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भगवान शिव के साथ करें भगवान गणेश को भी प्रसन्न विघ्नहर्ता के पूजन से दूर होंगे सब कष्ट

Myjyotish expert Updated 11 Aug 2021 01:41 PM IST
Vinayak chaturthi
Vinayak chaturthi - फोटो : google
भारत एक ऐसा देश है जहां त्यौहार का आना जाना लगा ही रहता है। हमारे यहाँ प्रत्येक त्यौहार , पूजा पाठ और पर्व का अलग ही महत्व है। जैसे अभी सावन का महीना चल रहा है। आपको बता दें कि सावन का माह भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय होता है। सावन के मास में भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। इसी महीने ही हरियाली तीज से लेकर नाग पंचमी , सभी त्यौहार मनाये जाते है। सावन मास की पूर्णिमा को ही राखी का पर्व भी मनाया जाता है। इन सभी त्यौहारों के बीच  संकष्टी चतुर्थी भी मनाई जाती है। आपको बता दे कि हिन्दू पंचाग के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष के चतुर्थ तिथि को यह संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन विशेषकर भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ज्योतिषों की माने तो भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है और संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना बहुत लाभकारी सिद्ध होती है। इस बार गणेश संकष्टी चतुर्थी की तिथि 12 अगस्त 2021 है। इनके पूजन से सबंधित कुछ विधि पुरोहितों द्वारा बताई गई है। आइये जानते है कि हमें किस प्रकार भगवान लम्बोदर की आराधना करने से लाभ होगा।  

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ज्योतिष शास्त्र में इस पूजन का बहुत महत्व बताया गया है। सावन मास में जिस प्रकार भगवान शिव की उपासना हमें कष्टों से छुटकारा दिलाती है ,उसी प्रकार भगवान विघ्नहर्ता की पूजा अर्चना से हमारे जीवन में संकट कम होने लगते है। वैसे भी भगवान गणेश का पूजन हर शुभ कार्य में सबसे पहले किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणपति अपने भक्तों से शीघ्र ही प्रसन हो जाते है। भगवान गणेश बेहद सरल एवं सहज स्वाभाव के माने जाते है। भगवान गणेश का पूजन सामान्यतः चतुर्थी तिथि को ही किया जाता है। सावन के महीने में इसे सकंष्टी चतुर्थी भी कहते है। इस पूजन का अपना अलग विधि विधान है।

पुरोहितों के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन सूर्य उदय से पूर्व ही  उठकर स्नान कर लेना चाहिए। पूजन के नियमानुसर, विधिवत तरीके से  संकष्टी पूजन का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद अपने  पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लेना चाहिए।  पूजा की  चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछा देने के बाद उस चौकी पर भगवान गजानन की मूर्ति स्थापित करें। अगर मूर्ति उपलब्ध ना हो तो ऐसी स्तिथि में भगवान गणेश की फोटो भी चौकी पर स्थापित कर सकते है।

इसके बाद भगवान गणेश के स्वरुप के समक्ष  दीप जलाएं। फिर भगवान गणेश को फल, फूल, दूर्वा ,जनेऊ ,पान ,सुपारी, नारयिल और मिष्ठान अर्पित करें। अगर सम्भव हो सके तो भगवान गणेश का प्रिय मोदक जरूर चढ़ाये। इसके पश्चात भगवान गणेश का स्तुति गान अवश्य करें। जानकारों की माने तो
 पूजन के समय  ऊं गं गणपतयै नम: का जाप करना बेहद फलदायी होता है। पूजन के समय इस मन्त्र का जाप करना ना भूले। इस मन्त्र का जाप अवश्य ही करें , ज्योतिषों के अनुसार यह मन्त्र बहुत लाभकारी सिद्ध होता है पूजा करने वाले व्यक्ति के लिए।
इसके अलावा भगवान गणपति  को प्रसन्न करने के लिए पूजन कर्ता  श्री गणेश स्तोत्रम का पाठ भी जरूर करें।

विनायक चतुर्थी का महत्व

जैसा की भगवान गणेश का नाम भी है  विघ्नहर्ता, तो गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन गजानन के पूजन से हमारे जीवन के सभी कष्ट दूर होते है। इस व्रत को करने से तथा नियमनुसार पूजा पाठ करने से घर में सुख और समृद्धि का वास होता है। घर से नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की ही पूजा अर्चना होनी चाहिए , इससे उस कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती है। जीवन में सुख शांति के लिए भगवान गणेश का पूजन अवश्य करना चाहिए गणेश संकष्टी चतुर्थी को। भगवान विघ्नहर्ता अपने भक्तों के जीवन से हर संकट , परेशानी एवं विघ्न को हर लेते है, तथा उन्हें बल,बुद्धि,सुख समृद्धि प्रदान करते है।

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