य ग्रहण) Date, Importance, All You Need to Know About

सूर्य ग्रहण 2020 : जाने सूर्य ग्रहण की तिथि, महत्व और इसके के बारे में सब कुछ

Myjyotish Expert Updated 19 Jun 2020 08:28 PM IST
सूर्य ग्रहण की तिथि एवं महत्व
सूर्य ग्रहण की तिथि एवं महत्व - फोटो : Myjyotish
सूर्य ग्रहण 2020 : सूर्य ग्रहण की स्थिति तब उत्पन्न होती है , जब चद्रमा , पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है। जिस समय सूर्य द्वारा बीच का यह मार्ग पूर्ण किया जा रहा होता है , उस समय पृथ्वी से देखने पर सूर्य का स्वरुप पूर्ण या आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा ढका हुआ प्रतीत होता है। यह इस वर्ष का तीसरा ग्रहण है जो कि 21 जून , 2020 रविवार को पूरे भारत में देखा जाएगा। यह ग्रहण सुबह 9 बजकर 15 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 03 मिनट तक दिखाई देगा। जाने अपनी समस्याओं से जुड़ें समाधान भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों के माध्यम से

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक खगोलीय घटना मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण का प्रत्येक व्यक्ति के राशि पर बहुत प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण ग्रहण के बाद स्नान एवं दान करना बहुत अहम माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के 12 घंटे पहले ही सूतक काल प्रारम्भ हो जाता है जिसके कारण मंदिरों के पट भी बंद कर दिए जातें है।

 सूर्य ग्रहण के अवसर पर कराएं सामूहिक महामृत्युंजय मंत्रों का जाप - महामृत्युंजय मंदिर , वाराणसी

सूर्य ग्रहण का व्यक्तिगत रूप में बहुत प्रभाव रहता है। सूर्य और चंद्र मनुष्य जीवन का महत्वपूर्ण भाग है। एक से व्यक्ति को ऊर्जा प्रदान होती है तो वही दूसरा पृथ्वी का एक मात्र उपग्रह के रूप में जाना जाता है। मत्सय पुराण के अनुसार ग्रहण का सम्बन्ध राहु और केतु के अमृत पान की कथा से बताया गया है। कथा के अनुसार स्वरभानु नामक राक्षस अपना रूप परिवर्तन करके सूर्य और चन्द्रमा के मध्य आकर बैठ गया था।

माय ज्योतिष के अनुभवी ज्योतिषाचार्यों द्वारा पाएं जीवन से जुड़ी विभिन्न परेशानियों का सटीक निवारण

जब दोनों देवताओं ने जाना की वह वास्तव में कौन है तो उन्होंने उसकी शिखायत नारायण भगवान विष्णु से की , कथन सुनते ही विष्णु जी ने अपने चक्र से उस राक्षस का सिर धड़ से अलग कर दिया। जिसके कारण वह शीश राहु और धड़ केतु के नाम से जाने गए। उसी काल से जब कभी भी सूर्य और चन्द्रमा एक दूसरे के निकट आतें है तो संसार को ग्रहण की स्थिति दिखाई पड़ती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूतक यानि ग्रहण काल में बहुत सी सावधानियों को बरतना पड़ता है। जैसे की ग्रहण काल के समय तेल लगाना , भोजन करना , जल पीना , मल - मूत्र का त्याग करना आदि कार्यों की मनाई होती है।

यह भी पढ़े :-

क्या 21 जून का सूर्यग्रहण विनाशकारी होगा ?

क्या होता है मारकेश ? और जन्म कुंडली में क्यों है इसका अहम स्थान ?

जन्म कुंडली से जाने मान - सम्मान पर विश्लेषण

 
  • 100% Authentic
  • Payment Protection
  • Privacy Protection
  • Help & Support

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms and Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
X