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Nagarkot Temple : उज्जैन की रक्षा करती हैं ‘नगर कोट’ वाली माता, साल भर लगा रहता है भक्तों का जमावड़ा

Myjyotish Expert Updated 29 Sep 2022 01:28 PM IST
Nagarkot Temple : उज्जैन की रक्षा करती हैं ‘नगर कोट’ वाली माता, साल भर लगा रहता है भक्तों का जमावड़ा
Nagarkot Temple : उज्जैन की रक्षा करती हैं ‘नगर कोट’ वाली माता, साल भर लगा रहता है भक्तों का जमावड़ा - फोटो : google

Nagarkot Temple : उज्जैन की रक्षा करती हैं ‘नगर कोट’ वाली माता, साल भर लगा रहता है भक्तों का जमावड़ा


नगर कोट माता मंदिर के परिसर में प्राचीन कुंड भी है, जो काफी गहरा है. पुजारी ने बताया कि इस कुंड के जल से ही देवी का अभिषेक पूजन किया जाता है. साथ ही परिसर में अन्य देवताओं के मंदिर भी मौजूद हैं.

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में ऐसे कई प्रसिद्ध देवी मंदिर हैं, जिनका उल्लेख पुराणों में तो मिलता ही है, वहीं सम्राट विक्रमादित्य काल में भी इन मंदिरों का विशेष महत्व आंका गया है. इन्हीं में से एक है, ‘नगर कोट माता का मंदिर’. नगर कोट की रानी प्राचीन उज्जयिनी के दक्षिण-पश्चिम कोने की सुरक्षा देवी हैं. राजा विक्रमादित्य और राजा भर्तृहरि की अनेक कथाएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं. यह स्थान नाथ संप्रदाय की परंपरा से जुड़ा है. यह स्थान नगर के प्राचीन कच्चे परकोटे पर स्थित है. इसलिए इसे नगर कोट की रानी कहा जाता है.

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हालांकि यह मंदिर उज्जैन शहर की उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है. इस मंदिर में एक जलकुंड है, जो कि परमारकालीन माना जाता है. मंदिर में एक अन्य गुप्त कालीन मंदिर भी है, जो कि शिवपुत्र कार्तिकेय का है.

सी मान्यता है कि उज्जैन में नवरात्रि में अन्य माता मंदिर के दर्शन नगरकोट की रानी माता के बगैर अधूरे माने जाते हैं. इस मंदिर मे प्रतिदीन श्रद्धालुओं का तांता लगता है. नवरात्र में यहां सुबह से लेकर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

माता के दर्शन मात्र से अभिभूत हो जाते हैं भक्त

मंदिर में सुबह और शाम के समय भव्य आरती होती है तो नगाड़ों, घंटियों की गूंज से वातावरण आच्छादित हो उठता है. माता के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. माता के दर्शन से श्रद्धालु अभिभूत हो जाते हैं.

मंदिर परिसर में प्राचीन कुंड भी है, जो काफी गहरा है. मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस कुंड के जल से ही देवी का अभिषेक पूजन किया जाता है. साथ ही परिसर में अन्य देवताओं के मंदिर भी मौजूद हैं.

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24 देवियों में से एक हैं नगर कोट माता

सम्राट विक्रमादित्य काल में भी इन मंदिरों का विशेष महत्व आंका गया है. इन्हीं में से एक है नगर कोट माता का मंदिर. स्कंद पुराण के अवंतिका क्षेत्र महात्म्य में इसका उल्लेख मिलता है. स्कंद पुराण के अनुसार, 24 देवियों में से एक है नगर कोट माता का मंदिर.

रधन सागर के पास स्थित मंदिर में माता की मूर्ति भव्य और मनोहारी है. मंदिर परमारकालीन माना जाता है. वहीं स्कंद पुराण के अवंतिखंड में वर्णित नौ मातिृकाओं में से 7वीं देवी नगर कोट की माता हैं.

लगेगा मेला, होंगे भव्य आयोजन

मंदिर के पुजारी पंडित मथुरा प्रसाद शास्त्री और पंडित कुलदीप शास्त्री ने बताया कि कोरोना के कारण भले ही दो वर्षों से नवरात्रि पर्व हर्षोल्लास और धूमधाम से नहीं मनाया गया हो, लेकिन इस वर्ष नवरात्रि पर्व को उत्सव की तरह धूमधाम से मनाया जाएगा.

इस दौरान मंदिर में होने वाले पूजन-अर्चन के साथ ही नगरकोट पर विशाल मेला लगाया जाएगा और प्रसादी वितरण के साथ ही भजन और भंडारे के आयोजन भी किए जाएंगे.

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