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Kawad yatra : कौन थे पहले कांवड़िये ? किसने सबसे पहले करा था जल अभिषेक

myjyotish expert Updated 13 Jul 2021 06:50 PM IST
कौन थे पहले कावड़ियें? किसने सबसे पहले करा था जलअभिषेक
कौन थे पहले कावड़ियें? किसने सबसे पहले करा था जलअभिषेक - फोटो : google

जैसा कि हम जानते हैं यह महीना सावन का है यानी भगवान भोलेनाथ का सबसे बड़ा महीना! कई से जगहों पर जैसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में दूर-दूर से कावड़ लाकर भगवान महादेव का जलाभिषेक करते हैं. मान्यता है कि भगवान परशुराम ऐसे पहले कावड़िए थे जिन्होंने सबसे पहले गंगा जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया था ऐसे कई राज्य भी हैं जहां पर यह परंपरा निभाई जाती है कावर लाकर भगवान महादेव का जल अभिषेक करते हैं! इसके पीछे की कहानी यह है कि भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि कजरी वन मैं अपने पत्नी रेणुका के साथ खेल रहा करते थे अगर हम उनके स्वभाव की बात करें तो वह बहुत ही शांत महात्मा थे! एक बार ऐसा हुआ कि प्रतापी और बलशाली राजा सहस्त्रबाहु कजरी वन में पधार रहे थे उसी समय ऋषि ने सहस्त्रबाहु और उनके साथ आए सैनिकों का बहुत अच्छे से सेवा करें उन्हें किसी भी चीज की कमी ना लाने दी! उसी समय सहस्त्रबाहु को तुरंत पता चला कि ऋषि के पास एक गाय हैं जिसका नाम कामधेनु है! उसी के साथ यह भी पता चला कि अगर हम इस गाय से कुछ भी मांगे तो वह हमें मिल जाता है बिना किसी कठिनाइयों का सामना करें. कामधेनु गाय के कान में जाकर हम जो भी प्रार्थना करें मैं संपूर्ण फल देती है!

सहस्त्रबाहु ने सोचा कि क्यों ना ऋषि जमदग्नि से गाय की मांग की जाए उसी समय सर सहस्त्रबाहु ने ऋषि जमदग्नि से उनके गाय की मांग की किंतु जब ऋषि जमदग्नि ने मना कर दिया कि नहीं वह अपनी गाय नहीं देंगे तो उसी समय  राजा ने बिना कुछ सोचे उनकी हत्या कर दी और कामधेनु गाय को अपने साथ लेकर चले गए |

जैसे ही भगवान परशुराम को यह खबर मिली कि उनके पिता की हत्या सहस्त्रबाहु ने कर दी उसी समय परशुराम सहस्त्रबाहु के पास गए और उनकी हत्या कर दी और अपने पिता को पुनर्जीवित कर लिया. जैसे ही ऋषि को जब पता चला कि परशुराम द्वारा सहस्त्रबाहु की जो हत्या हुई उन्होंने तभी समाधि परशुराम को की शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए परशुराम ने अपने पिता की बात मानते हुए कजरी वन में पहले तो शिवलिंग की स्थापना की फिर उन्होंने वहीं पर गंगाजल लाकर इसका जलाभिषेक किया ऐसा कहा जाता है इस स्थान पर आज भी मंदिर है और सभी लोग आते हैं आराधना के लिए!

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उस स्थान को आज भी पूरा महादेव के नाम से जाने जाते हैं वह जगह को कजरी वन कहां जाता है और वह वह आज भी श्रेष्ठ मेरठ के आसपास बना हुआ है. इसीलिए कहा जाता है कि परशुराम ने सबसे पहले शिवजी को कांवड़ में जल चढ़ाया था उसके बाद ही यह परंपरा शुरू हुई थी. और ऐसा भी कहा जाता है कि अगर परशुराम के अलावा कोई व्यक्ति था तो वह थे श्रवण कुमार जिनका नाम परशुराम के अलावा भी कावड़ के साथ आता है माता पिता के भक्त श्रवण कुमार परशुराम को कावड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा करने निकले थे!

हम जानते हैं सावन में दूर-दूर से लोग आते हैं हरिद्वार गोमुख और गंगोत्री में कावड़ लेकर और शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए यह बहुत ही शुभ अवसर माना जाता है हिंदू धर्म में! श्रावण मास में भगवान शिव के भक्त कावड़ लेकर आते हैं और जल चढ़ाते हैं! इस दिन को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है भगवान शिव के भक्तों के लिए यह बहुत ही बड़ा अवसर होता है.
इसी तरह  हर साल की तरह इस साल भी पड़ेगा सावन मास 25 जुलाई 2021 से शुरू होगा और 22 अगस्त 2021 को समाप्त होगा. 

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