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हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। आइए जानते हैं जून 2021 के मासिक शिवरात्रि की तिथि पूजा मुहूर्त और महत्व के बारे में।

myjyotish expert Updated 06 Jun 2021 12:39 PM IST
हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। आइए जानते हैं जून 2021 के मासिक शिवरात्रि की तिथि पूजा मुहूर्त और महत्व के बारे में।
हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। आइए जानते हैं जून 2021 के मासिक शिवरात्रि की तिथि पूजा मुहूर्त और महत्व के बारे में। - फोटो : google
हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस समय ज्येष्ठ मास चल रहा है और अंग्रेजी कैलेंडर का छठा माह जून भी मंगलवार से शुरू हो रहा है। जून माह की मासिक शिवरात्रि 8 जून, मंगलवार है। मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का विधिवत पूजा-पाठ किया जाता है। भगवान शिव शंकर के साथ ही माता पार्वती की भी उपासना होती है क्योंकि शिव और शक्ति एक-दूसरे को पूर्ण करते हैं। बाबा भोलेनाथ ही सदा सत्य हैं। आइए जानते हैं जून 2021 के मासिक शिवरात्रि की तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व के बारे में।

मासिक शिवरात्रि जून 2021 तिथि

हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का शुभारम्भ 08 जून को दिन में ११ बजकर २४ मिनट से हो रहा है, वहीं इसकी समाप्ति ९ जून को दोपहर १ बजकर ५७ मिनट पर हो जायेगी। रात का मुहूर्त ८ जून को प्राप्त हो रहा है, इसलिए इस बार मासिक शिवरात्रि ८ जून को ही मनाई जाएगी।

मासिक शिवरात्रि 2021 मुहूर्त

इस बार के मासिक शिवरात्रि की पूजा के लिए भक्तों को 40 मिनट का समय प्राप्त होगा। सभी भक्तजन 08 जून को रात्रि १२ बजे से देर रात १२ बजकर ४० मिनट के बीच तक मासिक शिवरात्रि की आराधना कर सकते हैं।

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मासिक शिवरात्रि २०२१: शनिदेव की पूजा के दौरान करें ये गलती, पड़ सकती है भारी

शनिदेव की पूजा करते समय उपासक को भूलकर भी उनसे अपनी दृष्टि नहीं मिलानी चाहिए. अन्यथा उपासक के जीवन में अनिष्ट हो सकता है. उपासक को चाहिए कि वे शनिदेव का सारा पूजन सिर को नीचे झुकाकर ही करें. ऐसी मान्यता है कि शनिदेव को उनकी पत्नी से श्राप मिलने से दृष्टि वक्र हो गई है. ऐसे में आंख मिलाकर उनकी पूजा करने से उपासक के जीवन में अनिष्ट हो सकता है. इसलिए शनिदेव के सामने कभी भी एकदम खड़े होकर उनकी आंखों में आँख डालकर पूजा या दर्शन नहीं करनी चाहिए.
 

शिवरात्रि पर बन रहे हैं ये शुभ योग

इस बार मासिक शिवरात्रि के दिन प्रीति व आयुष्मान योग बन रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में ये दोनों ही योग बहुत ही शुभ माने जाते हैं. इस योग में किए गया कोई भी कार्य सफल होता है. 09 मई 2021 की रात 08 बजकर 43 मिनट तक प्रतियोगी रहेगा. इसके बाद आयुष्मान योग आरंभ हो जाएगा.
 

शिवरात्रि पूजा सामग्री

भगवान शिव की पूजा के लिए सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, शुद्ध देशी घी, दही, शहद, गंगाजल, बेर, जौ, गाय का कच्चा दूध, कपूर, धूप, दीप, रूई, चंदन, इत्र, पंच फल, पंच मेवा, मौली, जनेऊ, पंच रस, गंध रोली, पंच मिष्ठान्न, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, दक्षिणा, चांदी, पूजा के बर्तन और आसन आदि.
 

शिवरात्रि व्रत पूजा विधि

 
मासिक शिवरात्रि का पूजा त्रयोदशी तिथि यानि एक दिन पहले से ही शुरू हो जाता है.
 
त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा आराधना करें.
 
इसके बाद मासिक शिवरात्रि व्रत का संकल्प लें.
 
चतुर्दशी के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद धूप दीप जलाएं.
 
पंचामृत और गंगाजल से शिव जी का अभिषेक करें.
 
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शिव जी के पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर बिल्वपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें.
 
शिव जी का स्मरण करते हुए पूरे दिन निराहार रहकर शिवरात्रि का व्रत करें.
 
रात्रि के चारों पहर में शिव जी की पूजा करें और अगले दिन प्रातः जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और दान दक्षिणा दें. इसके बाद अपने व्रत का पारण करें.
 
 

मासिक शिवरात्रि का महत्व

पौराणिक ग्रंथों में मासिक शिवरात्रि के महत्व के कई उल्लेख मिलते हैं. इस व्रत को करने से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं. वहीं, वैवाहिक जीवन की समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है. शिवरात्रि पर भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं.

शिवरात्रि व्रत से विवाह संबंधी परेशानियां दूर होती हैं

माना गया है कि शिवरात्रि व्रत और पूजा करने से विवाह में हो रहा विलम्ब का कष्ट दूर होता है इसलिए यह व्रत कुंवारी लड़कियों के लिए बहुत ही सर्वोच्च है. वैवाहिक जीवन अत्यंत सुखद होता है और आने वाली परेशानियां भी दूर हो जाती हैं। महिला और पुरुष दोनों ही इस व्रत को रख सकते हैं।

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