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सूर्य नारायण के पूजन व पाठ से समाप्त होते हैं ग्रह दोष

MyJyotish Expert Updated 12 May 2020 07:21 PM IST
Planet Dosh ends with worship and recitation of Surya Narayana
पौराणिक धार्मिक ग्रंथो के अनुसार रविवार के दिन सूर्य देव की आराधना करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। सूर्य देव को वेदों के अनुसार संसार की आत्मा कहा गया है। रविवार के दिन सूर्य देव को अर्घ देने का विशेष महत्व है। सूर्य को संसार की उत्पत्ति का एक मात्र श्रोत माना गया है। यह सर्वमान्य सत्य है की सूर्य की अनुपस्थिति में पृथ्वी पर जीवन असंभव है।

सूर्य सर्व कल्याणकारी हैं, उनकी महिमा से गंभीर रोगों का निवारण हो जाता है। ऋग्वेद के अनुसार देवताओं में सूर्य का स्थान महत्वपूर्ण बताया गया है। सूर्य समस्त चराचर जगत की अंतरात्मा है। उनकी उपासना का प्रचलन वैदिक काल से चला आ रहा है। सूर्य की आराधना से व्यक्ति का भाग्योदय होता है एवं उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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रविवार का दिन सूर्य की उपासना को समर्पित है। इस दिन सूर्यनारायण का पूजन व पाठ करने से ग्रहों के दोष का निवारण होता है। रविवार के दिन सूर्य देव का व्रत सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन उपवास रखने से सूर्य देव भक्त की इच्छाओं और मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। इनकी आराधना से अन्य ग्रहों के दुष्प्रभाव कम हो जाते तथा व्यक्ति का जीवन खुशियों से भर जाता है।

उन्हें प्रत्यक्ष देव के रूप में जाना जाता है क्योंकि उनकी आराधना के लिए कोई भी उनके साक्षात रूप से दर्शन कर सकता है। माना जाता है की सूर्य के बिना जिस प्रकार यह संसार अधूरा है ठीक उसी प्रकार सूर्य देव के आशीर्वाद के बिना एक मनुष्य का जीवन सुख - सुविधाओं से परिपूर्ण होने के बाद भी अधूरा माना है। सूर्य की उपासना बहुत ही सरलता से पूर्ण हो जाती है तथा इसका आशीर्वाद भी भरपूर प्राप्त होता है।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन प्रातः काल उठकर स्नान आदि कर लेना चाहिए। स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूर्ण विधि - विधान से सूर्य पूजा करके संकल्प करना चाहिए। सूर्य देव का साक्षात नमन करके जल से उन्हें अर्घ अर्पण करना चाहिए। मन की जो कोई भी इच्छा है वह सूर्य देव के समक्ष व्यक्त करनी चाहिए और पूर्ण श्रद्धा से उनका ध्यान करना चाहिए। सूर्य देव समस्त विपदाओं का निवारण करेंगे एवं सभी को सुखमय जीवन प्रदान करेंगे।

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