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Home ›   Blogs Hindi ›   Puja niyam: 5 things to do before worshipping God

Puja Niyam: देव पूजा से पहले अवश्य करें ये 5 कार्य, वरना नहीं मिलेगा पूजन का फल

Shaily Prakashशैली प्रकाश Updated 29 Jun 2024 10:38 AM IST
पूजा के नियम
पूजा के नियम - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Puja Niyam: पूजा के पूर्व 5 ऐसे नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से आपकी पूजा संंपन्न होती है। इन्हीं में से 5 नियम इस लेख में बताए गए हैं। 
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Puja Niyam: हिंदू सनातन धर्म में पूजा के कई नियम हैं, लेकिन पूजा से पहले क्या करना चाहिए यह सभी लोग नहीं जानते हैं और भूलवश या अनजाने में यह कार्य नहीं करते हैं, जिसके कारण जातक को पूजा का फल नहीं मिलता है। तो, आइए इस लेख में जानते हैं कि पूजा से पहले ऐसा कौन सा कार्य है जो हमें करना जरूरी है।
 

पूजा से पहले के 5 नियम


1. शौच : शौच अर्थात शुचिता, शुद्धता, शुद्धि, विशुद्धता, पवित्रता और निर्मलता। शौच का अर्थ शरीर और मन की बाहरी और आंतरिक पवित्रता से है। शौच का अर्थ अच्छे से मल-मूत्र त्यागना भी है। मन, कर्म और वचन से शुद्ध होकर ही पूजा करें। पूजा के कुछ समय पहले से क्रोध न करें, कड़वे वचन न कहें, मल और मूत्र त्यागकर ही पूजा के लिए आगे बढ़ें। कई लोगों को शौच अच्छे से नहीं होती है या होती ही नहीं है, ऐसे में नित्य पूजा का त्याग करना ही बेहतर है।

2. स्नान : मल-मूत्र त्यागने के बाद स्नान करना जरूरी है। शारीरिक शुद्धता भी 2 प्रकार की होती है- पहली में शरीर को बाहर से शुद्ध किया जाता है। इसमें मिट्टी, उबटन, त्रिफला, नीम आदि लगाकर निर्मल जल से स्नान करने से त्वचा एवं अंगों की शुद्धि होती है। दूसरी शरीर के आंतरिक अंगों को शुद्ध करने के लिए योग में कई उपाय बताए गए है- जैसे शंख प्रक्षालन, नेती, नौलि, धौती, कुंजल, गजकरणी, गणेश क्रिया, अंग संचालन आदि। आंतरिक शुद्धता तो हम नहीं कर सकते परंतु शरीर के सभी 10 छिद्रों को अच्छे से साफ करें। 10 छिद्रों में 2 आंखें, नाक के 2 छिद्र, कान के 2 छिद्र, मुख, नाभि और गुप्तांग के मिलाकर कुल 10 छिद्र होते हैं।

3. धोती : शरीर पर मात्र एक बगैर सिला सफेद कपड़ा ही धारण करके पूजा की जाती है। यही प्राचीन काल से चला आ रहा नियम है। हिंदू धर्म में किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना के वक्त श्रद्धालुओं को धोती पहनना अनिवार्य किया गया है। प्राचीन काल में धोती पहने बिना पूजादि कर्मकांड पूर्ण नहीं माने जाते थे।

4. आचमन : शौचादि से निवृत्ति होने के बाद पूजा, प्रार्थना के पूर्व आचमन किया जाता है। आचमन का अर्थ होता है एक चम्मच बराबर जल पीना। प्रार्थना, दर्शन, पूजा, यज्ञ आदि आरंभ करने से पूर्व शुद्धि के लिए मंत्र पढ़ते हुए जल पीना ही आचमन कहलाता है। मनुस्मृति में कहा गया है कि- नींद से जागने के बाद, भूख लगने पर, भोजन करने के बाद, छींक आने पर, असत्य भाषण होने पर, पानी पीने के बाद और अध्ययन करने के बाद आचमन जरूर करें। तीन बार आचमन कर आगे दिए मंत्र पढ़कर हाथ धो लें।- ॐ केशवाय नम:, ॐ नाराणाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ हृषीकेशाय नम:।

5. आह्वान : मंत्र द्वारा किसी देवता को बुलाने का कार्य ही आह्वान कहलाता है। पूजा के पहले किसी भी देवता का आह्वान करके उनकी प्रतिष्ठा की जाती है। इसके लिए पूजा से पूर्व ही उन्हें आसन दिया जाता है। प्रत्येक देवता का आह्वान मंत्र या श्लोक होता है। 

 तो, इस प्रकार से आप इन नियमों को अपनाकर पूजा का सही तरीके से पालन कर सकते हैं। यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें। 

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