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शनि जयंती 2020 : शनि जयंती पर शनि देव की भक्ति से दूर होंगे साढ़े साती के प्रभाव

MyJyotish Expert Updated 17 May 2020 04:03 PM IST
Shani Jayanti 2020: Saturn's devotion to Saturn will overcome the effects of half century
शनि जयंती का पर्व इस वर्ष 22 मई 2020 को मनाया जाएगा। शनि जयंती का दिन शनि देव के जन्मोत्सव की ख़ुशी में मनाया जाता है। शनि देव को एक कुरुर ग्रह के रूप में देखा जाता है। शनि देव पूर्ण रूप से न्याय के देव है अर्थात जिस प्रकार एक व्यक्ति के कर्म होंगे उसके द्वारा भोगेंगे फल एवं दंड भी उसी प्रकार होंगे। शनि देव के दुष्प्रभाव किसी भी व्यक्ति का जीवन क्षण भर में नष्ट कर सकते है। शनि देव को पितृ शत्रु के नाम से भी जाना जाता है। कथन अनुसार जब वह अपनी माता छाया की कोख में थे ,तब माता छाया महादेव की अर्चना में इतनी लीन थी की उन्होंने अपने खान -पान का बिलकुल भी ध्यान नहीं रखा।

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इस बात का नकारात्मक प्रभाव शनि देव पर पड़ा और उनके शरीर का रंग अंधकार समान काला पड़ गया। जन्म के समय जब सूर्य देव ने शनि देव को देखा तो उनके रंग रूप को ध्यान में रखते हुए उन्होंने शनि देव को अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया तथा अपनी पत्नी छाया को पति व्रत न होने का आरोप लगाकर अपमानित करने लगे। यह बात सदैव के लिए शनि देव के मन में घर कर गई और उन्होंने अपने पिता से भी अधिक बलशाली बनकर उनका विरोध करने की ठानी। शनि देव ने असंख्य काल तक महादेव की आराधना की थी जिसके कारण ही उनका स्थान नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

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शनि जयंती भक्तों के जीवन का वह क्षण है जहां वह सरलता से शनि देव को प्रसन्न करके अपनी आशाओं की पूर्ति कर सकते है। शनि देव को सरसों का तेल अर्पण करना बहुत फलदायी होता है। सरसों के तेल का अर्पण शनि देव की प्रसन्नता का मुख्य रूप से कारण है। इससे अष्टम शनि ,शनि के साढ़े साती दोष एवं शनि की ढैय्या जैसे प्रकोप दूर होते है। शनि देव को प्रसन्न करने हेतु शनिवार के दिन गेहू पिसवाना चाहिए और साथ ही साथ उसमें चने का आता भी मिला लेना चाहिए उससे आर्थिक स्थितियों में वृद्धि होती है। शनि देव के शुभ प्रभाव जिस पर पड़ जाएं उससे भाग्यशाली व्यक्ति और कोई नहीं होता है।

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