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आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी के पूजा, अनुष्ठान, व्रत विधि, मंत्र और इस विशेष त्योहार के बारे में

my jyotish expert Updated 09 Sep 2021 04:49 PM IST
गणेश चतुर्थी 2021
गणेश चतुर्थी 2021 - फोटो : My jyotish
हिंदू सनातन धर्म में भगवान श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले या किसी पूजन को करने से पहले भगवान श्री गणेश जी का पूजन किया जाता है। भगवान श्री गणेश में गणेश का अर्थ है गणों का स्वामी। भगवान श्री गणेश जी का त्योहार जिसे हम विनायक चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं और यह विशेष महत्व रखता है। पूरे भारत में इस त्योहार को बहुत भव्य तरीके से मनाया जाता है। जैसा कि नाम से ही लगता है कि यह भगवान श्री गणेश जी के सम्मान मनाया जाता है। भगवान शिव जी और देवी मां पार्वती के पुत्र भगवान श्री गणेश जी का जन्म इसी दिन हुआ था। इस त्योहार को हम 'विनायक चविथि' भी कहते हैं। भगवान श्री गणेश जी को भाद्रपद मास समर्पित होता है। इस माह में भगवान श्री गणेश जी की पूजा करना फलदाई माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश भगवान जी की चतुर्थी मनाई जाती है जिसे हम गणेश चतुर्थी कहते हैं। भादो मास में गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक भगवान श्री गणेश जी की पूजा अर्चना होती है। इस बार गणपति बप्पा 10 सितंबर 2021 को विराजेंगे एवं 19 सितंबर 2021 को उनकी विदाई की जाएगी। इस 10 दिनों में भगवान श्री गणेश जी की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाएगी। जगह-जगह पर गणपति बप्पा के पंडाल को सजाया जाएगा। इस 10 दिनों में बप्पा को प्रसन्न करने के लिए भगवान श्री गणेश जी की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि विधि विधान से पूजा करने से घर में रिद्धि-सिद्धि एवं सुख समृद्धि आती है। गजानन को खुश करने के लिए हम मोदक, दुर्वा घास, सिंदूर, केला, खीर इत्यादि उन्हें चढ़ाते हैं। भगवान श्री गणेश जी की पूजा का भी विशेष नियम होता है। उनके हर अंग की पूजा का विशेष मंत्र भी होता है और उसमें आपकी कोई गलती हो जाए तो बप्पा नाराज भी होते हैं। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी के दिन किस प्रकार से पूजा और अनुष्ठान करना चाहिए---

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  • इस दिन भगवान के भक्त प्रातः काल जल्दी उठ कर अपने घर की पूजा गृह की साफ सफाई करते हैं।
  • भगवान श्री गणेश जी की नई मूर्ति को एक ऊंचे से चबूतरे पर रखकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है।
  • इस 10 दिनों तक भगवान की भक्ति के साथ अनुष्ठान किए जाते हैं।
  • प्रतिदिन भगवान श्री गणेश जी की आरती की जाती है एवम उन्हें भोग लगाया जाता है।
  • भगवान श्री गणेश जी को मोदक बहुत प्रिय है इस कारण से रोजाना उन्हें मोदक और नैवेद्य चढ़ाए जाते हैं।
  • भगवान श्री गणेश जी का प्रसाद हर किसी को बांटा जाता है।
  • जहां पर सार्वजनिक स्थानों पर भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है वहां पर बड़े-बड़े पंडाल सजाए जाते हैं।
  • भक्त लोग पंडालों में बहुत खुशी से आते हैं।
  • भगवान श्री गणेश जी की प्रतिदिन पूजा की जाती है और उन्हें भोग लगाया जाता है।
  • 10 दिनों की पूजा अर्चना के बाद भगवान श्री गणेश जी का विसर्जन बहुत धूमधाम से निकाला जाता है।


गणेश चतुर्थी : मंत्र--
ऊं एकदंताय विधामहे, वक्रतुंडाय धिमही, तन्नो दंति प्रचोदयात्
ऊं वक्रतुंडायक नृत्यस्त्रय क्लिंग हिंग श्रृंग गण गणपतये वर वरदा सर्वजनं मे वाशमनय स्वाहा
वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभः निर्विघ्नम कुरुमेदेव सर्व कार्येषु सर्वदा

गणेश गायत्री मंत्र--
ऊं एकदंताय विधामहे, वक्रतुंडाय धिमही, तन्नो दंति प्रचोदयात्

वक्रतुंड मंत्र--
ऊं वक्रतुंडायक नृत्यस्त्रय क्लिंग हिंग श्रृंग गं गणपतये वर वरदा सर्वजनं मे वाशमनय स्वाहा

दैनिक गणपति मंत्र--
ऊं गं गणपतये नमः

नाम के साथ गणेश मंत्र--
-ऊं गणध्याक्षय नमः
-ऊं गजाननाय नमः
-ऊं विघ्नाशय नमः
-ऊं गजकर्णकाय नमः
-ऊं विकातय नमः
-ऊं विनायकाय नमः

ऋण हर्ता मंत्र--
ऊं गणेश ऋणं छिंदी वरेण्यम हूं नमः फट

शक्तिविनायक मंत्र--
ऊं ह्रीं ग्रीं ह्रीं

गणेश मूल मंत्र--
ऊं श्रीं ह्रीं क्लें ग्लौम गं गणपतये वर वरद सर्वजन जनमय वाशमनये स्वाहा तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुंडाय धिमहि तन्नो दंति प्रचोदयत ओम शांति शांति शांतिः


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