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जानिए पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म और पिंडदान का ये विशेष महत्व

My jyotish expert Updated 20 Sep 2021 05:47 PM IST
Shradh pitra paksh significance
Shradh pitra paksh significance - फोटो : google photo
जैसा कि हम सब जानते हैं कि पितृपक्ष शुरू हो गया है और सभी अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करना शुरू कर दिए हैं। हम जानते हैं की पूर्वजों के लिए तर्पण, भोज और पिंडदान पूरे विधि विधान से नदी के किनारे किया जाता है। देश में श्राद्ध करने के लिए कुछ खास स्थान माने गए हैं।

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जिनमें से मुख्य स्थान इस प्रकार हैं

• लोहानगर: इसे लोहार्गल कहते हैं। यह नगर राजस्थान में पड़ता है।यहां पांडवों ने अपने पूर्वजों के लिए सुरजकुंड में मुक्ति का कार्य किया था। यहां खासकर अस्थि विसर्जन होता है।
• मध्यमेश्वर(उत्तराखंड)- केदारधाम पर स्थित इस तीर्थ पर भगवान शंकर की नाभि प्रतिष्ठित है। यह तीर्थ पंच केदार में शामिल द्वितीय केदार है।
•रूद्रनाथ - यह तीर्थ पंच केदार में से एक तुंगनाथ के समीप स्थित है।
•बद्रीनाथ (ब्रह्म कपाल शिला) - अलखनन्दा नदी के किनारे ब्रह्म कपाल (कपाल मोचन) तीर्थ है। यहां पिण्डदान किया जाता है।
•बद्रीनाथ (ब्रह्म कपाल शिला) - अलखनन्दा नदी के किनारे ब्रह्म कपाल (कपाल मोचन) तीर्थ है। यहां पिण्डदान किया जाता है।
•हरिद्वार (हरि की पैड़ी) - यहां सप्त गंगा, त्रि-गंगा और शक्रावर्त में विधिपूर्वक देव ऋषि एवं पितृ तर्पण करने वाला पुण्यलोक में प्रतिष्ठित होता है। तदन्तर कनखल में पवित्र स्नान किया जाता है।
• कुरू क्षेत्र (पेहेवा) - पंजाब के अम्बाला जिले में सरस्वती के दाहिने तट पर स्थित इस तीर्थ को अधिक पुण्यमय माना जाता है।
• धौतपाप (हत्याहरण तीर्थ) - निमिषारण्य से लगभग 13 किमी दूर गोमती नदी के किनारे स्थित इस तीर्थ पर स्नान एवं श्राद्ध तर्पण करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
• बिठूर (ब्रह्मावर्त) - कानपुर के निकट बिठूर नामक स्थान है, यहां गंगा जी के कई घाटों में प्रमुख ब्रह्मा घाट है।
• •प्रयागराज(इलाहाबाद)- यहां श्राद्ध एवं पितृ तर्पण करने से बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है

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