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शनि जयंती 2020 : शनि देव को तेल अर्पण करने से क्या होता है ?

MyJyotish Expert Updated 18 May 2020 12:49 PM IST
Shani Jayanti 2020: What happens by offering oil to Shani Dev?
शनि जयंती भारत में हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। इस वर्ष शनि जयंती 22 मई 2020 को मनाई जाएगी। सूर्य देव पुत्र शनि नव ग्रहों में न्यायधीश के रूप में जाने जातें है। शनि ग्रह से जुड़ी अनेकों गाथाएं प्राचीन काल से ही पुराणों से प्राप्त होती आ रही है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार नवग्रहों में शनि सबसे खतरनाक ग्रह माने जातें है। परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं है वह व्यक्ति के कर्म के अनुसार ही उसे फल प्रदान करते है। यदि उसके कर्म अच्छे हुए तो उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है तथा यदि वह कर्म से अच्छा नहीं रहता तो शनि देव उसे दण्डित करते है। शनि का प्रकोप अन्य ग्रहों से अधिक होता है। उनकी कुदशा यदि किसी व्यक्ति पर पड़ जाएं तो जीवन संकटों के समुन्द्र में जा फसता है। किसी भी व्यक्ति के लिए यह बहुत आवश्यक है की वह शनि देव को सदैव प्रसन्न करके रखे ताकि उसका जीवन सुख के साथ व्यतीत हो सके।

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शारीरिक रूप से शनि ग्रह शनि देव का प्रतिनिधित्व करता है। मृत्यु के देवता अर्थात यमराज शनिदेव के भाई हैं। शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए विभिन्न मार्ग प्रकाशित किए गए है। जिस में से सबसे लाभकारी माना जाता है शनि का सरसों के तेल से अभिषेक किया जाना। पौराणिक कथनों के अनुसार रामायण काल में रावण ने अपनी शक्तियों से देवताओं एवं ऋषियों को अपने महल में कैद कर लिया था। उन देवताओं में शनि देव भी शामिल थे। जब हनुमान जी द्वारा लंका को जलाया गया तो वह वहा से आज़ाद हुए। परन्तु कारावास में उल्टा लटक कर रहने के कारण उनके शरीर में बहुत पीड़ा हो रही थी। हनुमान जी ने इस पीड़ा का निवारण सोचा और शनिदेव की सरसों के तेल से मालिश की जिसके कारण शनि देव का कष्ट दूर हुआ और वह प्रसन्न हो गए।

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हनुमान जी द्वारा स्थापित इस सरसों के तेल से मालिश की प्रथा सदियों से चली आ रही है। शनि जयंती पर शनि देव को तेल अर्पण करने या तेल से उनका अभिषेक करने से वह अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करतें है। उनके दुःख - दर्द को दूर कर जीवन की समस्त सांसारिक सुख - सुविधाओं से उनका घर भर देते है। जितनी शक्ति शनि देव के दुष्प्रभावों में है उससे बहुत अधिक शक्ति उनके द्वारा प्रदान की गई शुभ प्रभावों में होती है।शनि जयंती के दिन शनि देव के आशीर्वाद से अष्टम शनि का प्रकोप , शनि की ढैय्या और साढ़े साती के अशुभ काल का भी अंत होता है। शनि मनुष्य जीवन पर बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव रखते है इसलिए उनका आशीर्वाद व्यक्ति के साथ होना बहुत जरुरी होता है।

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