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जानिए शारदीय नवरात्रि और मां दुर्गा के अवतार से जुड़ी ये ज़रूरी बातें

My Jyotish Expert Updated 10 Oct 2021 06:34 PM IST
navratri 2021
navratri 2021 - फोटो : google
इस वर्ष 2021 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 7 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2021 तक है। जानकारी देते हैं कि शारदी नवरात्रि की शुरुआत अश्वनी मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और दशहरा पर समाप्त हो जाती है।नवरात्रि वर्ष में चार बार मनाई जाती है। दो बार गुप्त नवरात्रि और दो बार मुख्य रूप से नवरात्रि का त्यौहार आता है। इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि होती हैं इसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है। नवरात्रि का मतलब होता है की 9 दिन और रात तक चलने वाली मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना होती है। नवरात्रि के पर्व को काफी पवित्र माना जाता है और इन दिनों कोई भी शुभ कार्य करना काफी अच्छा होता है। शास्त्रों में नवरात्रि को विशेष पर्व माना गया है और काफी महत्व दिया गया है इसलिए व्यक्ति नवरात्रि का बेसब्री से इंतजार करते हैं।


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शारदीय नवरात्रि के दौरान अलग-अलग दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। नवरात्रि में मां दुर्गा की साधना काफी फलदाई मानी जाती है और मां दुर्गा महिषासुर नामक दैत्य का वध करने के लिए प्रकट हुई थी माना जाता है उनमें सभी देवताओं की शक्ति समाहित थी।
किया गया है इस संबंध में दुर्गा सप्तशती में व्याख्यान किया है और इसके अनुसार महिषासुर को मारने के लिए मां दुर्गा की उत्पत्ति सभी देवताओं की तेज से हुई थी यह भी बताया गया है। दुर्गा माता ने देवताओं की इन शक्तियों के बल पर मैसेज सुर का वध करके संसार को उसके आतंक से हमेशा हमेशा के लिए मुख्य करवा दिया था।


 •देवताओं के द्वारा कैसे हुई दुर्गा जी अवतरित

दुर्गा सप्तशती में विवरण के अनुसार दुर्गा जी का मुख शिवजी के द्वारा बना हुआ था। इसके बाद विष्णु जी ने अपने तेज से उन्हें भुजाएं प्रदान की। सूर्य के तेज से दुर्गा जी के पैरों की उंगलियां और चंद्रमा के तेज से वृक्ष स्थल प्रकट हुआ। देवी दुर्गा की नाक कुबेर के तेज से बनी एवं दक्ष प्रजापति के तेज से दांत बने एवं संध्या के तेज से प्रकट ही बनी और वायु के तेज से कान बने। दुर्गा जी के केस यमराज के तेज से बनी और उनके नेत्रों ने अग्नि के तेज से आकार लिया था।


•महिषासुर का वध करने के लिए देवताओं के द्वारा दी गई शक्तियां

महसासुर का वध करने के लिए दुर्गा रूप में अवतरित हुई देवी को सभी देवताओं ने शक्तियां भी दी थी। दुर्गा सप्तशती के अनुसार भगवान विष्णु ने मां दुर्गा सुदर्शन चक्र दीया जब भगवान शिव ने त्रिशूल भेंट किया और इसी प्रकार मां दुर्गा को देवराज इंद्र ने वज्र और यमराज ने काल दंड और वही वरुण देव ने शंख और पवन देव ने धनुष बाण प्रदान किए।
 

•देवताओं के द्वारा दी गई भेंट

सभी देवताओं ने दुर्गा जी को सुसज्जित भी किया और इसके लिए समुद्र देव ने उन्हें आभूषण भेंट भी किए। दक्षिणी देवी दुर्गा को स्फटिक की माला दी। सरोवर ने अक्षय पुष्पमाला प्रदान की और कुबेर देव ने दुर्गा जी को शहद का दिव्य पात्र प्रदान किया था। मां दुर्गा जिस शेर की सवारी करती हैं उन्हें पर्वतराज हिमालय ने भेंट स्वरूप प्रदान किया था ऐसा दुर्गा सप्तशती में बताया गया है।


•शास्त्रों के द्वारा कैसे अवतार लिया दुर्गा मां ने

तो हम कह रहे हैं शास्त्रों में उल्लेख है कि मानव नहीं बल्कि देवता भी असुरों के अत्याचार से परेशान हो गए थे और तब देवता ब्रह्मा जी के पास गए और उनसे समर्थन मांगा। तत्पश्चात ब्रह्मा जी ने बताया कि दत्तराज का वध एक कुंवारी कन्या के हाथ ही हो सकता है और इसके अलावा दत्तराज का अंत कोई नहीं कर सकता। इसके बाद सभी देवताओं ने मिलकर अपने तेज को एक जगह समाहित किया और इस शक्ति से मां दुर्गा का जन्म हुआ। 


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