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शनि जयंती 2020 : जानिए शनि देव की स्तुति में क्यों नहीं करना चाहिए इस रंग का उपयोग

MyJyotish Expert Updated 19 May 2020 10:03 PM IST
Shani Jayanti 2020: Know why you should not use this color in praise of Shani Dev
शनि देव न्याय के देवता माने जातें है। उनकी आराधना के समय नियमों का खास ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है। थोड़ी सी भी चूक और व्यक्ति उनके कुप्रभावों का शिकार हो सकता है। शनि देव सभी को उनके कर्म के आधार पर फल एवं दंड प्रदान करते है। जेष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 22 मई 2020 शुक्रवार को शनि जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। शनि की कुदृष्टि को विफल करने की शक्ति किसी में नहीं। इसलिए सदैव यह प्रयास करना चाहिए की शनिदेव जितना हो सके उतना प्रसन्न रहे। उनकी प्रसन्नता ही किसी भी व्यक्ति को उनकी उलटी चाल एवं उनके दुष्प्रभावों से बचाकर रख सकता है। शनि इसी माह 11 मई को वक्री हो गए थे। जिसके कारण शनि जयंती पर भी वह वक्री ही रहेंगे।

शनि जयंती के शुभ अवसर पर कोकिलावन शनि धाम में चढ़ाएं 11 किलों तेल और पाएं अष्टम शनि , शनि की ढैय्या एवं साढ़े - साती के प्रकोप से छुटकारा : 22-मई-2020 शनि देव की आराधना में सावधानियों का अहम स्थान है। एक गलत कर्म और शनि की अशुभ कृपा का समय शुरू। शनि जयंती के दिन शनि चालीसा का पाठ एवं शनि देव के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। इस दिन दान का भी बहुत अधिक महत्व माना  जाता है। पुराणों में भी दान को प्राचीन काल से ही बहुत अहम माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिशा का पूजन में महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसलिए ध्यान रहें की शनि पूजन के समय व्यक्ति का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। इससे पूजा के फल शुभ प्राप्त होतें है। शनि पूजन में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए। उन्हें सरसों का तेल भी अर्पण करना चाहिए इससे उनकी कुप्रभावों की शक्ति कमजोर पड़ जाती है। जिससे व्यक्ति का जीवन विपदाओं से दूर रहता है।


शनि जयंती के पावन अवसर पर कोकिलावन शनि धाम में कराएं तेल अभिषेक

शनि पूजन में लाल रंग के फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। न केवल लाल रंग के फूल बल्कि इस रंग किसी भी वास्तु का प्रयोग उनके समक्ष नहीं करना चाहिए।
माना जाता है की इससे शनि देव का क्रोध उत्पन्न होता है जिससे कृपा के बदले , दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। कभी भी पूजा करतें समय शनि देव के समक्ष खड़े नहीं रहना चाहिए। उनका पूजन सदैव बैठकर एवं उनके आगे शीश झुका के करनी चाहिए। जिससे वह भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करतें है। उनके आशीर्वाद से भक्त के जीवन की बाधाएं दूर होती है एवं वह सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ते है।

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