Mother Chinnamasta Is The Goddess Of Complete Fulfillment - सर्वसिद्धि पूर्ति की देवी है माँ छिन्नमस्ता - Myjyotish News Live
myjyotish
हेल्पलाइन नंबर

9818015458

  • login

    Login

  • Cart

  • wallet

    Wallet

Home ›   Blogs Hindi ›   Mother Chinnamasta is the Goddess of complete fulfillment

सर्वसिद्धि पूर्ति की देवी है माँ छिन्नमस्ता

MyJyotish Expert Updated 04 May 2020 07:05 PM IST
Mother Chinnamasta is the Goddess of complete fulfillment
बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छिन्नमस्ता जयंती के रूप में मनाया जाता है। देवी छिन्नमस्ता को छिन्नमस्तिका व चिंतपूर्णी भी कहा गया है। छिन्नमस्ता देवी का स्वरूप त्रिपुरसुन्दरी का रौद्र रूप है। वह अपने एक हाथ में खड्ग तो वहीं दूसरे हाथ में अपना मस्तिक्ष लिए हुए हैं। वह छिन्नताओं को हरने वाली देवी हैं। वह चतुर्भुजी हैं तथा उनके अनेको स्वरूप हैं। उनके एक स्वरूप में दर्शाया गया है की वह अपनी सखियों की भूख को जिसमें से एक स्वरूप में अपनी सुविधाओं का त्यागकर अपने बच्चों के लिए उपस्थित होती हैं। देवी के आशीर्वाद से भक्तों के समस्त दुःख के हल की प्राप्ति होती है।

छिन्नमस्तिका जयंती पर बिष्णुपुर के छिन्नमस्ता मंदिर में कराएं अनुष्ठान और पाएं कर्ज से मुक्ति : 7-मई-2020

मान्यताओं के अनुसार देवी की पूजा सदैव शांत मन से करनी चाहिए। कहा जाता है हम जिस प्रकार की इच्छा शक्ति से देवी की पूजा करते हैं हमें आशीर्वाद भी उसी प्रकार प्राप्त होता है। अर्थात यदि व्यक्ति शांत मन से देवी की आराधना करता है तो देवी उसके समक्ष अपने शांत स्वरूप में प्रकट होती है वहीं यदि व्यक्ति देवी की स्तुति अशांत स्वरुप में करता है तो देवी अपने रौद्र रूप में प्रकट होती है। देवी छिन्नमस्ता को त्याग ,बलिदान एवं साहस की देवी माना गया है। उनकी आकृति में भी वह अपनी सहेली शाकिनी व वर्णिनी को रक्तपान करती प्रस्तुत की गई हैं। देवी संहार की देवी के रूप में भी जानी जाती हैं। इन्हे प्रचंड चंडिका भी कहा जाता है। वह शत्रुओं का विनाश करके अपने भक्तों के जीवन का उद्धार करती हैं।

मंगलवार के दिन पंचमुखी संकट मोचन मंदिर में कराएं महाबली हनुमान की पूजा और पाएं शत्रुओं के संकट से मुक्ति

देवी सिंह पर सवारी करती हैं तथा यह कमल पर विराजमान होती हैं। इनकी नाभि में योनि चक्र पाया जाता है। इनकी पूजा पूर्ण श्रद्धा से करनी चाहिए। सुबह उठकर स्नान अदि करके लाल फूलों की माला चढ़ाकर संकल्प करना चाहिए। पूर्ण विधि-विधान से देवी की पूजा समपन्न करनी चाहिए। इनकी पूजा में सावधानी अवश्य रखनी चाहिए अर्थात किसी प्रकार की कोई भूल नहीं करनी चाहिए। देवी छिन्नमस्ता को विभिन्न प्रकार के भोग अर्पण करने चाहिए। देवी अत्यंत ही दयालु हैं तथा वह अपने भक्तों की रक्षाकर उन्हें समस्त विपदाओं से बचाती हैं। वह अपने भक्तों पर विशेष कृपा करती है।

यह भी पढ़े :-

शनि देव की आराधना से दूर हो जाते हैं साढ़े साती के प्रभाव

नारायण की आराधना से होती है संतान सुख की प्राप्ति

जानिए भगवती भवानी कैसे करेंगी अपने भक्तों का उद्धार


 

  • 100% Authentic
  • Payment Protection
  • Privacy Protection
  • Help & Support

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
X