myjyotish

6386786122

   whatsapp

6386786122

Whatsup
  • Login

  • Cart

  • wallet

    Wallet

विज्ञापन
विज्ञापन
Home ›   Blogs Hindi ›   Maa Bhuvaneshwari: gupt navratri 2024 The worship of Bhuvaneshwari

Maa Bhuvaneshwari : गुप्त नवरात्रि पर माँ भुवनेश्वरी पूजन के बिना अधूरी है दस महाविद्या साधना

My Jyotish Updated 09 Jul 2024 11:35 AM IST
माँ भुवनेश्वरी
माँ भुवनेश्वरी - फोटो : myjyotish

खास बातें

gupt navratri 2024 july में गुप्त नवरात्रि के दौरान माँ भुवनेश्वरी का पूजन भक्ति एवं शक्ति को पाने का विशेष समय होता है। Gupt Navratri के चौथे दिन माँ भुवनेश्वरी पूजन एवं माँ भुवनेश्वरी स्त्रोत पाठ दिलाता है विशेष लाभ।
विज्ञापन
विज्ञापन
gupt navratri 2024 july में गुप्त नवरात्रि के दौरान माँ भुवनेश्वरी का पूजन भक्ति एवं शक्ति को पाने का विशेष समय होता है। Gupt Navratri के चौथे दिन माँ भुवनेश्वरी पूजन एवं माँ भुवनेश्वरी स्त्रोत पाठ दिलाता है विशेष लाभ। 

gupt navratri 2024 puja vidhi इस दिन पर माता के  भुवनेश्वरी स्वरुप का पूजन करने से व्यक्ति के संकट दूर होते हैं। समस्त ब्रह्माण की सुरक्षा करने वाली माँ  भुवनेश्वरी  भक्त का हर संकट दूर करती हैं। 

गुप्त नवरात्रि में कराएँ दुर्गा सप्तशती का अमूल्य पाठ, घर बैठे पूजन से मिलेगा सर्वस्व - 06 से 15 जुलाई 2024
 

गुप्त नवरात्रि मां भुवनेश्वरी पूजा विधि Secret Navratri Bhuvaneshwari Worship Method


दस महाविद्याओं में से एक हैं देवी भुवनेश्वरी। ऎसे में गुप्त नवरात्रि के दौरान इनका पूजन बहुत महत्वपूर्ण होता है। माता के पूजन की साधना सुबह एवं रात्रि दोनों समय की जाती है। मंदिर में देवी की प्रतिमा अथवा चित्र को स्थापित करके उन्हें लाल रंग के वस्त्र एवं आभूषण अर्पित किए जाते हैं।

माँ भुवनेश्वरी को लाल रंग प्रिय होता है, इसलिए पूजा में भक्त को लाल रंग का पुष्प, लाल चंदन, सिंदूर, चुनरी, श्रृंगार की सामग्री अर्पित करनी चाहिए तथा मालपुओं का भोग अर्पित करना चाहिए। धूप-दीप से माता का पूजन करते हुए माँ भुवनेश्वरी स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। ऎसा करने से पूजा विशेष फल प्राप्त होता है। 
 
 श्रीभुवनेश्वरीस्तोत्रम  Shri Bhuvaneshwari Stotram

अथानन्दमयीं साक्षाच्छब्दब्रह्मस्वरूपिणीम् ।
ईडे सकलसम्पत्त्यै जगत्कारणमम्बिकाम् ॥

विद्यामशेषजननीमरविन्दयोने-आद्यामशेष
     र्विष्णोः शिवस्य च वपुः प्रतिपादयित्रीम् ।
सृष्टिस्थितिक्षयकरीं जगतां त्रयाणां
     स्तुत्वा गिरं विमलयाम्यहमम्बिके त्वाम् ॥ १॥

पृथ्व्या जलेन शिखिना मरुताम्बरेण
     होत्रेन्दुना दिनकरेण च मूर्तिभाजः ।
देवस्य मन्मथरिपोरपि शक्तिमत्ता
     हेतुस्त्वमेव खलु पर्वतराजपुत्रि ॥ २॥

त्रिस्रोतसः सकलदेवसमर्च्चितायाः
     वैशिष्ट्यकारणमवैमि तदेव मातः ।
त्वत्पादपङ्कजपरागपवित्रितासु
     शम्भोर्जटासु सततं परिवर्तनं यत् ॥ ३॥

आनन्दयेत्कुमुदिनीमधिपः कलाना-
     न्नान्यामिनः कमलिनीमथ नेतरां वा ।
एकस्य मोदनविधौ परमेकमीष्टे
     त्वं तु प्रपञ्चमभिनन्दयसि स्वदृष्ट्या ॥ ४॥

आद्याप्यशेषजगतान्नवयौवनासि
     शैलाधिराजतनयाप्यतिकोमलासि ।
त्रय्याः प्रसूरपि तया न समीक्षितासि
     ध्येयासि गौरि मनसो न पथि स्थितासि ॥ ५॥

आसाद्य जन्म मनुजेषु चिराद्दुरापं
     तत्रापि पाटवमवाप्य निजेन्द्रियाणाम् ।
नाभ्यर्चयन्ति जगतां जनयित्रि ये त्वां
     निःश्रेणिकाग्रमधिरुह्य पुनः पतन्ति ॥ ६॥

कर्पूरचूर्णहिमवारिविलोडितेन
     ये चन्दनेन कुसुमैश्च सुजातगन्धैः ।
आराधयन्ति हि भवानि समुत्सुकास्त्वां
     ते खल्वखण्डभुवनाधिभुवः प्रथन्ते ॥ ७॥

आविश्य मध्यपदवीं प्रथमे सरोजे
     सुप्ता हि राजसदृशी विरचय्य विश्वम् ।
विद्युल्लतावलयविभ्रममुद्वहन्ती
     पद्मानि पञ्च विदलय्य समश्नुवाना ॥ ८॥

तन्निर्गतामृतरसैरभिषिच्य गात्रं
     मार्गेण तेन विलयं पुनरप्यवाप्ता ।
येषां हृदि स्फुरसि जातु न ते भवेयु-
     र्मातर्महेश्वरकुटुम्बिनि गर्भभाजः ॥ ९॥

आलम्बिकुण्डलभरामभिरामवक्त्रा-
     मापीवरस्तनतटीं तनुवृत्तमध्याम् ।
चिन्ताक्षसूत्रकलशालिखिताढ्यहस्ता-
     मावर्तयामि मनसा तव गौरि मूर्तिम् ॥ १०॥

आस्थाय योगमविजित्य च वैरिषट्क-
     माबध्य चेन्द्रियगणं मनसि प्रसन्ने ।
पाशाङ्कुशाभयवराढ्यकरांशुवक्त्रा-
     मालोकयन्ति भुवनेश्वरि योगिनस्त्वाम् ॥ ११॥

उत्तप्तहाटकनिभां करिभिश्चतुर्भि-
     रावर्तितामृतघटैरभिषिच्यमाना ।
हस्तद्वयेन नलिने रुचिरे वहन्ती
     पद्मापि साभयकरा भवसि त्वमेव ॥ १२॥

अष्टाभिरुग्रविविधायुधवाहिनीभि-
     र्द्दोर्वल्लरीभिरधिरुह्य मृगाधिवासम् ।
दूर्वादलद्युतिरमर्त्यविपक्षपक्षा-
     न्न्यक्कुर्वती त्वमसि देवि भवानि दुर्गे ॥ १३॥

आविर्न्निदाघजलशीकरशोभिवक्त्रां
     गुञ्जाफलेन परिकल्पितहारयष्टिम् ।
रत्नांशुकामसितकान्तिमलङ्कृतां त्वा-
     माद्यां पुलिन्दतरुणीमसकृन्नमामि ॥ १४॥

हंसैर्गतिः क्वणितनूपुरदूरदृष्टे
     मूर्तेरिवाप्तवचनैरनुगम्यमानौ ।
पद्माविवोर्द्ध्वमुखरूढसुजातनालौ
     श्रीकण्ठपत्नि शिरसैव दधे तवाङ्घ्री ॥ १५॥

द्वाभ्यां समीक्षितुमतृप्तिमतेव दृग्भ्या-
     मुत्पाद्यता त्रिनयनं वृषकेतनेन ।
सान्द्रानुरागभवनेन निरीक्ष्यमाणे
     जङ्घे उभे अपि भवानि तवानतोऽस्मि ॥ १६॥

ऊरू स्मरामि जितहस्तिकरावलेपौ
     स्थौल्येन मार्द्दवतया परिभूतरम्भौ ।
श्रोणीभरस्य सहनौ परिकल्प्य दत्तौ
     स्तम्भाविवाङ्गवयसा तव मध्यमेन ॥ १७॥

श्रोण्यौ स्तनौ च युगपत्प्रथयिष्यतोच्चै-
     र्बाल्यात्परेण वयसा परिकृष्णसारः ।
रोमावलीविलसितेन विभाव्यमूर्ति-
     र्मध्यं तव स्फुरतु मे हृदयस्य मध्ये ॥ १८॥

सख्यास्स्मरस्य हरनेत्रहुताशभीरो-
     र्ल्लावण्यवारिभरितं नवयौवनेन ।
आपाद्य दत्तमिव पल्लवमप्रविष्टं
     नाभिं कदापि तव देवि न विस्मरेयम् ॥ १९॥

ईशोऽपि गेहपिशुनं भसितं दधाने
     काश्मीरकर्द्दममनु स्तनपङ्कजे ते ।
स्नानोत्थितस्य करिणः क्षणलक्षफेनौ
     सिन्दूरितौ स्मरयतः समदस्य कुम्भौ ॥ २०॥

कण्ठातिरिक्तगलदुज्ज्वलकान्तिधारा
     शोभौ भुजौ निजरिपोर्मकरध्वजेन ।
कण्ठग्रहाय रचितौ किल दीर्घपाशौ
     मातर्मम स्मृतिपथं न विलज्जयेताम् ॥ २१॥

नात्यायतं रुचिरकम्बुविलासचौर्यं
     भूषाभरेण विविधेन विराजमानम् ।
कण्ठं मनोहरगुणं गिरिराजकन्ये
     सञ्चिन्त्य तृप्तिमुपयामि कदापि नाहम् ॥ २२॥

अत्यायताक्षमभिजातललाटपट्टं
     मन्दस्मितेन दरफुल्लकपोलरेखम् ।
बिम्बाधरं खलु समुन्नतदीर्घनासं
     यत्ते स्मरत्यसकृदम्ब स एव जातः ॥ २३॥

आविस्त्वयारकरलेखमनल्पगन्ध-
     पुष्पोपरि भ्रमदलिव्रजनिर्विशेषम् ।
यश्चेतसा कलयते तव केशपाशं
     तस्य स्वयं गलति देवि पुराणपाशः ॥ २४॥

श्रुतिसुरचितपाकं धीमतां स्तोत्रमेतत्
     पठति य इह मर्त्यो नित्यमार्द्द्रान्तरात्मा ।
स भवति पदमुच्चैस्सम्पदां पादनम्र-
     क्षितिपमुकुटलक्ष्मीर्ल्लक्षणानां चिराय ॥ २५॥

श्रुतिसुरचितपाकन्धीमतां स्तोत्रमेतत्
     पठति य इह मर्त्यो नित्यमार्द्द्रान्तरात्मा ।
स भवति पदमुच्चैस्सम्पदाम्पादनम्र-
     क्षितिपमुकुटलक्ष्मीर्ल्लक्षणानाञ्चिरा य ॥ २६॥

इति श्रीभुवनेश्वरीस्तोत्रं समाप्तम् ॥

यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।
  • 100% Authentic
  • Payment Protection
  • Privacy Protection
  • Help & Support
विज्ञापन
विज्ञापन


फ्री टूल्स

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
X