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Rambha Tritiy 2024 रंभा तृतीया 2024 जानें क्यों रखा जाता है रंभा तीज का व्रत

Acharya RajRani Updated 08 Jun 2024 09:51 AM IST
रंभा तृतीया
रंभा तृतीया - फोटो : myjyotish

खास बातें

Importance of Rambha Tritiy रम्भा तृतीया का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है । इस दिन देवी रंभा का पूजन किया जाता है । रंभा तृतीया पूजन से सौभाग्य एवं सुख की प्राप्ति होती है । 
 
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Importance of Rambha Tritiy रम्भा तृतीया का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है । इस दिन देवी रंभा का पूजन किया जाता है । रंभा तृतीया पूजन से सौभाग्य एवं सुख की प्राप्ति होती है । 

Rambha Tritiya Puja रंभा तृतीया पर्व भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। इस बार यह व्रत 8 जून 2024 को किया जाएगा । इस दिन तिथि  पूर्व द्वितीया विद्धा होने के कारण रंभा तृतीया पूजा एवं रंभा तृतीया व्रत होगा । 

रंभा तृतीया का पूजन विवाहित महिलाओं और अविवाहित लड़कियों द्वारा किया जाता है । यह सुखी वैवाहिक जीवन के लिए विशेष समय माना गया है । यदि किसी प्रकार का कष्ट वैवाहिक संबंधों में आता है तो इस दिन इस व्रत को करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं । यह पर्व अत्यंत ही विशेष फलदायी होता है। शास्त्रों में इस दिन को शुभ दिन के रुप में स्थान प्राप्त है तथा यह देवी पूजन हेतु भी विशेष समय होता है । 
 

रंभा तृतीया पूजा 2024

 8 जून 2024 को शनिवार के दिन रंभा तृतीया का पूजन होगा । धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी रम्भा के विभिन्न नामों का स्मरण किया जाता है । माता की पूजा करने से व्रत करने वाले एवं पूजन करने वाले भक्तों को सुख एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं तथा अपने उत्तम सौभाग्य की कामना के लिए व्रत करती हैं । इस दिन व्रत का संकल्प लेने पर संपूर्ण दिन निराहार रहते हुए व्रत को किया जाता है । इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, लक्ष्मी माता श्री विष्णु भगवान एवं देवी रंभा जी की पूजा करती हैं । 

रंभा तृतीया पूजा के लाभ 


सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति 
रम्भा तृतीया का पूजन सुखमय जीवन को देने वाला होता है। इस शुभ अवसर पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए इस दिन पूजा अर्चना करती हैं और व्रत को मुख्य रूप से करती हैं। इसके अलावा जिनका विवाह नहीं हुआ हो वह भी सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को कर सकता है। अविवाहित लड़कियां भी इस दिन व्रत रखती हैं। रम्भा तृतीया का व्रत स्वर्ग की अप्सरा रम्भा से संबंधित है।

आर्थिक सुख समृद्धि की प्राप्ति का दिन 
शास्त्रों में वर्णित है कि रम्भा माता लक्ष्मी का दूसरा रूप है। रम्भा तीज या रम्भा तृतीया के दिन रम्भा की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन रम्भा की पूजा करने से भक्तों को आशीर्वाद मिलता है। आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको स्वर्ग की अप्सरा ब्रह्मा के बारे में बताएंगे और रम्भा तेज या रम्भा तृतीया के पावन व्रत की कथा और महत्व भी बताएंगे, इसलिए इस लेख को अंत तक पढ़ें।

सौंदर्य एवं आकर्षण की प्राप्ति 
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, रम्भा अप्सराओं की रानी थीं। रंभा अत्यंत दिव्य सुंदरता से संपन्न मानी गई थीं । इनसे सभी देवता भी आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाए। देवी रंभा अपनी सुंदरता, आकर्षण और अनुग्रह के लिए जानी जाती हैं। रम्भा को सभी अप्सराओं में सबसे सुंदर माना जाता है और कहा जाता है कि वह सभी अप्सराओं की रानी हैं। इनका पूजन करने पर व्यक्ति को आकर्षण की प्राप्ति होती है। 

प्रेम संबंधों होते हैं सफल 
रम्भा तृतीया को विवाहित महिलाएं और कुंवारी लड़कियां पूजा करती हैं। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह विशेष समय माना जाता है। अगर वैवाहिक संबंधों में किसी तरह की परेशानी आ रही है तो इस दिन व्रत रखने से विशेष फल मिलता है। यह पर्व प्रेम संबंधों के लिए बहुत फलदायी होता है। 

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