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Shani Jayanti 2022: शनि जयंती में जानें शनि से जुड़े रहस्य

MyJyotish Expert Updated 30 May 2022 01:51 PM IST
शनि जयंती में जानें शनि से जुड़े रहस्य  
शनि जयंती में जानें शनि से जुड़े रहस्य   - फोटो : google

शनि जयंती में जानें शनि से जुड़े रहस्य  

 
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है. शनि देव को गंभीर और भय प्रदान करने वाले ग्रह शनि देव के रुप में भी माना जाता है. शनि देव के जन्म से लेकर उनके कर्माधिकारी बनने तक की कथाएं पुराणों में वर्णिता है. प्रत्येक कथा के कई संदर्भ मौजूद हैं, कथा का स्वरुप भिन्न भिन्न हो सकता है किंतु सार तत्व में समानता स्पष्ट रुप से दिखाई देती है. शनि देव का जन्म, शनि का अपने पिता से संघर्ष, शनि देव का एक पैर का खरब होना, शनि देव की दृष्टि इत्यादि से संब्म्धित कथाओं में उनका जीवन ओर संघर्ष स्पष्ट रुप से दिखाई देता है. आईये जते हैं शनि जयंती के अवसर पर शनि देव से जुड़ी कुछ रोचक घटनाओं के बारे में 

शनि यम के भाई भी हैं और न्याय के देवता माने जाते हैं. कुछ लोग शनि को लोगों के अच्छे और बुरे कर्मों के फल बांटने के लिए भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं. सूर्य देव और संध्या(संज्ञा) के विवाह से तीन संतान होती हैं वैवस्वत मनु, यम और यमी. संध्या जब सूर्य देव का तेज सह नहीम पाई तों वह उन्हें छोड़ कर चली जाती हैं वैसे संध्या समर्पित प्रतिबद्ध पत्नी थी किंतु अपने पति सूर्य के तेज को सह पाना उनके लिए असहय था. ऎसे में संध्या देव ने छाया की रचना की, जो अपनी छाया से बनाई, जो पूरी तरह से हर पहलू से मिलती जुलती थी. संध्या ने अपने तीनों बच्चों को छाया को सौंप दिया और उसकी अनुपस्थिति में सूर्य देव की देखभाल करने को कहा.

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संध्या ने तपस्या की अपने पति सूर्य देव की गर्मी से बचने के लिए संध्या वहां से चलीं गईं और अपने पिता के पास आ गई. उसके पिता दक्ष ने उसे अपने पति के पास वापस जाने की सलाह दी. हालाँकि, संध्या को यह विचार पसंद नहीं आया और इसलिए उन्होंने एक घोड़े का रूप धारण किया और घोर तपस्या करने के लिए घने जंगल में चली गईं. शनि देव का जन्म छाया से हुआ जो सूर्य देव के ज्ञान के बिना संध्या की भूमिका निभा रहीं थी, सूर्य से उन्हें तीन संतान प्राप्त होती हैं मनु, शनि और ताप्ती है. जब शनि अपने गर्भ में थे, तब वह अपने पति की सेवा में पूरी तरह से खोई हुई थीं कि सूर्य देव की गर्मी के कारण गर्भ में पल रहा बच्चा काला हो गया. इसलिए जन्म के समय शनि पूर्ण रूप से काले थे.

शनि के जन्म पर, सूर्य देव ने अपने पुत्र को उत्सुकता से देखा किंतु उनके काले रंग से निराश हो गए. उन्हें यह भी संदेह था कि क्या शनि उनसे पैदा हुए थे. अपने पिता पर शनि की पहली नज़र ने सूर्य देव को ग्रहण काल में ले लिया और उन्होंने इसे अपशकुन माना. वास्तव में, अपने पिता की उदासीनता पर क्रोधित होकर, शनि ने अपने पिता को श्राप दिया कि वह भी काले रंग का हो जाएगा जो सच हो गया. तो, उनके जन्म से ही, सूर्य देव और शनि के बीच एक गंभीर गलतफहमी थी.

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शनि की माता छाया भगवान शिव की अनन्य भक्त थीं. एक बार वह भगवान शिव को अर्पित करने के लिए भोजन बना रही थी. एक छोटे बच्चे के रूप में, शनि बहुत भूखे थे और चाहते थे कि भोजन पहले उन्हें परोसा जाए. छाया ने कहा कि वह शिव की पूजा करने के बाद ही वह खा सकते हैं. शनि ने क्रोधित होकर अपनी माता को लात मारी दी इस पाप के कारण शनि देव एक पैर से लंगड़े हो जाते हैं.

शनि देव पर शिव की कृपा है जब शनि अपनी माता के गर्भ में थे, छाया देवी शिव की भक्तिपूर्वक पूजा कर रही थीं. इसलिए, शनि ने भी भगवान शिव के प्रति भक्ति विकसित की. जब शनि का जन्म हुआ और उनके पिता को उनके जन्म पर संदेह हुआ, तो भगवान शिव सूर्य देव के सामने प्रकट हुए और शनि के काले होने का कारण स्पष्ट किया. तब पिता और पुत्र दोनों ने एक दूसरे के लिए अच्छी समझ विकसित की. शनि की भक्ति से प्रसन्न होकर, शिव ने लोगों के कार्यों के लिए आशिर्वाद दिया तथा कर्मों को बांटने के लिए उन्हें न्याय का देवता बना दिया
 

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