myjyotish

8595527216

   whatsapp

8595527218

Whatsup
  • Login

  • Cart

  • wallet

    Wallet

Home ›   Blogs Hindi ›   Kumbh 2021 : significance and Belief

कुम्भ से जुड़ी यह विशेष मान्यताएं नहीं जानते होंगे आप !

Myjyotish Expert Updated 12 Jan 2021 11:23 AM IST
Astrology
Astrology - फोटो : Myjyotish
कुंभ का अर्थ होता है अमृत का घड़ा। कुंभ 2021 हरिद्वार में होने वाला है जिसके लिए सभी श्रृद्धालुओं को और लोगों को बेसब्री से इंतजार है। कुंभ हिन्दू धर्मी  लोगों के लिए किसी मेले से कम नहीं होता इसीलिए बूढ़े व बच्चों को इसका सालों से इंतजार रहता है। कुंभ की कथा
देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन से अमृत का निर्माण किया। सभी देवता जानते थे कि अगर दानवों ने अमृत पी लिया तो वह अमर हो जाऐंगे और हमेशा स्वर्ग में राज करेंगे। इसीलिए जैसे ही अमृत का निर्माण हुआ देवता अमृत का घड़ा लेकर भाग निकले। सभी दानव, देवताओं के पीछे भागने लगे। जब देवता दानवों से भाग रहे थे तब अमृत की बूंदे धरती पर गिरी। वह स्थान थे- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक।

यह युद्ध 12 दिनों तक चला। देवताओं के गृह पर 1 दिन 1 साल के बराबर होता है इसलिए  देवताओं के 12 दिन हमारे 12 साल के बराबर थे। इसीलिए कुंभ मेला हर बारह साल में एक बार चार स्थानों पर मनाया जाता है। परन्तु इस वर्ष ग्रहों की चाल के साथ ही यह कुम्भ 11 वर्षों बाद आया है।

कुम्भ 2021 में शिव शंकर को करें प्रसन्न कराएं रुद्राभिषेक, समस्त कष्ट होंगे दूर

कुंभ की मान्यता
ऐसी मान्यता है कि  इन चार स्थानों को कुंभ मेला के समय देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए इस समय यहाँ डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि सभी हिन्दु कुंभ या कोई और त्यौहार को नहाये बिना नहीं मनाते हैं।
गंगा के इतने मैले होने के बावजूद भी सभी श्रृद्धालू बिनी किसी हिचक के गंगा में डुबकी लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि पृथवी से स्वर्ग का रास्ता कुंभ के समय खुल जाता है। और पवित्र आत्मा को स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है।

कुंभ के समय शाही स्नान का महत्व
शाही स्नान में अलग-अलग अखाड़ों के साधु-संत सोने-चांदी की पालकियों व हाथी-घोड़ों पर बैठकर स्नान के लिए पहुंचते हैं। सभी साधु अपनी शक्ति और वैभव का प्रदर्शन करते हैं। इसे राजयोग स्नान भी कहा जाता है। इसमें साधु-संत एक तय समय पर ही डुबकी लगाते हैं। माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में डुबकी लगाने से अमरता का वरदान मिल जाता है। इसी वजह से कुंभ मेला इतनी सुर्खीयों में रहता है।
शाही स्नान के बाद ही आम लोगों को नदी में डुबकी लगाने की अनुमति दी जाती है। यह शाही स्नान मुहूर्त के अनुसार सुबह 4 बजे शुरू हो जाता है। सुबह 4 बजे से पहले ही साधु-संत एकत्रितत हो नारे लगाने लगते हैं। कुछ साधु अर्धवस्त्र व कुछ र्निवस्त्र होकर डुबकी लगातो हैं।

यह भी पढ़े :-           

 पूजन में क्यों बनाया जाता है स्वास्तिष्क ? जानें चमत्कारी कारण

यदि कुंडली में हो चंद्रमा कमजोर, तो कैसे होते है परिणाम ?

संतान प्राप्ति हेतु जरूर करें यह प्रभावी उपाय
  • 100% Authentic
  • Payment Protection
  • Privacy Protection
  • Help & Support

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms and Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
X