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शनि जयंती 2020 : क्यों मनाई जाती है शनि जयंती ?

MyJyotish Expert Updated 22 May 2020 11:55 AM IST
Shani Jayanti 2020: Why Shani Jayanti is celebrated?
शनि जयंती का मंगल दिन शनि देव के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। शनि देव के जन्मोत्सव को 22 मई 2020 शुक्रवार के दिन पूर्ण भारत में मनाया जाएगा। शनि के कुप्रभावों के विषय में सभी परिचित है। उनकी दशा को झेलना व्यक्ति के लिए कदापि संभव नहीं होता है। शनि देव प्रकाश के देव सूर्य के पुत्र है। उनकी माता का नाम छाया है जिन्होंने शनि देव को महादेव के आशीर्वाद से अध्भुत शक्ति का आशीष प्रदान किया था। शनि नव ग्रहों में सर्वश्रेष्ठ है , उनके आशीर्वाद से व्यक्ति के जीवन में दुःख एवं व्यथा की समाप्ति होती है। शनि देव ग्रह के रूप में शत्रु माने जातें है क्यूंकि उनके दुष्प्रभावों से व्यक्ति का जीवन विपदाओं से भर जाता है। उसके जीवन की कोई भी मंज़िल उसे प्राप्त नहीं होती है। वह सदैव असंतुष्टता से घिरा हुआ रहता है।

शनि जयंती के अवसर पर शनि साढ़े साती और ढैय्या से बचने के लिए शनि धाम कोकिलावन में कराएं तेल अभिषेक : 22-मई-2020 शनि को अशुभ माना जाता है क्यूंकि उनके कुप्रभावों से व्यक्ति को असंख्य काल तक दुःख भोगना पड़ता है। शनि बहुत शक्तिशाली है , उनकी दृष्टि यदि किसी पर पड़ जाएं तो उसका सर्वनाश कोई नहीं रोक सकता। इसलिए शनि को खुश रखना अनिवार्य होता है। सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है की शनि की शुभ कृपा आपके साथ हो और आपको किसी प्रकार की बाधाओं का सामना न करना पड़ें। शनि जयंती शनि देव को आसानी से प्रसन्न करने के पथ की ओर ले जाने वाला श्रोत है। इस दिन शनि बहुत प्रसन्न होतें है। इस दिन उनसे मांगी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। यदि किसी पर पहले से ही शनि के प्रकोप की दशा चल रही है तो वह शनि जयंती के दिन पूजा - अर्चना करने से दूर हो जाती है।

शनि जयंती के शुभ अवसर पर कोकिलावन शनि धाम में चढ़ाएं 11 किलों तेल और पाएं अष्टम शनि ,शनि की ढैय्या एवं साढ़े - साती के प्रकोप से छुटकारा : 22-मई-2020

शनि देव की आरधना के लिए पश्चिम दिशा की और मुख करके मनोकामना करनी चाहिए। उन्हें लाल रंग के वस्तु एवं फल अर्पण नहीं करने चाहिए। बेसन के लड्डू शनि देव को भोग में लगाना बहुत फल दायक होता है। इस दिन कुत्तें को सरसों का तेल लगाकर रोटी खिलाना चाहिए। काला रंग शनि देव को अतिप्रिय है इसलिए इस दिन शनि देव को प्रसन्न करने हेतु काले रंग के पशु - पक्षियों को भोजन जरूर करवाना चाहिए। शनि दण्डकारी होने के साथ -साथ न्याय प्रिय भी है , इसलिए उनके समक्ष पूर्ण श्रद्धा एवं निष्ठा से भक्ति करने वाले व्यक्ति का वह उद्धार करतें है। उसके दरिद्रता एवं कष्टों को दूरकर सुख - समृद्धि से परिपूर्ण जीवन प्रदान करतें है। शनि की शरण में रहने वालों को किसी प्रकार की हानि नहीं होती है।

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