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Home ›   Blogs Hindi ›   Pradosh Vrat shubh muhurat- Pradosh Vrat in July 2024

Budh Pradosh Vrat 2024: आषाढ़ माह का पहला बुध प्रदोष व्रत जानें पूजा मुहूर्त और आरती

myjyotish Updated 02 Jul 2024 01:15 PM IST
आषाढ़ माह का पहला प्रदोष
आषाढ़ माह का पहला प्रदोष - फोटो : myjyotish

खास बातें

Budh Pradosh Vrat July 2024 Date, 3 जुलाई 2024 को आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव के निमित्त पूजन का विशेष विधान रहताहै। इस पूजा में प्रदोष काल का पूजन विशेष होता है।
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Pradosh Vrat in July 2024 Date : 3 जुलाई 2024 को आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव के निमित्त पूजन का विशेष विधान रहताहै। इस पूजा में प्रदोष काल का पूजन विशेष होता है। 

Pradosh Vrat shubh muhurat : आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन बुध प्रदोष व्रत रखा जाएगा। बुधवार के दिन प्रदोष तिथि के पड़ने के कारण यह बुध प्रदोशः के रुप में पूजा जाएगा। आइये जान लेते हैं बुध प्रदोष व्रत, बुध प्रदोष पूजा मुहूर्त 
 

आषाढ़ माह बुध प्रदोष मुहूर्त 2024 Ashadh Month Budh Pradosh Muhurta 2024

3 जुलाई 2024 में प्रदोष व्रत का आरंभ होगा, प्रदोष का पवित्र व्रत प्रत्येक चंद्र मास के तेरहवें दिन रखा जाता है। आषाढ़, कृष्ण त्रयोदशी का प्रारम्भ 3 जुलाई को सुबह 07:10 से होगा और इसकी समाप्ति 04 जुलाई को सुबह 05:54 पर होगी।  

प्रदोष पूजा का समय 3 जुलाई को शाम 07:23 से 09:24 तक रहने वाला है। प्रदोष व्रत, भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित एक पूजनीय हिंदू उपवास परंपरा है, जो हिंदू चंद्र कैलेंडर में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों की त्रयोदशी तिथि (13वें दिन) को पड़ता है, जो हर महीने में दो बार होता है। 
 

बुध प्रदोष व्रत महिमा Significance of Budha Pradosh Vrat

बुधवार के दिन जब प्रदोष व्रत पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन भगवान शिव की स्तुति की जाती है। साल में कुल 24 प्रदोष व्रत आते हैं। सात दिनों के सात व्रत होते हैं। मान्यता के अनुसार दिन के हिसाब से इसका फल बदलता रहता है। बुधवार का प्रदोष व्रत सुख समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। बुध प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है और इस व्रत को करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। 
 

बुध प्रदोष व्रत महत्व Importance of Budha Pradosh Vrat

बुध प्रदोष व्रत को रखने से जीवन के सभी कष्ट भी दूर होते हैं। त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। त्रयोदशी तिथि पर व्रत रखने और प्रदोष काल में देवों के देव महादेव की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त सच्ची श्रद्धा से भोलेनाथ की पूजा करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


बुध प्रदोष व्रत आरती  Budh Pradosh Vrat Aarti 

बुध प्रदोष व्रत के शुभ दिन महादेव की विधिवत पूजा करनी चाहिए, इसके साथ ही आरती के साथ पूजा का समापन करना चाहिए।
 

शिव जी की आरती Shiv Ji Ki Aarti

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ 
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ 
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ 
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ 
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ 
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ 
ॐ जय शिव जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा ।

यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।
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